3 नवंबर 2026
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दिल्ली को मेडिकल हब बनाने पर CM रेखा गुप्ता का आह्वान, WHO मानक से आधे बेड की कमी स्वीकारी

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दिल्ली को मेडिकल हब बनाने पर CM रेखा गुप्ता का आह्वान, WHO मानक से आधे बेड की कमी स्वीकारी

सारांश

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने माना कि राजधानी में WHO के मानक से आधे बेड हैं — प्रति 1,000 पर सिर्फ 2, जबकि लक्ष्य 5 का है। संत परमानंद अस्पताल में आईवीएफ केंद्र का उद्घाटन करते हुए उन्होंने सरकारी-निजी सहयोग को दिल्ली को असली मेडिकल हब बनाने की शर्त बताया।

मुख्य बातें

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 3 नवंबर 2026 को संत परमानंद अस्पताल में आईवीएफ केंद्र का उद्घाटन किया।
दिल्ली में अभी प्रति 1,000 लोगों पर लगभग 2 मेडिकल बेड हैं, जबकि WHO मानक 5 बेड का है।
मुख्यमंत्री ने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों से मिलकर इस अंतर को पाटने का आह्वान किया।
संत परमानंद अस्पताल की स्थापना 1977 में हुई थी और कोविड-19 महामारी के दौरान भी इसने सेवाएँ निरंतर जारी रखीं।
अस्पताल आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी इलाज से वंचित नहीं करता — मुख्यमंत्री ने इसकी विशेष प्रशंसा की।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि नई दिल्ली को देश का प्रमुख मेडिकल हब बनाने के लिए सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों को एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने माना कि फिलहाल दिल्ली में प्रति 1,000 लोगों पर केवल लगभग 2 मेडिकल बेड उपलब्ध हैं, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मानक 5 बेड प्रति हजार का है।

उद्घाटन के बाद बोलीं मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री गुप्ता ने संत परमानंद अस्पताल में एक नए आईवीएफ केंद्र के उद्घाटन के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा, 'अगर हम सच में दिल्ली को एक मेडिकल हब बनाना चाहते हैं, तो सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों को आगे आना होगा।' उनके अनुसार, दिल्ली आने वाले हर व्यक्ति को उचित इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलनी चाहिए।

WHO मानक और दिल्ली की स्थिति

WHO के दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रति 1,000 लोगों पर कम से कम 5 मेडिकल बेड होने चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि दिल्ली इस लक्ष्य से काफी पीछे है और अभी केवल लगभग 2 बेड प्रति हजार की दर पर है। उन्होंने कहा कि इस अंतर को पाटने के लिए दोनों क्षेत्रों की साझेदारी अनिवार्य है।

संत परमानंद अस्पताल की सराहना

मुख्यमंत्री ने बताया कि संत परमानंद अस्पताल की स्थापना 1977 में हुई थी और इसकी यात्रा 1937 में शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में अस्पताल ने लाखों लोगों की सेवा की है और अनगिनत जीवन बचाए हैं। गुप्ता ने अस्पताल की इस प्रतिबद्धता की विशेष सराहना की कि कोई भी मरीज आर्थिक कारणों से इलाज से वंचित नहीं रहता।

कोविड-19 के दौरान अस्पताल का योगदान

मुख्यमंत्री ने कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में अस्पताल की भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि उस संकट में भी संत परमानंद अस्पताल के किसी भी डॉक्टर, कर्मचारी या प्रबंधन के सदस्य ने जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटा और दिल्लीवासियों की सेवा जारी रखी।

आगे की राह

मुख्यमंत्री गुप्ता ने दोहराया कि यह प्रधानमंत्री का भी सपना है कि देश में हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ मिलें, और दिल्ली सरकार इसी लक्ष्य की दिशा में निरंतर काम कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राजधानी में स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार की माँग लगातार बढ़ रही है और सरकार-निजी क्षेत्र की भागीदारी को नई गति देने की जरूरत महसूस की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह आह्वान किस नीतिगत ढाँचे पर टिका है। सरकारी-निजी साझेदारी की बात वर्षों से होती आई है, फिर भी बेड-घनत्व का अंतर आज भी इतना बड़ा है। आईवीएफ केंद्र का उद्घाटन एक सकारात्मक कदम है, पर सार्वजनिक अस्पतालों में बुनियादी क्षमता विस्तार की रफ्तार और उसके लिए बजट आवंटन पर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई। जब तक सरकार निजी क्षेत्र को जिम्मेदारी के साथ प्रोत्साहन-आधारित साझेदारी में नहीं बाँधती, 'मेडिकल हब' का सपना महँगे इलाज का पर्याय बनकर रह सकता है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में मेडिकल हब बनाने की योजना क्या है?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 3 नवंबर 2026 को कहा कि दिल्ली को मेडिकल हब बनाने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्रों को मिलकर काम करना होगा। इसके तहत स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचे का विस्तार और सभी नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करना प्रमुख लक्ष्य है।
WHO के मुताबिक अस्पताल बेड का मानक क्या है और दिल्ली कहाँ खड़ी है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार प्रति 1,000 लोगों पर कम से कम 5 मेडिकल बेड होने चाहिए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वीकार किया कि दिल्ली में अभी यह संख्या लगभग 2 बेड प्रति हजार है, जो मानक से काफी कम है।
संत परमानंद अस्पताल में क्या उद्घाटन हुआ?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 3 नवंबर 2026 को संत परमानंद अस्पताल में एक नए आईवीएफ केंद्र का उद्घाटन किया। यह अस्पताल 1937 से सेवारत है और 1977 में इसकी स्थापना को एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखा जाता है।
कोविड-19 के दौरान संत परमानंद अस्पताल ने क्या भूमिका निभाई?
मुख्यमंत्री के अनुसार, कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में भी संत परमानंद अस्पताल के किसी भी डॉक्टर, कर्मचारी या प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटा और दिल्लीवासियों की सेवा जारी रखी।
दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए सरकार की क्या प्राथमिकता है?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि राजधानी आने वाले हर व्यक्ति को उचित इलाज मिले। उन्होंने सरकारी-निजी सहयोग को इस लक्ष्य की अनिवार्य शर्त बताया और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ निरंतर साझेदारी पर जोर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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