केंद्र सरकार का खुलासा: लोकसभा में सीट बढ़ोतरी, परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण पर महत्वपूर्ण जानकारी
सारांश
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नई दिल्ली, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। इस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह 40 साल से लटके हुए नारी अधिकार को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने का एक महत्वपूर्ण संशोधन था। यह संशोधन 21वीं सदी की महिलाओं को नए अवसर प्रदान करने और उनकी सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम था।
आइए जानते हैं, इस विषय पर केंद्र सरकार का दृष्टिकोण क्या है।
वास्तव में, 16 अप्रैल को केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक (संविधान का 131वां संशोधन), परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत किया था।
केंद्र सरकार ने बताया कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम में यह प्रावधान किया गया है कि 2026 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। यदि सरकार 2026 जनगणना के बाद परिसीमन का इंतजार करती, तो महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ 2029 के आम चुनाव में भी नहीं मिल पाता। इसलिए, देश की आधी आबादी को शीघ्र लाभ पहुँचाने के लिए यह आवश्यक था कि परिसीमन को 2026 जनगणना के आधार से अलग रखा जाए।
अगर इन तीनों विधेयकों को पारित किया जाता, तो इससे देश को क्या लाभ होता? इस पर सरकार ने कहा कि यदि ये विधेयक पारित हो जाते, तो राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ये कानून बन जाते और महिलाओं को 2029 के लोकसभा चुनाव में 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल सकता था, जिससे उनका लंबे समय से प्रतीक्षित अधिकार प्राप्त होता।
सरकार ने बताया कि परिसीमन का तात्पर्य निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं में बदलाव से है। महिला आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परिसीमन आवश्यक है। लोकसभा में सीटों की संख्या 1976 में 550 निर्धारित की गई थी, जबकि आज भारत की जनसंख्या 140 करोड़ है। इसलिए, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना अनिवार्य है, जिससे संसद में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
क्या केंद्र सरकार परिसीमन आयोग अधिनियम में बदलाव करके राजनीतिक लाभ उठाना चाहती थी? इस सवाल पर कहा गया कि केंद्र सरकार ने परिसीमन आयोग अधिनियम में कोई परिवर्तन नहीं किया, बल्कि पुरानी व्यवस्था को यथावत रखा। वर्तमान में हो रहे चुनावों, जैसे कि तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल पर इस प्रक्रिया का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि 2029 तक सभी चुनाव मौजूदा व्यवस्था के आधार पर ही कराए जाएंगे।
क्या नए परिसीमन प्रस्ताव से दक्षिण भारतीय राज्यों या छोटे राज्यों को नुकसान होगा? इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी राज्यों की सीटों में समान 50 प्रतिशत वृद्धि होगी और इससे दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा।
क्या नए परिसीमन प्रस्ताव से अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रतिनिधित्व को नुकसान होगा? इस पर सरकार ने कहा कि संविधान में समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान है, जिससे अनुसूचित वर्गों के लिए सीटों का पुनर्निर्धारण और वृद्धि होती है।
क्या जाति जनगणना को टालने के लिए यह संशोधन लाया गया था? सरकार ने स्पष्ट किया कि वह पहले से ही जाति जनगणना की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।
महिला आरक्षण में मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग कोटा क्यों नहीं दिया गया? इस पर सरकार ने कहा कि भारत के संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।
सरकार ने महिला आरक्षण को 2029 तक टालने के बजाय 2024 के आम चुनावों में तुरंत लागू क्यों नहीं किया? इस पर सरकार का कहना है कि आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन आवश्यक है। इस प्रक्रिया में लगभग दो वर्ष लगते हैं।
महिला आरक्षण विधेयक 2023 में क्यों लाया गया? सरकार ने बताया कि यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया और इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया।
महिला आरक्षण को केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने के लिए अलग 'केंद्र शासित प्रदेश विधेयक' क्यों लाया गया था? इसकी आवश्यकता इसलिए थी क्योंकि जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाएं अलग 'यूटी एक्ट' से संचालित होती हैं।