किशाऊ बांध परियोजना: हिमाचल को मिलेगी सालाना 100 करोड़ यूनिट बिजली, 8 साल पुराना वित्तीय विवाद सुलझा
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 16 जून 2025 को घोषणा की कि किशाऊ बहु उद्देशीय बांध परियोजना से जुड़ा आठ वर्ष पुराना वित्तीय विवाद अब सुलझ गया है, जिससे ₹15,000 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में यह सफलता मिली। परियोजना के पूर्ण होने पर हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होगी, जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत लगभग ₹600 करोड़ सालाना आँकी गई है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ
422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना टौंस नदी पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित है। यह एक बहु उद्देशीय परियोजना है, जिसमें विद्युत उत्पादन के साथ-साथ जल आपूर्ति का घटक भी शामिल है। वर्षों से परियोजना के वित्तीय ढाँचे और लागत वहन को लेकर संबंधित राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी, जिसके कारण निर्माण कार्य अवरुद्ध था।
वित्तीय विवाद और समाधान
बैठक में भारत सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति जताई कि परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले राज्य — दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा — हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक पर आने वाली अनुमानित ₹2,000 करोड़ की लागत वहन करेंगे। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने परियोजना में हिमाचल के हिस्से के रूप में ₹800 करोड़ देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित संसाधनों को देखते हुए इस शर्त को अस्वीकार कर दिया।
हिमाचल की दलील और केंद्र की स्वीकृति
मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि जब परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करा रही है, तो विद्युत घटक के लिए भी समान सहायता मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि परियोजना से सर्वाधिक विस्थापन और भौगोलिक प्रभाव हिमाचल प्रदेश पर पड़ेगा, इसलिए राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना अनुचित होता। राज्य सरकार की इस दलील को केंद्र ने स्वीकार किया, जिसे सुक्खू ने बिजली परियोजनाओं में हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई में बड़ी जीत बताया।
राज्य की अर्थव्यवस्था पर असर
परियोजना के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश को विद्युत घटक के रूप में प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। इसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹600 करोड़ सालाना होगी, जिससे राज्य की राजस्व आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब हिमाचल प्रदेश वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है और जलविद्युत क्षेत्र राज्य की आय का एक प्रमुख स्रोत है।
आगे क्या होगा
सैद्धांतिक सहमति बन जाने के बाद अब परियोजना के औपचारिक अनुमोदन और निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। हिमाचल प्रदेश सरकार के अनुसार, यह निर्णय राज्य के जलविद्युत अधिकारों और लंबित वित्तीय दावों की दिशा में एक निर्णायक कदम है।