मेरठ SSP पर थर्ड-डिग्री टॉर्चर का आरोप: दिग्विजय भाटी बोले — 'लात से आंख फोड़ी, 30% ही ठीक होगी'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय किसान यूनियन (बीआर अंबेडकर) के अध्यक्ष दिग्विजय भाटी ने मेरठ के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) अविनाश पांडे और सिविल लाइन इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर हिरासत में बर्बर मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है। भाटी का कहना है कि 19 अगस्त 2026 को SSP दफ्तर में बुलाकर उनके साथ और उनके साथी मोहित जाटव के साथ थर्ड-डिग्री टॉर्चर किया गया, जिसमें उनकी बाईं आंख पर लात मारी गई और डॉक्टरों के अनुसार वह आंख अब केवल 30 प्रतिशत तक ही ठीक हो पाएगी। मेरठ पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकारा है।
भाटी का बयान: क्या हुआ SSP दफ्तर में
भाटी ने अपने बयान में कहा, 'ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़े विरोध प्रदर्शन में मैं शामिल नहीं था — उस दिन मैं नोएडा-गाजियाबाद में था। इसके बावजूद हमें जेल भेजा गया।' उन्होंने बताया कि बाद में मोहित की SSP से बातचीत के बाद उन्हें मिलने के लिए बुलाया गया।
भाटी के अनुसार, 'जब हम कप्तान से मिलने पहुंचे तो हमें एक केबिन में ले जाया गया। अंदर 3-4 लोगों ने कोहनियों से मारा और बेरहमी से पीटा। जब मैं SSP के पैरों पर गिर रहा था, तो उन्होंने मुझे लात मारी जो सीधे मेरी आंख पर लगी।'
SOG कार्यालय में कथित यातना
भाटी का आरोप है कि पिटाई के बाद सिविल लाइन इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को बुलाया गया और उन्हें SOG कार्यालय ले जाया गया। वहाँ कथित तौर पर पैर बांधकर उल्टा लटकाकर पिटाई की गई और ढक्कन से पानी दिया गया। भाटी के मुताबिक, 'अखिलेश ने फोन पर SSP को हमारी चीखें सुनाईं।' यह आरोप अत्यंत गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र जाँच अभी लंबित है।
सोशल मीडिया पर भाटी का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे अपनी बाईं सूजी हुई आंख और शरीर के विभिन्न हिस्सों पर चोट के निशान दिखाते नजर आए। भाटी ने दावा किया कि वे SSP से मिलकर FIR से अपना नाम हटवाने की माँग करने गए थे, क्योंकि वे कथित घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे।
मामले की पृष्ठभूमि: ललिता गौतम हत्याकांड
यह पूरा विवाद ललिता गौतम हत्याकांड से जुड़ा है। 15 मई 2026 को मेरठ के रोहटा इलाके के एक खेत में कॉलेज छात्रा ललिता गौतम का शव मिला था। जाँच की कथित लापरवाही से नाराज दलित प्रदर्शनकारियों ने 8 जुलाई को मेरठ कलेक्ट्रेट का गेट लगभग तीन घंटे तक जाम कर दिया। वे जिला प्रशासन के साथ बैठक और मुख्य आरोपी अंकित की तत्काल गिरफ्तारी की माँग कर रहे थे।
विरोध प्रदर्शन तब हिंसक हो गया जब SSP पांडे के नेतृत्व में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसके बाद पुलिस ने 63 प्रदर्शनकारियों पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया — जिनमें भाटी और मोहित जाटव भी शामिल थे।
मेरठ पुलिस का पक्ष
मेरठ पुलिस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आधिकारिक बयान जारी कर भाटी के सभी आरोपों को खारिज किया। पुलिस के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को भाटी और मोहित जाटव अपने खिलाफ दर्ज मामलों पर चर्चा के लिए सिविल लाइंस थाने आए थे। पुलिस का दावा है कि घर लौटते समय उनका स्कूटर फिसल गया, जिससे उन्हें चोटें आईं।
पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों ने खुद इस स्कूटर दुर्घटना के संबंध में सिविल लाइंस थाने में लिखित आवेदन दिया था, जिसे शाम 5:31 बजे जनरल डायरी एंट्री नंबर 53 में दर्ज किया गया। पुलिस ने यह भी बताया कि दोनों पहले से ही अपने-अपने थाना क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर हैं।
SSP का तबादला, नए अधिकारी की तैनाती
इस विवाद के सामने आने के बाद SSP अविनाश पांडे को मेरठ से हटाकर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। उनकी जगह झाँसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति को मेरठ का नया SSP नियुक्त किया गया है। यह तबादला आरोपों की पुष्टि नहीं करता, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई का संकेत देता है।