7 जुलाई 2026
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सीपीसी की 105वीं वर्षगांठ: कई देशों के नेताओं और विद्वानों ने चीनी शासन मॉडल की सराहना की

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सीपीसी की 105वीं वर्षगांठ: कई देशों के नेताओं और विद्वानों ने चीनी शासन मॉडल की सराहना की

सारांश

सीपीसी की 105वीं वर्षगांठ पर शी चिनफिंग ने पार्टी की विरासत को रेखांकित किया, जबकि लाओस, बांग्लादेश, कंबोडिया और श्रीलंका के प्रतिनिधियों ने चीन के विकास मॉडल, AI नेतृत्व और वैश्विक शांति में भूमिका की सराहना की — हालाँकि ये सभी देश चीन के करीबी साझेदार हैं।

मुख्य बातें

सीपीसी की 105वीं वर्षगांठ पर 1 जुलाई 2026 को बीजिंग में महासभा आयोजित हुई।
चीन के सर्वोच्च नेता शी चिनफिंग ने पार्टी के इतिहास का सिंहावलोकन कर सीपीसी की विशिष्ट विशेषताएँ रेखांकित कीं।
लाओस के उप मंत्री खाम्मोन चांथाछिट ने 2012 की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद के विकास ब्लूप्रिंट की सराहना की।
बांग्लादेश के मंत्री जाहिर उद्दिन स्वापोन ने चीन को AI और डिजिटीकरण में अग्रणी बताया।
श्रीलंकाई कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव जी.
वीरासिंघे ने सीपीसी की 'लोकतांत्रिक केंद्रीयता' को एक विशिष्ट संरचनात्मक लाभ बताया।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की स्थापना की 105वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित महासभा में चीन के सर्वोच्च नेता शी चिनफिंग ने पार्टी के शानदार इतिहास का सिंहावलोकन किया और सीपीसी की विशिष्ट विशेषताओं को रेखांकित किया। इस अवसर पर विश्व के कई देशों के राजनेताओं और अध्ययनकर्ताओं ने अपने अनुभवों और वस्तुगत दृष्टिकोण से सीपीसी के शासन की उपलब्धियों की प्रशंसा की।

लाओस और बांग्लादेश के प्रतिनिधियों के विचार

लाओस जन क्रांतिकारी पार्टी की केंद्रीय कमेटी के प्रचार विभाग के उप मंत्री खाम्मोन चांथाछिट ने कहा कि सौ वर्षों में सीपीसी ने विकास का एक असाधारण उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने विशेष रूप से 2012 में सीपीसी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद चीन के विकास के स्पष्ट ब्लूप्रिंट और उसके मजबूत सैद्धांतिक आधार की सराहना की।

बांग्लादेश के प्रेस और ब्रॉडकास्टिंग मंत्री जाहिर उद्दिन स्वापोन ने सीपीसी के नेतृत्व में चीन की सामाजिक व आर्थिक प्रगति को 'आश्चर्यजनक' बताया। उनके अनुसार, चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार और डिजिटीकरण जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

कंबोडिया और श्रीलंका के प्रतिनिधियों का दृष्टिकोण

कंबोडियाई जन पार्टी की केंद्रीय समिति के स्थायी सदस्य और कंबोडिया-चीन मैत्री संघ के अध्यक्ष एलके साम ओल ने कहा कि उनके विचार में सीपीसी और चीन सरकार विश्व शांति, वैश्विक स्थिरता एवं समृद्धि की सुरक्षा में एक कुंजीभूत शक्ति के रूप में उभरे हैं और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में केंद्रीय भूमिका निभाई है।

श्रीलंकाई कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव जी. वीरासिंघे ने सीपीसी की 'लोकतांत्रिक केंद्रीयता' प्रणाली को एक विशिष्ट संरचनात्मक लाभ बताया। उनके अनुसार यह व्यवस्था कुशल निर्णय-निर्माण और व्यापक जनमत के समावेश को एक साथ साधती है, जिसने देश के समग्र विकास को गति दी है और अन्य देशों के लिए भी एक मॉडल प्रस्तुत किया है।

