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सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा से बनेगा भारत का भविष्य: पद्मश्री प्रो. जुजर वासी, IIT बॉम्बे

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सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा से बनेगा भारत का भविष्य: पद्मश्री प्रो. जुजर वासी, IIT बॉम्बे

सारांश

चार दशकों के शोध-अनुभव वाले पद्मश्री प्रो. जुजर वासी का संदेश सीधा है — सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा में स्वदेशी क्षमता के बिना भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षा अधूरी रहेगी। AI की लहर को भी वे चेतावनी के साथ अवसर मानते हैं।

मुख्य बातें

जुजर वासी ने 29 मई को मुंबई में कहा कि सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा भारत के भविष्य के विकास के मुख्य स्तंभ होंगे।
वासी 1970 के दशक के अंत से माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और फोटोवोल्टिक्स में सक्रिय हैं; हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित हुए।
उन्होंने रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स में सेमीकंडक्टर की अनिवार्यता बताते हुए स्वदेशी अनुसंधान और उत्पादन तंत्र विकसित करने पर बल दिया।
भारत अब सौर ऊर्जा उपभोक्ता से आगे बढ़कर सोलर सेल और मॉड्यूल निर्माता के रूप में उभर रहा है।
AI पर उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा है, ज़रूरत मज़बूत रणनीति की है ताकि देश वैश्विक अग्रणियों में शामिल हो सके।

पद्मश्री से सम्मानित आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर एमेरिटस जुजर वासी ने 29 मई को मुंबई में कहा कि सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा आने वाले दशकों में भारत की आर्थिक और तकनीकी शक्ति की रीढ़ बनेंगे। माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और फोटोवोल्टिक्स में चार दशक से अधिक के शोध-अनुभव के आधार पर उन्होंने यह विचार साझा किए।

पद्मश्री सम्मान और शोध-यात्रा

विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए हाल ही में पद्मश्री से नवाज़े गए प्रो. वासी ने इस सम्मान पर कहा, "यह मेरे लिए पूरी तरह अप्रत्याशित था, लेकिन यह सम्मान पाकर मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।" वे 1970 के दशक के अंत से सेमीकंडक्टर अनुसंधान से जुड़े हैं और देश में इस क्षेत्र में बढ़ते फोकस को 'बेहद सकारात्मक' बताते हैं।

सेमीकंडक्टर: रक्षा से लेकर रोज़मर्रा तक

प्रो. वासी ने रेखांकित किया कि रक्षा उपकरणों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में सेमीकंडक्टर की माँग सर्वाधिक है और कई महत्वपूर्ण तकनीकें खुले बाज़ार में सहजता से उपलब्ध नहीं होतीं। उन्होंने कहा, "युद्ध और रक्षा क्षेत्र में भी सेमीकंडक्टर की भूमिका बहुत अहम है।" उनके अनुसार, इसीलिए भारत को अपना स्वदेशी अनुसंधान और उत्पादन तंत्र विकसित करना अनिवार्य है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को चिप निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के विज़न का समर्थन करते हुए कहा कि देश को यह कदम "काफी पहले" उठा लेना चाहिए था — जो इस क्षेत्र में विलंबित नीतिगत ध्यान पर एक सुचिंतित टिप्पणी है।

सौर ऊर्जा: ऊर्जा सुरक्षा की नई उम्मीद

सौर ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा का मज़बूत आधार बताते हुए प्रो. वासी ने कहा, "सौर ऊर्जा को इस्तेमाल में लाने के लिए सोलर मॉड्यूल और सेमीकंडक्टर सोलर सेल्स जरूरी हैं। खुशी की बात है कि भारत अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सौर ऊर्जा देशों में तेजी से उभर रहा है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत अब केवल सौर ऊर्जा का उपभोक्ता नहीं, बल्कि सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल निर्माण में भी सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: चूकने की गुंजाइश नहीं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर प्रो. वासी ने कहा कि यह तकनीक पूरी दुनिया को तीव्र गति से बदल रही है और भारत को यह अवसर गँवाना नहीं चाहिए। उनके शब्दों में, "लगभग हर क्षेत्र में एआई का प्रभाव दिखाई देगा। भारत के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि देश एक मजबूत योजना के साथ आगे बढ़े और एआई के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी जगह बनाए।"

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार सेमीकंडक्टर मिशन और नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों पर एक साथ काम कर रही है। गौरतलब है कि प्रो. वासी जैसे विशेषज्ञों की आवाज़ नीति-निर्माण को वैज्ञानिक दृष्टिकोण देती है — और उनका यह संदेश स्पष्ट है कि तकनीकी आत्मनिर्भरता के बिना आर्थिक महाशक्ति का सपना अधूरा रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

चार दशकों के प्रयोगशाला-अनुभव वाले वैज्ञानिक हैं — और उनका यह कहना कि भारत को 'काफी पहले' यह कदम उठाना चाहिए था, विलंबित नीतिगत ध्यान पर एक मौन आलोचना है। सेमीकंडक्टर मिशन की घोषणाएँ हो चुकी हैं, लेकिन फैब से लेकर डिज़ाइन इकोसिस्टम तक की ज़मीनी तैयारी अभी भी अधूरी है। सौर ऊर्जा में भारत की छलाँग प्रभावशाली है, पर चीनी सप्लाई चेन पर निर्भरता एक अनसुलझी चुनौती बनी हुई है जिसे मुख्यधारा की चर्चा अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पद्मश्री प्रो. जुजर वासी कौन हैं और उनकी विशेषज्ञता क्या है?
प्रो. जुजर वासी आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर एमेरिटस हैं, जिन्हें माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और फोटोवोल्टिक्स में चार दशक से अधिक के योगदान के लिए हाल ही में पद्मश्री सम्मान दिया गया है। वे 1970 के दशक के अंत से सेमीकंडक्टर अनुसंधान से जुड़े हैं।
प्रो. वासी के अनुसार भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्यों ज़रूरी है?
उनके अनुसार रक्षा उपकरणों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में सेमीकंडक्टर की माँग सर्वाधिक है और कई महत्वपूर्ण तकनीकें खुले बाज़ार में आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं। इसलिए भारत को अपना स्वदेशी अनुसंधान और उत्पादन तंत्र विकसित करना होगा।
सौर ऊर्जा में भारत की स्थिति क्या है?
प्रो. वासी के अनुसार भारत अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सौर ऊर्जा देशों में तेज़ी से उभर रहा है। देश न केवल सौर ऊर्जा का उपभोग कर रहा है, बल्कि सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल निर्माण में भी सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर प्रो. वासी का क्या मानना है?
उनका मानना है कि AI लगभग हर क्षेत्र को बदल देगी और भारत को यह अवसर नहीं गँवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रतिभा की कमी नहीं है, ज़रूरत एक मज़बूत रणनीति की है जो देश को वैश्विक AI अग्रणियों में शामिल करे।
क्या प्रो. वासी ने PM मोदी के सेमीकंडक्टर विज़न का समर्थन किया?
हाँ, प्रो. वासी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को चिप निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के विज़न का खुलकर समर्थन किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश को यह कदम काफी पहले उठा लेना चाहिए था।
राष्ट्र प्रेस
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