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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने पकड़े प्रतिबंधित चीनी मांझे के तीन तस्कर, 1,398 रीलें और कार जब्त

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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने पकड़े प्रतिबंधित चीनी मांझे के तीन तस्कर, 1,398 रीलें और कार जब्त

सारांश

स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली क्राइम ब्रांच ने पश्चिमी दिल्ली में प्रतिबंधित चीनी मांझे की बड़ी खेप पकड़ी — 1,398 रीलें और एक कार जब्त, तीन आरोपी गिरफ्तार। पुलिस अब सप्लाई नेटवर्क की तह तक जाने में जुटी है।

मुख्य बातें

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 12 अगस्त को प्रतिबंधित चीनी/प्लास्टिक मांझे के साथ तीन आरोपियों — राजेश, असद और सोहेल — को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने 1,398 रीलें प्रतिबंधित मांझा और एक रेनो ट्राइबर कार जब्त की।
मामला बीएनएस धारा 223(बी) और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 की धारा 5/15 के तहत पुष्प विहार क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज।
आरोपियों ने पूछताछ में माना कि वे मांझा बेचने की योजना बना रहे थे।
पुलिस प्रतिबंधित सामग्री के आपूर्ति स्रोत और व्यापक नेटवर्क की जाँच कर रही है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बुधवार, 12 अगस्त को प्रतिबंधित चीनी/प्लास्टिक मांझे की अवैध तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 1,398 रीलें प्रतिबंधित मांझा तथा एक रेनो ट्राइबर कार जब्त की। यह छापेमारी पश्चिमी दिल्ली में तब हुई जब एक विशेष टीम को खेप के परिवहन की गोपनीय सूचना मिली थी।

ऑपरेशन कैसे हुआ

क्राइम ब्रांच की डब्ल्यूआर-1 यूनिट को मुखबिर से सूचना मिली कि प्रतिबंधित चीनी/प्लास्टिक मांझे की एक बड़ी खेप वाहन के ज़रिए ले जाई जा रही है। इस पर एक विशेष टीम घोड़े वाला मंदिर के निकट निर्धारित स्थान पर तैनात हो गई।

इसी दौरान ख्याला-पश्चिम विहार नाले की ओर से रघुबीर नगर की तरफ आती एक संदिग्ध कार पर नज़र पड़ी। मुखबिर की पुष्टि के बाद टीम ने गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल के पास वाहन को रोककर तीनों सवारों को हिरासत में ले लिया। तलाशी में वाहन से कई प्लास्टिक बैग और गत्ते के डिब्बे बरामद हुए, जिनमें प्रतिबंधित मांझा भरा हुआ था।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में 33 वर्षीय राजेश नांगलोई के लोकेश सिनेमा के पास जेजे कॉलोनी का निवासी है, जो मज़दूरी करता है। 23 वर्षीय असद किराड़ी सुलेमान नगर के हरसुख ब्लॉक का रहने वाला है। 19 वर्षीय सोहेल प्रेम नगर का निवासी है और आईटीआई प्रशिक्षित है।

पूछताछ में तीनों ने स्वीकार किया कि वे प्रतिबंधित मांझा ले जा रहे थे और उसे बेचने की योजना बना रहे थे।

कानूनी कार्रवाई

इस मामले में पुष्प विहार स्थित क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(बी) और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5/15 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। जाँच में सामने आया कि यह सामग्री दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग की उन अधिसूचनाओं का सीधा उल्लंघन है, जिनके तहत चीनी/प्लास्टिक मांझे के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है।

आगे की जाँच

पुलिस अब इस प्रतिबंधित सामग्री के आपूर्ति स्रोत और उससे जुड़े व्यापक नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब स्वतंत्रता दिवस और पतंगबाज़ी के त्योहारी सीज़न के मद्देनज़र दिल्ली पुलिस प्रतिबंधित मांझे के खिलाफ अभियान तेज़ कर रही है। गौरतलब है कि चीनी मांझे से हर साल दर्जनों लोग और पक्षी घायल होते हैं, जिसके चलते न्यायालयों और सरकार ने इस पर सख्त पाबंदी लगाई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी हर पतंगबाज़ी सीज़न से पहले इस तरह की खेपें पकड़ी जाती हैं — जो यह सवाल उठाती हैं कि आपूर्ति श्रृंखला आखिर टूटती क्यों नहीं। तीन मज़दूर वर्ग के युवाओं की गिरफ्तारी खुदरा स्तर पर कार्रवाई है, असली परीक्षा थोक आपूर्तिकर्ताओं और निर्माताओं तक पहुँचने की है। जब तक सप्लाई नेटवर्क के ऊपरी सिरे पर शिकंजा नहीं कसा जाता, ऐसी छापेमारियाँ लक्षण का उपचार करती हैं, बीमारी का नहीं।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में चीनी मांझे के साथ किन्हें गिरफ्तार किया गया?
दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 12 अगस्त को राजेश (33 वर्ष, नांगलोई), असद (23 वर्ष, किराड़ी सुलेमान नगर) और सोहेल (19 वर्ष, प्रेम नगर) को गिरफ्तार किया। तीनों पर प्रतिबंधित चीनी/प्लास्टिक मांझे के परिवहन और बिक्री का आरोप है।
कितना मांझा और क्या-क्या जब्त किया गया?
पुलिस ने कुल 1,398 रीलें प्रतिबंधित चीनी/प्लास्टिक मांझा और सामग्री ढोने में इस्तेमाल की गई एक रेनो ट्राइबर कार जब्त की। मांझा कई प्लास्टिक बैगों और गत्ते के डिब्बों में भरा हुआ था।
आरोपियों पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(बी) और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5/15 के तहत पुष्प विहार स्थित क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज किया गया है।
दिल्ली में चीनी मांझे पर प्रतिबंध क्यों है?
दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने अधिसूचना जारी कर चीनी/प्लास्टिक मांझे के निर्माण, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। यह मांझा धारदार होने के कारण इंसानों और पक्षियों को गंभीर चोट पहुँचाता है।
पुलिस आगे क्या जाँच कर रही है?
क्राइम ब्रांच अब इस प्रतिबंधित सामग्री के आपूर्ति स्रोत और उससे जुड़े व्यापक नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। पुलिस उन अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जो इस अवैध कारोबार में शामिल हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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