दिल्ली पुलिस ने जयपुर से डिजिटल अरेस्ट गिरोह का भंडाफोड़ किया, तीन ठग गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली पुलिस ने जयपुर से डिजिटल अरेस्ट गिरोह का भंडाफोड़ किया।
- गिरफ्तार आरोपियों के पास से 1 लाख रुपए और 9 मोबाइल फोन बरामद हुए।
- साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती का सामना करने के लिए जागरूकता जरूरी है।
- जालसाजों ने स्थानीय लोगों को धोखे में डालकर बैंक खाते खुलवाए।
- इन खातों का इस्तेमाल विभिन्न साइबर अपराधों के लिए किया जा रहा था।
नई दिल्ली, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। दक्षिण पश्चिम जिले के साइबर पुलिस थाने ने जयपुर से चल रहे एक डिजिटल अरेस्ट रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तीन प्रमुख साइबर अपराधियों राकेश मीणा (25), छोटू लाल मीणा (20) और योगेंद्र गुर्जर (19) को गिरफ्तार किया। इनके पास से 1 लाख रुपए, 9 मोबाइल फोन और 10 पासबुक तथा चेकबुक बरामद की गई हैं।
डीएसपी अमित गोयल के अनुसार, 7 दिसंबर 2025 को एक 75 वर्षीय महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि उन्हें एक कथित सीबीआई इंस्पेक्टर का व्हाट्सएप कॉल आया, जिसने उनके बेटे को आपराधिक मामले में फंसे होने की बात कही। इसके बाद, उन्हें अपने बेटे को बचाने के लिए दो दिनों में जालसाजों ने 16 लाख रुपए उनके खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
डीएसपी गोयल ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी निगरानी, डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण, सिम ट्रैकिंग, सोशल मीडिया विश्लेषण और धन के लेनदेन की जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि यह गिरोह धोखाधड़ी से ट्रांसफर की गई राशि कोटपुतली के बैंक खाते में जमा कराता था। इस मामले में कोटपुतली से सक्रिय एक एजेंट योगेंद्र गुर्जर की पहचान हुई।
कोटपुतली में छापेमारी के बाद योगेंद्र गुर्जर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि वह अशिक्षित स्थानीय लोगों को धोखे में डालकर बैंक खाते खुलवाता था। इन खातों का विवरण उसका साथी छोटू लाल मीणा राकेश मीणा को सौंप देता था। खातों की जानकारी इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा की जाती थी। जालसाज धोखाधड़ी से पैसे मंगाने से पहले खातों की लिमिट की जांच करते थे।
डीएसपी गोयल ने कहा कि इसके बाद जयपुर के सांगानेर में छापे के दौरान राकेश मीणा और छोटू लाल मीणा को गिरफ्तार किया गया। छापेमारी के दौरान 1 लाख रुपए नकद, 9 मोबाइल फोन और 10 फर्जी खातों की पासबुक/चेकबुक बरामद की गईं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि इन खातों का उपयोग डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों, निवेश धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों में किया जा रहा था।
मुख्य आरोपी राकेश मीणा ने अपने साथी छोटू लाल और योगेंद्र गुर्जर के माध्यम से बैंक खातों की जानकारी प्राप्त की। इन खातों को टेलीग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय जालसाजों के साथ साझा किया जाता था। धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को इन खातों में मंगाया जाता था, जिसे बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से निकाला जाता था और अंतरराष्ट्रीय संचालकों के निर्देशानुसार अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाता था, जिससे धन के लेनदेन का पता न चल सके।