दिलीप कुमार के भव्य प्रशंसक: शफी इनामदार की अदाकारी और क्रिकेट के प्रति प्रेम
सारांश
Key Takeaways
- शफी इनामदार ने सिनेमा में महत्वपूर्ण को-एक्टर की भूमिका निभाई।
- उनकी अदाकारी में गहराई और ईमानदारी थी।
- शफी का क्रिकेट के प्रति प्रेम अद्वितीय था।
- उन्होंने थिएटर से लेकर फिल्म और टीवी तक अपनी छाप छोड़ी।
- उनकी यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।
नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सिनेमा में लीड एक्टर की अहमियत अपनी जगह है, लेकिन को-एक्टर भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। वे कहानी को गहराई प्रदान करते हैं और दर्शकों के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाते हैं। शफी इनामदार एक ऐसे ही प्रतिभाशाली को-एक्टर थे, जिन्होंने हर भूमिका को ईमानदारी, संवेदनशीलता और कुशलता के साथ निभाया। चाहे थिएटर हो, फिल्म या टीवी, शफी ने हमेशा अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता। उनके निभाए किरदारों की सच्चाई और गहराई उन्हें दर्शकों का प्रिय बनाती थी।
शफी इनामदार की 13 मार्च को पुण्यतिथि है। उन्होंने दिलीप कुमार के प्रति अपार प्रेम जताया और उनके साथ ‘इज्जतदार’ फिल्म में काम करने पर गर्व महसूस किया। उनकी अदाकारी में गहराई और ईमानदारी थी, जिससे दर्शक अपनी समस्याएं भूल जाते थे। शफी का जन्म 23 अक्टूबर 1945 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था। उन्होंने मुंबई के केसी कॉलेज से अपनी पढ़ाई की और अपने बचपन से ही एक्टिंग में रुचि दिखाई।
शफी ने अपने करियर की शुरुआत गुजराती थिएटर के प्रसिद्ध अभिनेता प्रवीण जोशी के मार्गदर्शन में की। वे बलराज साहनी के संपर्क में आने के बाद और अधिक निखर गए। 70 के दशक में उन्होंने पृथ्वी थिएटर में कई महत्वपूर्ण नाटक किए। शशि कपूर ने उनकी अदाकारी से प्रभावित होकर उन्हें अपनी फिल्म ‘विजेता’ में लिया। 1982 में आई इस फिल्म के निर्देशक थे गोविंद निहलानी, जिन्होंने ‘अर्धसत्य’ में भी उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका दी।
शफी इनामदार का मानना था कि अभिनय उनकी जिंदगी है और उन्होंने इसे कभी भी माध्यम के आधार पर नहीं देखा। 1984 में उनका टीवी सीरियल ‘ये जो है जिंदगी’ बेहद सफल रहा। 80 के दशक में बीआर चोपड़ा की कई फिल्मों में भी उन्होंने काम किया।
1995 में शफी ने निर्देशक बनने का निर्णय लिया और उनकी पहली फिल्म ‘हम दोनों’ थी, जिसमें नाना पाटेकर और ऋषि कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे। शफी ने लव मैरिज की थी। उनकी पत्नी भक्ति बरुवे एक अदाकारा और दूरदर्शन की न्यूज रीडर थीं।
उनका निधन 1996 में दिल के दौरे से हुआ जबकि वे भारत बनाम श्रीलंका के विश्व कप सेमीफाइनल मैच का लाइव प्रसारण देख रहे थे। शफी को क्रिकेट देखना और खेलना बहुत पसंद था। उनकी पत्नी भक्ति का निधन भी पांच साल बाद एक कार दुर्घटना में हुआ।