दिल्ली क्राइम ब्रांच ने पकड़े प्रतिबंधित चीनी मांझे के तीन तस्कर, 1,398 रीलें और कार जब्त
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बुधवार, 12 अगस्त को प्रतिबंधित चीनी/प्लास्टिक मांझे की अवैध तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 1,398 रीलें प्रतिबंधित मांझा तथा एक रेनो ट्राइबर कार जब्त की। यह छापेमारी पश्चिमी दिल्ली में तब हुई जब एक विशेष टीम को खेप के परिवहन की गोपनीय सूचना मिली थी।
ऑपरेशन कैसे हुआ
क्राइम ब्रांच की डब्ल्यूआर-1 यूनिट को मुखबिर से सूचना मिली कि प्रतिबंधित चीनी/प्लास्टिक मांझे की एक बड़ी खेप वाहन के ज़रिए ले जाई जा रही है। इस पर एक विशेष टीम घोड़े वाला मंदिर के निकट निर्धारित स्थान पर तैनात हो गई।
इसी दौरान ख्याला-पश्चिम विहार नाले की ओर से रघुबीर नगर की तरफ आती एक संदिग्ध कार पर नज़र पड़ी। मुखबिर की पुष्टि के बाद टीम ने गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल के पास वाहन को रोककर तीनों सवारों को हिरासत में ले लिया। तलाशी में वाहन से कई प्लास्टिक बैग और गत्ते के डिब्बे बरामद हुए, जिनमें प्रतिबंधित मांझा भरा हुआ था।
गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में 33 वर्षीय राजेश नांगलोई के लोकेश सिनेमा के पास जेजे कॉलोनी का निवासी है, जो मज़दूरी करता है। 23 वर्षीय असद किराड़ी सुलेमान नगर के हरसुख ब्लॉक का रहने वाला है। 19 वर्षीय सोहेल प्रेम नगर का निवासी है और आईटीआई प्रशिक्षित है।
पूछताछ में तीनों ने स्वीकार किया कि वे प्रतिबंधित मांझा ले जा रहे थे और उसे बेचने की योजना बना रहे थे।
कानूनी कार्रवाई
इस मामले में पुष्प विहार स्थित क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(बी) और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5/15 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। जाँच में सामने आया कि यह सामग्री दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग की उन अधिसूचनाओं का सीधा उल्लंघन है, जिनके तहत चीनी/प्लास्टिक मांझे के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है।
आगे की जाँच
पुलिस अब इस प्रतिबंधित सामग्री के आपूर्ति स्रोत और उससे जुड़े व्यापक नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब स्वतंत्रता दिवस और पतंगबाज़ी के त्योहारी सीज़न के मद्देनज़र दिल्ली पुलिस प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ अभियान तेज़ कर रही है। गौरतलब है कि चीनी मांझे से हर साल दर्जनों लोग और पक्षी घायल होते हैं, जिसके चलते न्यायालयों और सरकार ने इस पर सख्त पाबंदी लगाई है।