16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पद्मश्री प्रो. जुजेर वासी: सेमीकंडक्टर उत्पादन भारत की आर्थिक प्रगति और रक्षा आत्मनिर्भरता की कुंजी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पद्मश्री प्रो. जुजेर वासी: सेमीकंडक्टर उत्पादन भारत की आर्थिक प्रगति और रक्षा आत्मनिर्भरता की कुंजी

सारांश

पद्मश्री से सम्मानित प्रो. जुजेर वासी का संदेश सीधा है — सेमीकंडक्टर भारत की आर्थिक और सामरिक ताकत की नींव हैं। रक्षा से अंतरिक्ष तक, इन चिप्स की स्वदेशी उपलब्धता न हो तो संकट के समय भारत कमज़ोर पड़ सकता है। निरंतर निवेश और स्वदेशी अनुसंधान ही एकमात्र रास्ता है।

मुख्य बातें

जुजेर वासी ने 29 मई 2026 को मुंबई में सेमीकंडक्टर उत्पादन को भारत की आर्थिक प्रगति के लिए अनिवार्य बताया।
सेमीकंडक्टर का दायरा उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा प्रणालियों और अंतरिक्ष तकनीक तक फैला है।
रक्षा और अंतरिक्ष उपयोग के कई विशेष सेमीकंडक्टर खुले बाज़ार में उपलब्ध नहीं होते, जिससे स्वदेशी अनुसंधान अनिवार्य हो जाता है।
वासी की टीम ने अंतरिक्ष उपयोग के लिए रेडिएशन प्रभाव पर सेमीकंडक्टर शोध किया था।
उन्होंने भारत से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रिसर्च, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग में निरंतर निवेश की अपील की।

पद्मश्री से सम्मानित著名 सेमीकंडक्टर विशेषज्ञ प्रोफेसर जुजेर वासी ने 29 मई 2026 को मुंबई में कहा कि सेमीकंडक्टर उत्पादन भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अपरिहार्य है। उनके अनुसार, यह तकनीक केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा प्रणालियों और अंतरिक्ष तकनीक की रीढ़ है।

सेमीकंडक्टर का व्यापक दायरा

प्रो. वासी ने स्पष्ट किया कि सेमीकंडक्टर चिप्स का प्रभाव क्षेत्र बहुत विस्तृत है। उन्होंने कहा, "सेमीकंडक्टर केवल चिप्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर्स की कई गतिविधियों को भी आगे बढ़ाते हैं।" उन्होंने इसे भारत के आत्मनिर्भर बनने की यात्रा में एक निर्णायक घटक बताया।

विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान मिलने पर प्रो. वासी ने कहा कि वे इस पुरस्कार को पाकर अत्यंत गौरवान्वित और आश्चर्यचकित हैं। उनका दशकों का शोध कार्य मुख्यतः सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में केंद्रित रहा है।

रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक पर निर्भरता

प्रो. वासी ने रेखांकित किया कि रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतरिक्ष तकनीक विशेष प्रकार के सेमीकंडक्टर उपकरणों पर बड़े पैमाने पर निर्भर करती हैं, जिनमें से अनेक खुले बाज़ार में सहजता से उपलब्ध नहीं होते। उन्होंने कहा, "सेमीकंडक्टर युद्ध के समय भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि लगभग सभी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स इन्हीं पर निर्भर करते हैं। इनमें से कई कंपोनेंट्स खुले बाज़ार में आसानी से नहीं मिलते।"

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को स्वदेशी बनाने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आयात पर निर्भरता संकट के समय रणनीतिक कमज़ोरी बन सकती है।

स्वदेशी अनुसंधान की ज़रूरत

अपने शुरुआती शोध के दिनों को याद करते हुए प्रो. वासी ने बताया कि उनकी टीम ने अंतरिक्ष उपयोग के लिए सेमीकंडक्टर डिवाइसेज़ पर रेडिएशन के प्रभावों का अध्ययन किया था। उन्होंने कहा, "उस समय भी वे चिप्स बाज़ार में उपलब्ध नहीं थे, इसलिए भारत को खुद रिसर्च करनी पड़ी। सेमीकंडक्टर के कई क्षेत्रों में यही स्थिति है।"

