दतिया उपचुनाव: भाजपा की रणनीतिक बैठक में उपमुख्यमंत्री देवड़ा, तिवारी ने नरोत्तम मिश्रा को बताया 'अभिभावक'
सारांश
मुख्य बातें
दतिया उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर उभरी नाराज़गी के बीच उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने 12 जुलाई को दतिया में पार्टी की एक अहम बैठक में हिस्सा लिया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटे जाने के बाद उनके समर्थकों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने विरोध-प्रदर्शन किया, जबकि कथित तौर पर नाराज़ मिश्रा स्वयं दिल्ली रवाना हो गए।
बैठक का मकसद और देवड़ा का बयान
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बैठक के बाद कहा, 'भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। अगर कुछ नाराज़गी है तो हम उसे आपस में सुलझा लेंगे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव के समय इस तरह की बैठकें सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इसमें वरिष्ठ नेता भाग लेते हैं।
कांग्रेस के उम्मीदवार के बारे में देवड़ा ने कहा कि उनके सामने प्रतिस्पर्धा कांग्रेस से है, जिसने उनके अनुसार 'प्रदेश और देश में कोई काम नहीं किया।' उन्होंने भरोसा जताया कि जनता अपना फैसला चुनाव परिणामों में दिखाएगी।
भाजपा उम्मीदवार तिवारी का रुख
भाजपा के घोषित उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने कहा कि बैठक में वरिष्ठ नेताओं समेत स्थानीय कार्यकर्ता शामिल हुए और चुनावी रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। पार्टी में आंतरिक मतभेद के सवाल पर उन्होंने कहा, 'सब परिवार के ही लोग हैं। हम सभी ने शुरुआत में जमीनी स्तर पर साथ मिलकर काम किया है।'
तिवारी ने यह भी कहा कि कांग्रेस सहित मैदान में उतरे सभी उम्मीदवारों को अपने काम के दम पर वोट माँगने का हक है।
नरोत्तम मिश्रा को लेकर तिवारी का भावनात्मक बयान
नरोत्तम मिश्रा के प्रचार अभियान में शामिल होने के सवाल पर आशुतोष तिवारी ने कहा, 'वह हमारे वरिष्ठ नेता हैं और मेरे व्यक्तिगत अभिभावक हैं। हम सालों से साथ काम कर रहे हैं और उनके मार्गदर्शन में हम बेहतर प्रदर्शन करेंगे।' यह बयान इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है कि टिकट वितरण को लेकर जो तनाव उभरा था, उसे पाटने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में उपचुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही सभी दलों ने अपनी-अपनी रणनीति तेज़ कर दी है। गौरतलब है कि दतिया सीट पर भाजपा का दीर्घकालिक प्रभाव रहा है, और नरोत्तम मिश्रा जैसे वरिष्ठ नेता की नाराज़गी पार्टी के लिए आंतरिक एकजुटता की परीक्षा बन सकती है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि मतदान से पहले सभी गुट एक मंच पर आ जाएँ।