6 जुलाई 2026
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कॉक्स बाजार भूस्खलन: रोहिंग्या शिविरों में 9 की मौत, 5 बच्चे शामिल — भारी बारिश का कहर

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कॉक्स बाजार भूस्खलन: रोहिंग्या शिविरों में 9 की मौत, 5 बच्चे शामिल — भारी बारिश का कहर

सारांश

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में मानसून की भारी बारिश ने रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों को तबाह कर दिया — एक ही सुबह तीन अलग-अलग शिविरों में भूस्खलन से 9 लोगों की जान गई, जिनमें 5 मासूम बच्चे शामिल हैं। यह त्रासदी उन लाखों शरणार्थियों की कमज़ोरी उजागर करती है जो पहाड़ी ढलानों पर अस्थायी आश्रयों में रहने को मजबूर हैं।

मुख्य बातें

6 जुलाई 2026 को कॉक्स बाजार में भारी बारिश के बाद कई भूस्खलन हुए, जिनमें 9 लोगों की मौत हुई।
मृतकों में 5 बच्चे शामिल हैं — सबसे छोटा 3 वर्षीय हारुनुर रशीद ।
सर्वाधिक क्षति उखिया उपजिला के रोहिंग्या शिविरों — जामटोली कैंप-15 , कुतुपालोंग कैंप-7 और बालुखाली कैंप-11 — में हुई।
कॉक्स बाजार नगर के छत्तरघोना इलाके में भी एक व्यक्ति अली अकबर की मौत हुई।
उपजिला निर्वाही अधिकारी पन्ना अख्तर ने संवेदनशील क्षेत्रों को खाली करने की अपील की है।

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले में 6 जुलाई 2026 की सुबह भारी बारिश के बाद कई स्थानों पर हुए भूस्खलन में 9 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 5 बच्चे भी शामिल हैं। अधिकांश हादसे उखिया उपजिला के रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में हुए, जबकि एक मौत कॉक्स बाजार नगर में दर्ज की गई। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों को खाली करने की अपील जारी की है।

मुख्य घटनाक्रम

सबसे बड़ा हादसा जामटोली कैंप-15 में हुआ, जहाँ पहाड़ी से खिसकी मिट्टी 44 वर्षीय मोहम्मद कमाल हुसैन के घर पर गिर पड़ी। इस हादसे में कमाल हुसैन, उनकी 39 वर्षीय पत्नी हुमायरा बेगम और 4 वर्षीय बेटे मोहम्मद अनस की जान चली गई। मलबे से दो अन्य लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

कुतुपालोंग रोहिंग्या कैंप-7 में पहाड़ी ढहने से 7 वर्षीय एकराम की मौत हुई। इसके कुछ घंटों बाद बालुखाली रोहिंग्या कैंप-11 में हुए भूस्खलन में चार और लोगों की जान गई — 27 वर्षीय उम्मे हबीबा, 13 वर्षीय तंजीना अख्तर, 5 वर्षीय मोहम्मद रिहान और 3 वर्षीय हारुनुर रशीद

कॉक्स बाजार नगर के छत्तरघोना इलाके में एक अलग भूस्खलन में अली अकबर की मौत हो गई। उनके परिवार के तीन सदस्य मलबे में दब गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों ने निकालकर अस्पताल पहुँचाया, लेकिन डॉक्टरों ने अली अकबर को मृत घोषित कर दिया।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

उखिया की उपजिला निर्वाही अधिकारी पन्ना अख्तर ने कहा, 'प्रशासन लगातार माइक से लोगों को सतर्क कर रहा है और जोखिम वाले क्षेत्रों को खाली करने की सलाह दी जा रही है। लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।' उखिया प्रशासन ने बताया कि लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा काफी बढ़ गया है।

रोहिंग्या शिविरों पर विशेष खतरा

गौरतलब है कि कॉक्स बाजार में दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर स्थित हैं, जहाँ लाखों रोहिंग्या शरणार्थी पहाड़ी ढलानों पर अस्थायी आश्रयों में रहते हैं। मानसून के दौरान इन शिविरों में भूस्खलन का खतरा हर वर्ष बना रहता है, क्योंकि ये ढाँचे भारी बारिश झेलने में सक्षम नहीं होते। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में मानसून की बारिश असामान्य रूप से तेज़ बताई जा रही है।

आम जनता पर असर

मृतकों में बड़ी संख्या में बच्चे होना इस त्रासदी की गंभीरता को और बढ़ा देता है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, और स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मौतें, और फिर खाली करने की अपीलें। सवाल यह है कि लाखों शरणार्थियों को पहाड़ी ढलानों पर अस्थायी तिरपाल के नीचे रखने की मजबूरी कब तक जारी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बांग्लादेश सरकार दोनों इन शिविरों की स्थायी बसावट और आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे पर ठोस कदम उठाने में विफल रहे हैं। बच्चों की बड़ी संख्या में मौतें यह याद दिलाती हैं कि यह महज़ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक नीतिगत विफलता भी है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में भूस्खलन कब और कहाँ हुआ?
यह भूस्खलन 6 जुलाई 2026 की सुबह कॉक्स बाजार जिले के उखिया उपजिला के रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों और कॉक्स बाजार नगर के छत्तरघोना इलाके में हुआ। भारी मानसूनी बारिश के कारण कई स्थानों पर पहाड़ी ढलानें खिसक गईं।
कॉक्स बाजार भूस्खलन में कितने लोगों की मौत हुई?
इस आपदा में कुल 9 लोगों की मौत हुई, जिनमें 5 बच्चे शामिल हैं। उखिया के विभिन्न रोहिंग्या शिविरों में 8 मौतें हुईं और कॉक्स बाजार नगर में एक व्यक्ति की जान गई।
रोहिंग्या शिविर भूस्खलन के लिए इतने संवेदनशील क्यों हैं?
कॉक्स बाजार के रोहिंग्या शिविर पहाड़ी ढलानों पर बने हैं और वहाँ के अस्थायी आश्रय भारी बारिश झेलने में सक्षम नहीं हैं। मानसून के दौरान यहाँ हर वर्ष भूस्खलन का खतरा बना रहता है।
प्रशासन ने इस आपदा के बाद क्या कदम उठाए?
उखिया की उपजिला निर्वाही अधिकारी पन्ना अख्तर ने बताया कि प्रशासन माइक से लोगों को सतर्क कर रहा है और जोखिम वाले क्षेत्रों को खाली करने की सलाह दी जा रही है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं।
इस भूस्खलन में सबसे ज़्यादा नुकसान कहाँ हुआ?
सबसे बड़ा हादसा जामटोली कैंप-15 में हुआ, जहाँ एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान गई। इसके अलावा बालुखाली कैंप-11 में चार और कुतुपालोंग कैंप-7 में एक बच्चे की मौत हुई।
राष्ट्र प्रेस
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