गौरतलब है कि यह उदाहरण भारत की उस पुरानी चुनौती को उजागर करता है, जहाँ संवेदनशील तकनीकें विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रही हैं। स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं के निर्माण को इसीलिए नीति-निर्माताओं की प्राथमिकता सूची में रखा जाना चाहिए।

निवेश और नवाचार की पुकार

प्रो. वासी ने ज़ोर देकर कहा कि भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने और भविष्य की आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और विनिर्माण क्षमताओं में निरंतर निवेश करना होगा। उन्होंने इसे केवल औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला भी बताया।

आने वाले वर्षों में भारत सरकार की सेमीकंडक्टर मिशन योजनाओं की सफलता काफी हद तक इसी तरह के विशेषज्ञ मार्गदर्शन और संस्थागत अनुसंधान पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीतिक है — और यही इसे महत्वपूर्ण बनाती है। भारत सरकार की सेमीकंडक्टर मिशन योजनाएँ फैब निर्माण पर केंद्रित हैं, लेकिन रक्षा और अंतरिक्ष-ग्रेड चिप्स के लिए जो विशेष अनुसंधान क्षमता चाहिए, वह अभी भी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं है। खुले बाज़ार में अनुपलब्ध चिप्स की निर्भरता एक मौन भेद्यता है जिसे नीतिगत चर्चाओं में अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है। जब तक स्वदेशी R&D को विनिर्माण प्रोत्साहन के बराबर प्राथमिकता नहीं मिलती, भारत का सेमीकंडक्टर सपना अधूरा रहेगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रो. जुजेर वासी कौन हैं और उन्हें पद्मश्री क्यों मिला?
प्रो. जुजेर वासी भारत के著名 सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा विशेषज्ञ हैं, जिन्हें विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाज़ा गया। उनका दशकों का शोध मुख्यतः सेमीकंडक्टर डिवाइसेज़ और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक पर केंद्रित रहा है।
सेमीकंडक्टर भारत की आर्थिक प्रगति के लिए क्यों ज़रूरी हैं?
प्रो. वासी के अनुसार, सेमीकंडक्टर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा प्रणालियों और अंतरिक्ष तकनीक — तीनों की बुनियाद हैं। इन क्षेत्रों में स्वदेशी उत्पादन क्षमता के बिना भारत की आर्थिक और सामरिक आत्मनिर्भरता अधूरी रहेगी।
रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक में सेमीकंडक्टर की क्या भूमिका है?
प्रो. वासी ने बताया कि लगभग सभी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स सेमीकंडक्टर-आधारित होते हैं और इनमें से कई विशेष चिप्स खुले बाज़ार में उपलब्ध नहीं होतीं। युद्ध जैसी परिस्थितियों में यह निर्भरता एक गंभीर रणनीतिक कमज़ोरी बन सकती है।
भारत में स्वदेशी सेमीकंडक्टर अनुसंधान की ज़रूरत क्यों है?
प्रो. वासी ने अपने शुरुआती शोध का उदाहरण देते हुए बताया कि अंतरिक्ष उपयोग के लिए रेडिएशन-प्रतिरोधी चिप्स बाज़ार में उपलब्ध नहीं थे, इसलिए भारत को स्वयं अनुसंधान करना पड़ा। यही स्थिति कई अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी है, जो स्वदेशी R&D को अनिवार्य बनाती है।
भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए क्या करना चाहिए?
प्रो. वासी ने सुझाया कि भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और विनिर्माण — तीनों में निरंतर और समन्वित निवेश करना होगा। केवल फैब निर्माण नहीं, बल्कि रक्षा और अंतरिक्ष-ग्रेड चिप्स के लिए विशेष R&D क्षमता विकसित करना भी उतना ही ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले