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किशाऊ बांध परियोजना पर 6 राज्यों की सहमति, दिल्ली-राजस्थान को मिलेगा अतिरिक्त पानी

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किशाऊ बांध परियोजना पर 6 राज्यों की सहमति, दिल्ली-राजस्थान को मिलेगा अतिरिक्त पानी

सारांश

वर्षों से अटकी किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना को आखिरकार 6 राज्यों की हरी झंडी मिल गई। अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में जल घटक का 90% खर्च केंद्र उठाएगा और हिमाचल के जल-हिस्से से दिल्ली व राजस्थान को अतिरिक्त पानी मिलेगा — यमुना सफाई की दिशा में बड़ा कदम।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई बैठक में किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना पर 6 राज्यों की सहमति बनी।
जल घटक की लागत का 90% केंद्र सरकार और शेष 10% छह राज्य मिलकर वहन करेंगे।
हिमाचल प्रदेश के जल-हिस्से को दिल्ली और राजस्थान को देने पर सहमति बनी।
समझौता ज्ञापन के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
परियोजना से यमुना में शुद्ध जल-प्रवाह बढ़ेगा और यमुना पुनर्जीवीकरण को गति मिलेगी।

गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में 17 जून 2025 को नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में वर्षों से लंबित किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना पर 6 राज्यों के बीच ऐतिहासिक सहमति बन गई। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने को तैयार हो गए हैं। यह निर्णय यमुना नदी के पुनर्जीवीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में तय किया गया कि किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के जल घटक की कुल लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत का वित्तीय भार 6 राज्यों के बीच साझा किया जाएगा। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद इस परियोजना को अनुमोदन हेतु केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

एक अहम निर्णय यह भी लिया गया कि हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत-साझेदारी के बदले हिमाचल को आवंटित जल-हिस्से को दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा। इससे इन दोनों राज्यों को अतिरिक्त जल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उपस्थित रहे। इसके अलावा केंद्रीय गृह सचिव, जल शक्ति सचिव, विद्युत मंत्रालय के सचिव, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्य सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), गृह मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए।

यमुना पुनर्जीवीकरण पर असर

अधिकारियों के अनुसार, किशाऊ परियोजना से यमुना में शुद्ध जल का प्रवाह बढ़ेगा, जो स्वच्छ और निर्मल यमुना के लक्ष्य को साकार करने में सहायक होगा। गौरतलब है कि यमुना के प्रदूषण और घटते जल-स्तर को लेकर वर्षों से विभिन्न राज्यों के बीच विवाद चला आ रहा था, और यह परियोजना लंबे अरसे से अटकी पड़ी थी।

उत्तराखंड सीएम की प्रतिक्रिया

बैठक से पूर्व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गृह मंत्री अमित शाह से कर्तव्य भवन में मुलाकात की। धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्होंने शाह से प्रदेश के विकास एवं जनकल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।

आगे क्या होगा

समझौता ज्ञापन के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित होती है, तो उत्तर भारत के जल-संकट से जूझ रहे राज्यों को दीर्घकालिक राहत मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — यह परियोजना दशकों से अंतर-राज्यीय जल-विवाद की भेंट चढ़ती रही है। 90% केंद्रीय वित्तपोषण का प्रावधान राज्यों को सहमत करने की चतुर रणनीति है, पर बजटीय प्रतिबद्धता और समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। यमुना सफाई के लिए पहले भी कई योजनाएँ घोषित हो चुकी हैं जो ज़मीन पर उतरने में वर्षों लगा देती हैं। जब तक मंत्रिमंडल की मंजूरी और ठोस निर्माण-कार्यक्रम सामने नहीं आता, यह सहमति एक सकारात्मक शुरुआत तो है — पर मंज़िल अभी दूर है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना क्या है?
किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना यमुना नदी के पुनर्जीवीकरण से जुड़ी एक दीर्घकालिक जल-परियोजना है, जो वर्षों से अंतर-राज्यीय असहमति के कारण लंबित थी। इसका उद्देश्य यमुना में शुद्ध जल-प्रवाह बढ़ाना और उत्तर भारत के राज्यों को अतिरिक्त जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
किशाऊ परियोजना में कौन-से 6 राज्य शामिल हैं?
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान — ये 6 राज्य किशाऊ परियोजना के समझौता ज्ञापन के लिए सहमत हुए हैं। इन सभी राज्यों के प्रतिनिधि 17 जून 2025 को नई दिल्ली में हुई बैठक में शामिल थे।
दिल्ली और राजस्थान को किशाऊ परियोजना से कैसे फायदा होगा?
बैठक में तय हुआ कि हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत-साझेदारी के बदले हिमाचल को आवंटित जल-हिस्सा दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा। इससे दोनों राज्यों को अतिरिक्त जल आपूर्ति मिलेगी, जो इन राज्यों की पेयजल और सिंचाई ज़रूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।
किशाऊ परियोजना का खर्च कौन उठाएगा?
जल घटक की कुल लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत का भार 6 राज्यों के बीच साझा किया जाएगा। विद्युत घटक की लागत-साझेदारी की व्यवस्था अलग से तय की गई है।
किशाऊ परियोजना को मंजूरी कब मिलेगी?
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद ही परियोजना का औपचारिक क्रियान्वयन शुरू हो सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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