डीआरडीओ ने नई दिल्ली में प्रदर्शित की स्वदेशी सेमीकंडक्टर व वायरलेस संचार तकनीक, 'विकॉम-26' में 103 शोध पत्र
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष तकनीकी सत्र में भारत को सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी की चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अपनी स्वदेशी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इस आयोजन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर 2026 को किया था, और यह 29 अक्टूबर तक चला। सत्र में रडार, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक संचार उपकरणों में उपयोगी अनेक स्वदेशी तकनीकों को सामने रखा गया।
सम्मेलन की व्यापक भागीदारी
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस आयोजन में 12 मंत्रालयों और विभागों की भागीदारी रही। उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थानों और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सत्रों में हिस्सा लिया। एआई-आधारित चिप डिज़ाइन, नई माइक्रोप्रोसेसर तकनीक और स्वदेशी चिप विकास जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं और भारत अपनी रक्षा तकनीक में आयात-निर्भरता कम करना चाहता है।
प्रमुख सेमीकंडक्टर तकनीकें
डीआरडीओ ने दो महत्त्वपूर्ण सेमीकंडक्टर तकनीकों का प्रदर्शन किया — मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट (एमएमआईसी) और इन्फ्रारेड फोकल प्लेन एरे (आईआरएफपीए)। इन्हें दिल्ली स्थित सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी ने विकसित किया है।
गैलियम आर्सेनाइड और गैलियम नाइट्राइड आधारित एमएमआईसी का उपयोग आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों में किया जाता है। वहीं, आईआरएफपीए तकनीक को 'मिसाइल की आंख' कहा जा सकता है — यह लक्ष्य से उत्सर्जित ऊष्मा को पहचानकर उसकी छवि तैयार करती है, जिससे मिसाइल को उड़ान के अंतिम चरण में लक्ष्य की पहचान और उसका अनुसरण करने में सहायता मिलती है। इसके शॉर्ट वेव, मिड वेव और लॉन्ग वेव संस्करण भी प्रदर्शित किए गए।
अन्य स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन
सेमीकंडक्टर के अलावा, डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट इंजन, न्यूरोमॉर्फिक एक्सेलरेटर, उन्नत संचार प्रणाली, क्वांटम रैंडम नंबर जनरेटर, फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट और लेजर निकटता सेंसर भी प्रदर्शित किए। सैनिकों के लिए विशेष ठंड-रोधी कपड़े, महिलाओं के लिए 'प्रबला' फुल बॉडी प्रोटेक्टर तथा निष्क्रिय एवं विद्युत-चालित एक्सोस्केलेटन भी प्रदर्शनी का हिस्सा रहे।
विकॉम-26: पहला अंतरराष्ट्रीय वायरलेस संचार सम्मेलन
डीआरडीओ ने सैन्य उपयोग के लिए वायरलेस संचार तकनीक पर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'विकॉम-26' आयोजित किया। 30 और 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में भारत और अमेरिका के विशेषज्ञों द्वारा कुल 103 शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। सैन्य संचार, रेडियो तकनीक, एंटीना और संकेत प्रसंस्करण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हो रही है। भारतीय कंपनियों ने भी संचार प्रणालियों, परीक्षण उपकरणों और सॉफ्टवेयर से जुड़ी स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन किया।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने 'विकॉम-26' का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में संचार प्रणाली केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि सैनिकों की स्थिति की जानकारी, सैन्य टुकड़ियों के बीच तालमेल और त्वरित निर्णय लेने के लिए भी यह अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सशस्त्र बल तकनीकी आधुनिकीकरण पर बड़ा जोर दे रहे हैं। डीआरडीओ के ये प्रदर्शन संकेत देते हैं कि रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में स्वदेशीकरण की गति आने वाले वर्षों में और तेज़ होगी।