लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक २०२६ की पेशी, महिलाओं के आरक्षण पर हुई मतदान
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नई दिल्ली, १६ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में गुरुवार को संविधान (१३१वां संशोधन) विधेयक, २०२६ को पेश करने की स्वीकृति प्राप्त हुई। महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन के कार्यान्वयन के उद्देश्य से लाए गए इस महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में मत विभाजन के बाद मंजूरी दी गई।
विपक्ष की मांग पर वोटिंग की औपचारिकता अपनाई गई, जिसमें २५१ सांसदों ने विधेयक के समर्थन में मतदान किया, जबकि १८५ सांसदों ने इसका विरोध किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि ये आंकड़े परिवर्तन के अधीन हो सकते हैं।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विधेयक को सदन में पेश किया, जिसे विधायी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पहले भी सांसदों ने इस बिल को चर्चा के लिए पेश करने के पक्ष में मतदान किया था।
इस दौरान संविधान (१३१वां संशोधन) विधेयक, २०२६ के साथ-साथ परिसीमन विधेयक, २०२६ और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, २०२६ भी लोकसभा में प्रस्तुत किए गए।
आमतौर पर लोकसभा में प्रस्तावों को ध्वनि मत से पारित किया जाता है, लेकिन जब किसी निर्णय पर विवाद होता है, तो 'डिवीजन' यानी मत विभाजन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया में ऑटोमेटिक वोट रिकॉर्डर सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जिसमें सांसद 'हां', 'ना' या 'अनुपस्थित' के रूप में अपना वोट दर्ज करते हैं।
मत विभाजन के बाद वोट स्लिप्स का भी उपयोग किया गया। इस दौरान कुल ३३३ सांसदों ने मतदान किया और इस चरण में किसी ने भी मतदान से परहेज नहीं किया।
लोकसभा के महासचिव उत्पल सिंह ने सदन को वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि अगर कोई सदस्य अपना वोट बदलना चाहता है, तो वह स्लिप के माध्यम से ऐसा कर सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वोट तभी मान्य होगा, जब सदस्य पहली घंटी के बाद और दूसरी घंटी से पहले सही समय पर बटन दबाएंगे। सांसद अपने वोट को व्यक्तिगत परिणाम बोर्ड पर भी देख सकते हैं।
विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक को पेश किए जाने के दौरान मत विभाजन की मांग की थी।