सीपीसी की 105वीं वर्षगांठ: कई देशों के नेताओं और विद्वानों ने चीनी शासन मॉडल की सराहना की
सारांश
मुख्य बातें
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की स्थापना की 105वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित महासभा में चीन के सर्वोच्च नेता शी चिनफिंग ने पार्टी के शानदार इतिहास का सिंहावलोकन किया और सीपीसी की विशिष्ट विशेषताओं को रेखांकित किया। इस अवसर पर विश्व के कई देशों के राजनेताओं और अध्ययनकर्ताओं ने अपने अनुभवों और वस्तुगत दृष्टिकोण से सीपीसी के शासन की उपलब्धियों की प्रशंसा की।
लाओस और बांग्लादेश के प्रतिनिधियों के विचार
लाओस जन क्रांतिकारी पार्टी की केंद्रीय कमेटी के प्रचार विभाग के उप मंत्री खाम्मोन चांथाछिट ने कहा कि सौ वर्षों में सीपीसी ने विकास का एक असाधारण उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने विशेष रूप से 2012 में सीपीसी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद चीन के विकास के स्पष्ट ब्लूप्रिंट और उसके मजबूत सैद्धांतिक आधार की सराहना की।
बांग्लादेश के प्रेस और ब्रॉडकास्टिंग मंत्री जाहिर उद्दिन स्वापोन ने सीपीसी के नेतृत्व में चीन की सामाजिक व आर्थिक प्रगति को 'आश्चर्यजनक' बताया। उनके अनुसार, चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार और डिजिटीकरण जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
कंबोडिया और श्रीलंका के प्रतिनिधियों का दृष्टिकोण
कंबोडियाई जन पार्टी की केंद्रीय समिति के स्थायी सदस्य और कंबोडिया-चीन मैत्री संघ के अध्यक्ष एलके साम ओल ने कहा कि उनके विचार में सीपीसी और चीन सरकार विश्व शांति, वैश्विक स्थिरता एवं समृद्धि की सुरक्षा में एक कुंजीभूत शक्ति के रूप में उभरे हैं और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में केंद्रीय भूमिका निभाई है।
श्रीलंकाई कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव जी. वीरासिंघे ने सीपीसी की 'लोकतांत्रिक केंद्रीयता' प्रणाली को एक विशिष्ट संरचनात्मक लाभ बताया। उनके अनुसार यह व्यवस्था कुशल निर्णय-निर्माण और व्यापक जनमत के समावेश को एक साथ साधती है, जिसने देश के समग्र विकास को गति दी है और अन्य देशों के लिए भी एक मॉडल प्रस्तुत किया है।
वर्षगांठ का महत्त्व और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि 1 जुलाई 1921 को स्थापित सीपीसी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से एक है। 105 वर्षों के इस सफर में पार्टी ने कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तक की यात्रा तय की है। यह वर्षगांठ ऐसे समय में आई है जब चीन वैश्विक व्यापार तनाव और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।
आगे की दिशा
विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की यह प्रशंसा ऐसे समय में सामने आई है जब चीन अपने 'आधुनिक समाजवादी राष्ट्र' के निर्माण के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। आलोचकों का कहना है कि इन प्रतिक्रियाओं को उन देशों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिनके चीन के साथ घनिष्ठ द्विपक्षीय संबंध हैं। सीपीसी के शासन मॉडल पर वैश्विक बहस आने वाले वर्षों में और तीव्र होने की संभावना है।