दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण: मनजिंदर सिंह सिरसा ने हितधारकों संग इनोवेशन चैलेंज पर की बैठक
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने 17 अक्टूबर 2026 को बताया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक 'इनोवेशन चैलेंज' के तहत हितधारकों के साथ बैठक आयोजित की गई, जिसमें उत्सर्जन में कटौती और हवा की गुणवत्ता की निगरानी बेहतर बनाने पर केंद्रित नई तकनीकों पर विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब सर्दियों की दस्तक के साथ राजधानी में वायु गुणवत्ता तेज़ी से बिगड़ रही है।
बैठक में क्या हुआ
मंत्री सिरसा ने बताया कि बैठक में कई उपयोगी सुझाव सामने आए। उन्होंने कहा, 'आज एनसीआर में प्रदूषण से जुड़े एक इनोवेशन चैलेंज को लेकर हितधारकों के साथ बैठक हुई। हमने ऐसे नए नवाचारों और उपायों पर चर्चा की, जो दिल्ली के प्रदूषण से निपटने में मददगार हो सकते हैं। कई अच्छे सुझाव सामने आए हैं।'
चर्चा में दो प्रमुख तकनीकी विचार उभरे — श्मशान घाटों से होने वाले उत्सर्जन को 95 प्रतिशत से अधिक घटाने अथवा शून्य तक लाने की तकनीक, और किफायती 'हाइपर-लोकल' एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंसर का व्यापक उपयोग।
हाइपर-लोकल सेंसर तकनीक का महत्व
सिरसा ने स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान के लिए सस्ती सेंसर तकनीकों की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ-साथ ये किफायती सेंसर प्रदूषण के हाइपर-लोकल स्रोतों की पहचान करने में सहायक हो सकते हैं — यानी यह पता लगाना कि प्रदूषण ठीक कहाँ से उत्पन्न हो रहा है।
गौरतलब है कि दिल्ली में अभी तक मॉनिटरिंग स्टेशन सीमित संख्या में हैं, जिससे हाइपर-लोकल डेटा जुटाना कठिन रहा है। सस्ती सेंसर तकनीक इस अंतर को पाट सकती है।
मौजूदा वायु गुणवत्ता की स्थिति
आँकड़ों के अनुसार, 4 अक्टूबर को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 187 दर्ज किया गया, जो 2020 के बाद से इसी अवधि के लिए चार दिनों का सबसे अधिक औसत है। इससे एक और कठिन सर्दी के मौसम की आशंकाएँ बढ़ गई हैं।
सर्दियों में तापमान गिरने के साथ वाहनों का धुआँ, धूल, पराली दहन और अन्य कारक मिलकर प्रदूषण स्तर को खतरनाक स्तर तक पहुँचा देते हैं। बिगड़ती वायु गुणवत्ता ने सांस संबंधी बीमारियों और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
सरकार की व्यापक कार्य योजना
यह बैठक उस व्यापक समन्वय का हिस्सा है जो केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच जारी है। 29 सितंबर को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ उच्च-स्तरीय बैठक कर राजधानी की 'वायु प्रदूषण कम करने संबंधी कार्य योजना' की समीक्षा की थी।
इस कार्य योजना में कई ठोस कदम शामिल हैं। 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' पहल के तहत ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम से लैस ईंधन स्टेशनों पर वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) के बिना वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा। इसके अलावा, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल उड़ाने वाली तोड़फोड़ गतिविधियों और बाहरी निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होगा।
आगे क्या होगा
बैठक में सामने आए तकनीकी सुझावों को इनोवेशन चैलेंज के अगले चरण में परखा जाएगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि श्मशान घाट उत्सर्जन नियंत्रण और हाइपर-लोकल सेंसर जैसे विचार किस गति से ज़मीन पर उतरते हैं, क्योंकि दिल्ली में प्रदूषण का सबसे कठिन दौर — नवंबर से जनवरी — अब महज़ कुछ सप्ताह दूर है।