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किशाऊ परियोजना समझौते से दिल्ली को मिलेगा 109.9 एमसीएम अतिरिक्त पानी, यमुना प्रवाह भी सुधरेगा: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

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किशाऊ परियोजना समझौते से दिल्ली को मिलेगा 109.9 एमसीएम अतिरिक्त पानी, यमुना प्रवाह भी सुधरेगा: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

सारांश

वर्षों से अटकी किशाऊ परियोजना पर आखिरकार छह राज्यों की मुहर लगी — और दिल्ली के लिए इसके मायने हैं 109.9 एमसीएम अतिरिक्त पानी और एक बेहतर यमुना। लेकिन असली सवाल यह है कि 1,324 एमसीएम क्षमता की यह परियोजना ज़मीन पर कब उतरेगी।

मुख्य बातें

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर छह राज्यों के बीच औपचारिक समझौता हुआ; दिल्ली को 109.9 एमसीएम अतिरिक्त पानी मिलने का रास्ता साफ।
परियोजना टौंस नदी पर बनेगी; कुल उपयोगी जल भंडारण क्षमता लगभग 1,324 एमसीएम प्रस्तावित।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में 15 सितंबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में धन्यवाद प्रस्ताव पारित।
जून 2026 में गृह मंत्री अमित शाह की बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच सहमति बनी थी।
परियोजना से यमुना नदी के पर्यावरणीय जलप्रवाह में सुधार के साथ-साथ पेयजल, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन को भी लाभ होगा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 15 सितंबर 2026 को घोषणा की कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर हुए बहु-राज्यीय समझौते से राजधानी को 109.9 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) अतिरिक्त पानी मिलेगा और यमुना नदी के पर्यावरणीय जलप्रवाह में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस समझौते को वर्षों से लंबित जल-संकट का ऐतिहासिक समाधान बताया गया।

कैबिनेट का धन्यवाद प्रस्ताव

दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के प्रति औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। मुख्यमंत्री गुप्ता ने दिल्ली की ढाई करोड़ जनता की ओर से इस समझौते को संभव बनाने वाले केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने इस परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग के लिए हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की सरकारों को भी धन्यवाद दिया। गौरतलब है कि जून 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में छह राज्यों के बीच इस परियोजना पर सैद्धांतिक सहमति बनी थी, जिसे अब औपचारिक समझौते का रूप दिया गया है।

परियोजना की विशेषताएँ और क्षमता

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टौंस नदी पर निर्मित होने वाली ऊपरी यमुना बेसिन की प्रमुख जल भंडारण परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना में लगभग 1,324 एमसीएम उपयोगी जल भंडारण की क्षमता प्रस्तावित है। मानसून के दौरान अतिरिक्त जल संग्रहीत कर उसे कम वर्षा वाले महीनों में नियंत्रित तरीके से उपलब्ध कराया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री गुप्ता के अनुसार यह परियोजना पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन — तीनों मोर्चों पर लाभकारी होगी। इसके साथ ही भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के दिल्ली सरकार के प्रयासों को भी बल मिलेगा।

यमुना पुनर्जीवन पर असर

मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि किशाऊ परियोजना का महत्व केवल पेयजल आपूर्ति तक सीमित नहीं है। यमुना नदी में पर्यावरण के लिए आवश्यक न्यूनतम जलप्रवाह सुनिश्चित करना भी इस परियोजना का अभिन्न उद्देश्य है। यह ऐसे समय में आया है जब यमुना की सफाई और पुनर्जीवन को लेकर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर प्रयास जारी हैं। पर्याप्त जलप्रवाह के बिना यमुना का पर्यावरणीय स्वास्थ्य बनाए रखना संभव नहीं, और यह परियोजना उस दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

दिल्ली की जल सुरक्षा का दीर्घकालिक ढाँचा

मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि पानी की कमी राजधानी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है। किशाऊ परियोजना से मिलने वाले 109.9 एमसीएम अतिरिक्त कच्चे पानी से दिल्ली की दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत आधार मिलेगा। उन्होंने इसे संवाद और सहमति के माध्यम से वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान करने वाले सहयोगात्मक दृष्टिकोण का उदाहरण बताया।

अब देखना यह होगा कि परियोजना के क्रियान्वयन की समयसीमा और वित्तपोषण की रूपरेखा कब तक सार्वजनिक की जाती है, क्योंकि इस पर ही दिल्ली को वास्तविक जल लाभ मिलने की तारीख निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समझौते और निर्माण के बीच की खाई को भरने का इतिहास भारत में उत्साहजनक नहीं रहा। 1,324 एमसीएम क्षमता और 109.9 एमसीएम दिल्ली हिस्से के आँकड़े तब तक कागज़ी रहेंगे, जब तक परियोजना की समयसीमा, लागत-साझेदारी और पर्यावरणीय मंजूरियों का विस्तृत खाका सार्वजनिक नहीं होता। यमुना-पुनर्जीवन की आड़ में राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ से बचते हुए सरकार को क्रियान्वयन का ठोस रोडमैप पेश करना होगा।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना क्या है?
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित एक जल भंडारण परियोजना है, जिसकी लगभग 1,324 एमसीएम उपयोगी जल भंडारण क्षमता होगी। यह ऊपरी यमुना बेसिन की प्रमुख परियोजनाओं में से एक है और इसका उद्देश्य पेयजल, सिंचाई, जलविद्युत और यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह को बेहतर करना है।
दिल्ली को किशाऊ परियोजना से कितना पानी मिलेगा?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, इस समझौते के तहत दिल्ली को 109.9 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) अतिरिक्त कच्चा पानी उपलब्ध हो सकेगा। यह पानी विशेष रूप से कम वर्षा वाले महीनों में राजधानी की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगा।
इस समझौते में कौन-कौन से राज्य शामिल हैं?
इस समझौते में दिल्ली के साथ हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान — कुल छह राज्य शामिल हैं। जून 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन राज्यों के बीच सैद्धांतिक सहमति बनी थी।
किशाऊ परियोजना से यमुना नदी को क्या फायदा होगा?
इस परियोजना से यमुना नदी में पर्यावरण के लिए आवश्यक न्यूनतम जलप्रवाह सुनिश्चित हो सकेगा, जो नदी के पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। पर्याप्त प्रवाह यमुना के पुनर्जीवन और प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों को भी मजबूती देगा।
दिल्ली कैबिनेट ने इस परियोजना पर क्या निर्णय लिया?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में 15 सितंबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में समझौते पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के प्रति औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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