वर्षगांठ का महत्त्व और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि 1 जुलाई 1921 को स्थापित सीपीसी आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में से एक है। 105 वर्षों के इस सफर में पार्टी ने कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तक की यात्रा तय की है। यह वर्षगांठ ऐसे समय में आई है जब चीन वैश्विक व्यापार तनाव और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी अंतरराष्ट्रीय भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।

आगे की दिशा

विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की यह प्रशंसा ऐसे समय में सामने आई है जब चीन अपने 'आधुनिक समाजवादी राष्ट्र' के निर्माण के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। आलोचकों का कहना है कि इन प्रतिक्रियाओं को उन देशों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिनके चीन के साथ घनिष्ठ द्विपक्षीय संबंध हैं। सीपीसी के शासन मॉडल पर वैश्विक बहस आने वाले वर्षों में और तीव्र होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कंबोडिया, श्रीलंका और बांग्लादेश सभी चीन के करीबी आर्थिक साझेदार हैं और 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' से जुड़े हैं। इन देशों के प्रतिनिधियों की सराहना स्वाभाविक रूप से उस द्विपक्षीय ढाँचे के भीतर आती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं बताती कि 'लोकतांत्रिक केंद्रीयता' जैसे शासन मॉडल की वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार संगठनों और स्वतंत्र विद्वानों द्वारा आलोचना भी होती है। 105 वर्षों की उपलब्धियों का आकलन तभी संपूर्ण होगा जब विविध और स्वतंत्र दृष्टिकोण भी इस बहस में शामिल हों।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीसी की 105वीं वर्षगांठ पर क्या हुआ?
1 जुलाई 2026 को बीजिंग में सीपीसी की स्थापना की 105वीं वर्षगांठ पर एक महासभा आयोजित हुई, जिसमें चीन के सर्वोच्च नेता शी चिनफिंग ने पार्टी के इतिहास और उपलब्धियों का सिंहावलोकन किया। इस अवसर पर कई देशों के प्रतिनिधियों ने भी सीपीसी के शासन मॉडल की सराहना की।
किन देशों के नेताओं ने सीपीसी की प्रशंसा की?
लाओस, बांग्लादेश, कंबोडिया और श्रीलंका के वरिष्ठ राजनेताओं और पार्टी प्रतिनिधियों ने सीपीसी के शासन की सराहना की। इनमें लाओस के उप मंत्री खाम्मोन चांथाछिट, बांग्लादेश के मंत्री जाहिर उद्दिन स्वापोन, कंबोडिया के एलके साम ओल और श्रीलंका के जी. वीरासिंघे शामिल हैं।
सीपीसी की 'लोकतांत्रिक केंद्रीयता' प्रणाली क्या है?
श्रीलंकाई कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव जी. वीरासिंघे के अनुसार, यह प्रणाली कुशल निर्णय-निर्माण और व्यापक जनमत के समावेश को एकीकृत करने के लिए डिजाइन की गई है। इसे सीपीसी के एक विशिष्ट संरचनात्मक लाभ के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
चीन की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस का क्या महत्त्व है?
2012 में आयोजित सीपीसी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस वह मील का पत्थर है जब शी चिनफिंग सत्ता में आए और चीन के विकास का एक नया दीर्घकालिक ब्लूप्रिंट तैयार किया गया। लाओस के प्रतिनिधि ने इसी कांग्रेस के बाद के विकास को विशेष रूप से रेखांकित किया।
सीपीसी की स्थापना कब हुई थी?
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना 1 जुलाई 1921 को हुई थी। 2026 में पार्टी ने अपनी 105वीं वर्षगांठ मनाई, और इस अवसर पर बीजिंग में एक विशेष महासभा का आयोजन किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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