मेरठ में किसान नेताओं की कथित पुलिस पिटाई: अखिलेश, चंद्रशेखर आजाद ने मांगी जांच, पुलिस ने आरोप नकारे
सारांश
मुख्य बातें
मेरठ में भारतीय किसान यूनियन बीआर आंबेडकर के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी और उनके साथी मोहित जाटव की पुलिस हिरासत में कथित पिटाई का मामला 21 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बन गया। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग की है। वहीं, मेरठ पुलिस ने मारपीट के सभी आरोपों को 'तथ्यहीन, असत्य एवं निराधार' बताया है।
घटनाक्रम: क्या हुआ 19 अगस्त को
भाटी के अनुसार, वे और मोहित जाटव 19 अगस्त 2026 को मेरठ एसएसपी कार्यालय में गैंगस्टर से जुड़े एक मुकदमे में निष्पक्ष कार्रवाई की माँग को लेकर पहुँचे थे। उनका दावा है कि तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय उस समय कार्यालय में नहीं थे, और बाद में उनके पहुँचने पर दोनों को अंदर बुलाया गया। भाटी का आरोप है कि एसएसपी कार्यालय में उनकी पिटाई की गई। इसके बाद सिविल लाइंस थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ उन्हें पुलिस लाइन स्थित एसओजी कार्यालय ले गए, जहाँ कथित तौर पर दोनों के साथ मारपीट की गई।
भाटी ने दावा किया कि आँखों से खून आने के बाद पुलिस ने नेत्र और मस्तिष्क के चिकित्सकों को थाने बुलाया। उनके वीडियो में सूजी हुई आँख और चोटें दिखाई दे रही हैं, जिन्हें विपक्षी दलों ने कथित पुलिसिया बर्बरता का प्रमाण बताया है।
पुलिस का पक्ष
मेरठ पुलिस ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि 19 अगस्त 2026 को दोनों थाना सिविल लाइंस में मुकदमा संख्या 173/2026 के सिलसिले में वार्ता के लिए आए थे। पुलिस का दावा है कि वापस जाते समय स्कूटी फिसलने से दोनों गिरकर घायल हो गए और इस संबंध में दोनों ने स्वयं थाने में लिखित प्रार्थना-पत्र दिया, जिसे सामान्य डायरी संख्या 53 में शाम 5:31 बजे दर्ज किया गया।
पुलिस ने यह भी बताया कि दिग्विजय सिंह भाटी के खिलाफ 2008 से 2026 तक मेरठ, अमरोहा और अन्य थानों में कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, और मोहित जाटव के खिलाफ 2015 से 2026 तक कई मामले हैं। पुलिस ने दोनों को उनके-उनके थानों का हिस्ट्रीशीटर बताया।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाटी का वीडियो एक्स पर साझा करते हुए लिखा, 'किसान का अपमान, देश का अपमान है।' उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने किसान नेताओं पर थाने में कथित तौर पर थर्ड डिग्री की मारपीट कर प्रताड़ित किया, जो 'हार के डर से बौखलाहट' को दर्शाता है। यादव ने एमएसपी, खाद की उपलब्धता, कृषि उपज की खरीद, भूमि अधिग्रहण और किसान आंदोलन से जुड़े व्यापक मुद्दे भी उठाए और मामले की गहरी जांच व दोषी अधिकारियों की बर्खास्तगी की माँग की।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यूपी में 'लोकतंत्र और मानवाधिकार पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।' पार्टी ने कहा कि भाटी को बंद कमरे में घंटों बेरहमी से पीटा गया, थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया और गानों पर जबरन नचाकर अपमानित किया गया — हालाँकि ये आरोप स्वयं भाटी के बयान पर आधारित हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक्स पर टैग करते हुए कहा कि यह 'पुलिसिंग नहीं, बल्कि वर्दी की ताकत का खुला दुरुपयोग और हिरासत में यातना है।' उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने, पीड़ितों का स्वतंत्र मेडिकल परीक्षण कराने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की माँग की। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से भी मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया।
आम जनता और किसान संगठनों पर असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर प्रदेश में किसान संगठन एमएसपी गारंटी और भूमि अधिग्रहण मुआवजे को लेकर पहले से आंदोलित हैं। गौरतलब है कि हिरासत में कथित उत्पीड़न के आरोप राज्य में पहले भी उठते रहे हैं, और इस मामले ने उन पुराने विवादों को फिर से हवा दे दी है। किसान नेताओं का कहना है कि यदि स्वतंत्र जांच नहीं हुई तो वे व्यापक आंदोलन का रुख अपना सकते हैं।
आगे क्या होगा
चंद्रशेखर आजाद की माँग के मद्देनजर NHRC द्वारा स्वत: संज्ञान लेने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सीसीटीवी फुटेज और स्वतंत्र मेडिकल रिपोर्ट इस मामले में निर्णायक साक्ष्य साबित हो सकती हैं। फिलहाल मेरठ पुलिस और भाटी के बयान परस्पर विरोधाभासी हैं, और सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।