क्या सांसद चंद्रशेखर आजाद मेरठ हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने के लिए निकले?
सारांश
Key Takeaways
- महिला की हत्या के बाद समाज में आक्रोश है।
- विपक्षी दलों ने सरकार की निंदा की है।
- पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर ली है।
- चंद्रशेखर आजाद ने पीड़ित परिवार से मिलने की पहल की।
- सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नई दिल्ली/गाजियाबाद, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मेरठ के सरधना क्षेत्र में एक महिला के हत्या और उसकी बेटी के अपहरण के मामले ने विपक्षी दलों को उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना करने का बड़ा मौका दिया है। जहां एक तरफ पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए विपक्षी नेताओं का जमावड़ा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और शांति व्यवस्था का हवाला देते हुए नेताओं की एंट्री पर पाबंदी लगा दी है।
इस बीच, पुलिस ने मेरठ हत्याकांड में दलित परिवार से मिलने जा रहे नगीना के सांसद और भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को रोकने के लिए यूपी गेट पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया। हालांकि, वे पुलिस सुरक्षा को चकमा देने में सफल रहे और कपसाड़ गांव की ओर बढ़ गए। इस घटना से दुखी दलित महिला के परिवार से मिलने के लिए उनका यह कदम महत्वपूर्ण है।
सामाजिक पार्टी के नेता योगेश वर्मा ने कहा, "यह घटना बहुत दुखद और चौंकाने वाली है। इसने जिले के दलित समुदाय को हिला दिया है। ऐसे क्रूर कार्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।" उन्होंने प्रशासन से भी मांग की कि आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाना चाहिए।
मेरठ पुलिस के अनुसार, कपसाड़ गांव में एक 20 साल की लड़की का अपहरण किया गया था। इस दौरान, 50 साल की महिला ने अपनी बेटी को बचाने का प्रयास किया, लेकिन अपराधियों ने उस पर धारदार हथियार से हमला किया और बाद में उसकी मृत्यु हो गई।
इस घटना से इलाके में गुस्सा फैल गया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान पारस सोम और सुनील कुमार के रूप में की है। वे दोनों उसी गांव के निवासी हैं। फिलहाल, पुलिस आरोपियों और अपहृत लड़की की तलाश में जुटी है।