पद्मश्री प्रो. जुजेर वासी: सेमीकंडक्टर उत्पादन भारत की आर्थिक प्रगति और रक्षा आत्मनिर्भरता की कुंजी
सारांश
मुख्य बातें
पद्मश्री से सम्मानित著名 सेमीकंडक्टर विशेषज्ञ प्रोफेसर जुजेर वासी ने 29 मई 2026 को मुंबई में कहा कि सेमीकंडक्टर उत्पादन भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अपरिहार्य है। उनके अनुसार, यह तकनीक केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा प्रणालियों और अंतरिक्ष तकनीक की रीढ़ है।
सेमीकंडक्टर का व्यापक दायरा
प्रो. वासी ने स्पष्ट किया कि सेमीकंडक्टर चिप्स का प्रभाव क्षेत्र बहुत विस्तृत है। उन्होंने कहा, "सेमीकंडक्टर केवल चिप्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर्स की कई गतिविधियों को भी आगे बढ़ाते हैं।" उन्होंने इसे भारत के आत्मनिर्भर बनने की यात्रा में एक निर्णायक घटक बताया।
विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पद्मश्री सम्मान मिलने पर प्रो. वासी ने कहा कि वे इस पुरस्कार को पाकर अत्यंत गौरवान्वित और आश्चर्यचकित हैं। उनका दशकों का शोध कार्य मुख्यतः सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में केंद्रित रहा है।
रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक पर निर्भरता
प्रो. वासी ने रेखांकित किया कि रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतरिक्ष तकनीक विशेष प्रकार के सेमीकंडक्टर उपकरणों पर बड़े पैमाने पर निर्भर करती हैं, जिनमें से अनेक खुले बाज़ार में सहजता से उपलब्ध नहीं होते। उन्होंने कहा, "सेमीकंडक्टर युद्ध के समय भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि लगभग सभी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स इन्हीं पर निर्भर करते हैं। इनमें से कई कंपोनेंट्स खुले बाज़ार में आसानी से नहीं मिलते।"
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को स्वदेशी बनाने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आयात पर निर्भरता संकट के समय रणनीतिक कमज़ोरी बन सकती है।
स्वदेशी अनुसंधान की ज़रूरत
अपने शुरुआती शोध के दिनों को याद करते हुए प्रो. वासी ने बताया कि उनकी टीम ने अंतरिक्ष उपयोग के लिए सेमीकंडक्टर डिवाइसेज़ पर रेडिएशन के प्रभावों का अध्ययन किया था। उन्होंने कहा, "उस समय भी वे चिप्स बाज़ार में उपलब्ध नहीं थे, इसलिए भारत को खुद रिसर्च करनी पड़ी। सेमीकंडक्टर के कई क्षेत्रों में यही स्थिति है।"
गौरतलब है कि यह उदाहरण भारत की उस पुरानी चुनौती को उजागर करता है, जहाँ संवेदनशील तकनीकें विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रही हैं। स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं के निर्माण को इसीलिए नीति-निर्माताओं की प्राथमिकता सूची में रखा जाना चाहिए।
निवेश और नवाचार की पुकार
प्रो. वासी ने ज़ोर देकर कहा कि भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने और भविष्य की आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और विनिर्माण क्षमताओं में निरंतर निवेश करना होगा। उन्होंने इसे केवल औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला भी बताया।
आने वाले वर्षों में भारत सरकार की सेमीकंडक्टर मिशन योजनाओं की सफलता काफी हद तक इसी तरह के विशेषज्ञ मार्गदर्शन और संस्थागत अनुसंधान पर निर्भर करेगी।