24 जुलाई 2026
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कांग्रेस ने महिला आरक्षण पर अपने अडिग समर्थन के साथ संविधान संशोधन विधेयक खारिज किया, इसे विपक्ष की जीत बताया

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कांग्रेस ने महिला आरक्षण पर अपने अडिग समर्थन के साथ संविधान संशोधन विधेयक खारिज किया, इसे विपक्ष की जीत बताया

सारांश

लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के खारिज होने के बाद कांग्रेस ने इसे अपनी बड़ी जीत मानते हुए महिला आरक्षण के प्रति अपने अडिग समर्थन की बात कही। कांग्रेस ने परिसीमन की शर्त को अनावश्यक बताया है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण के प्रति कांग्रेस का समर्थन अडिग है।
कांग्रेस ने परिसीमन की शर्त को अस्वीकार किया।
विधेयक का खारिज होना विपक्ष की एकजुटता को दर्शाता है।
सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्यों यह विधेयक लाया गया था।
कांग्रेस ने इसे अपनी महान जीत बताया।

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के खारिज होने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे अपनी महान जीत बताया। कांग्रेस सांसदों ने कहा कि उनका महिला आरक्षण के प्रति समर्थन अडिग और पूर्ण है, लेकिन वे परिसीमन और जनगणना की शर्तों को इसके साथ जोड़ने का विरोध कर रहे थे।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा, "महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित हुआ था और इसे कल से अधिसूचित किया गया है। यह विधेयक अभी भी प्रभावी है। जो बात खारिज हुई है, वह है इसे नए परिसीमन अभ्यास से जोड़ना, जिसे अस्वीकार कर दिया गया है। हमने केवल परिसीमन का विरोध किया है। महिला आरक्षण के प्रति हमारा समर्थन पूर्ण और पूरी तरह से समर्पित है।"

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, "महिलाओं के मुद्दों की आड़ में, देश को उत्तर और दक्षिण के बीच असमानता की खाई में फंसाने की सरकार की कोशिश नाकाम हो गई है।"

कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि विधेयक इसलिए पारित नहीं हो पाया क्योंकि महिला आरक्षण को जानबूझकर परिसीमन से जोड़ा गया था। उन्होंने कहा, "यदि महिला आरक्षण विधेयक को अलग से लाया जाता है, जैसा कि विपक्षी सदस्यों ने कहा है, तो हम इसे सर्वसम्मति से पारित कर देंगे, बशर्ते इसे अलग रखा जाए।"

मुंबई में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता चरण सिंह सप्रा ने कहा, "भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि वह महिला आरक्षण विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक क्यों ला रही थी और वह 2011 की जनगणना पर क्यों निर्भर थी। कांग्रेस चाहती है कि महिलाओं को उनके अधिकार मिलें, लेकिन यदि कोई जाति जनगणना से बचने का प्रयास करेगा तो उसे रोक दिया जाएगा।"

कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने इसे विपक्ष की महान जीत बताया। उन्होंने कहा, "यह विपक्ष की एक बड़ी जीत है। हमने सरकार से कहा था कि यह कानून सही नहीं है, यह गलत है। इसलिए आपको पूरे विपक्ष के साथ चर्चा करनी चाहिए। अन्यथा, यह संशोधन विधेयक सदन में गिर जाएगा, क्योंकि इस सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है।"

सुरेश ने आगे कहा, "हां, पूरा विपक्ष एकजुट हुआ और इस विधेयक को हरा दिया। भविष्य में भी पूरा विपक्ष एकजुट रहेगा और भाजपा के साथ-साथ सांप्रदायिक ताकतों को भी हराएगा।"

कांग्रेस का स्पष्ट रुख है कि 2023 का महिला आरक्षण विधेयक पहले से ही लागू है और इसे तुरंत प्रभावी बनाया जाना चाहिए। पार्टी ने परिसीमन की शर्त को अनावश्यक और राजनीतिक मंशा वाला बताया। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि विपक्ष की एकजुटता के कारण सरकार का प्रयास असफल रहा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करना है।
क्यों खारिज हुआ 131वां संविधान संशोधन विधेयक?
इस विधेयक को परिसीमन और जनगणना की शर्तों के साथ जोड़ने के कारण खारिज किया गया।
कांग्रेस का रुख क्या है?
कांग्रेस का रुख है कि महिला आरक्षण के प्रति उनका समर्थन पूर्ण और अडिग है।
किसने कहा कि यह विपक्ष की जीत है?
कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने इसे विपक्ष की बड़ी जीत बताया।
सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?
सरकार ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि सरकार की कोशिशें असफल रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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