14 अक्टूबर 2026
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डीआरआई का 'ऑपरेशन डीप मेनिफेस्ट': पाकिस्तान से ₹30 करोड़ के 73 लाख किलो सेंधा नमक के अवैध आयात का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

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डीआरआई का 'ऑपरेशन डीप मेनिफेस्ट': पाकिस्तान से ₹30 करोड़ के 73 लाख किलो सेंधा नमक के अवैध आयात का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

सारांश

'ऑपरेशन डीप मेनिफेस्ट' सिर्फ तस्करी का मामला नहीं — यह पाकिस्तान पर लगे व्यापार प्रतिबंधों को यूएई और श्रीलंका की आड़ में व्यवस्थित तरीके से तोड़ने की बड़ी साज़िश है। डीआरआई ने ₹30 करोड़ के 73 लाख किलो सेंधा नमक की तस्करी का पर्दाफाश कर 4 लोगों को गिरफ्तार किया।

मुख्य बातें

डीआरआई ने 'ऑपरेशन डीप मेनिफेस्ट' के तहत पाकिस्तान से 73 लाख किलोग्राम (7,311 मीट्रिक टन) सेंधा नमक के अवैध आयात का भंडाफोड़ किया।
कुल खेप की अनुमानित बाज़ार कीमत करीब ₹30 करोड़ ; 295 कंटेनर , नौ आयातक , मार्च 2026 से मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों के रास्ते आयात।
आरोपियों ने यूएई की कंपनियों के नकली 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' और कोलंबो (श्रीलंका) के रास्ते शिपमेंट रूट कर पाकिस्तानी मूल छिपाया।
कांडला बंदरगाह पर 140 मीट्रिक टन (₹24.41 लाख) जब्त; बैंक खातों से ₹20.96 लाख की बिक्री राशि भी ज़ब्त।
कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत चार लोग गिरफ्तार — दो कंपनी मालिक/भागीदार, एक कस्टम्स ब्रोकर जी-कार्ड होल्डर और एक दुबई सप्लायर।
ऑपरेशन 26 सितंबर से 11 अक्टूबर 2026 के बीच आठ शहरों में चला।

डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने 14 अक्टूबर 2026 को 'ऑपरेशन डीप मेनिफेस्ट' के तहत पाकिस्तान से आयात पर लगे प्रतिबंध को धोखे से तोड़ने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया। एजेंसी ने पाकिस्तान में निर्मित 73 लाख किलोग्राम से अधिक सेंधा नमक — 7,311 मीट्रिक टन, जिसकी अनुमानित बाज़ार कीमत करीब ₹30 करोड़ है — के अवैध आयात का भंडाफोड़ किया और इस सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

ऑपरेशन की रूपरेखा और दायरा

खुफिया जानकारी मिलने के बाद डीआरआई ने 26 सितंबर से 11 अक्टूबर 2026 के बीच दो सप्ताह तक चलने वाला समन्वित अभियान संचालित किया। इस दौरान एजेंसी ने गांधीधाम, आदिपुर, वेरावल, पानीपत, पुणे, पटियाला, नई दिल्ली और मुंबई में कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली।

जाँच में सामने आया कि नौ आयातकों ने प्रतिबंध के बावजूद मार्च 2026 से मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों के रास्ते 295 कंटेनर मँगाए। इनमें पाकिस्तान में बने इंडस्ट्रियल और हिमालयन रॉक सॉल्ट की खेप थी।

धोखाधड़ी का तरीका: नकली दस्तावेज़ और तीसरे देशों की आड़

आरोपियों ने शिपमेंट को श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह के रास्ते भारत भेजा और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की कंपनियों द्वारा जारी किए गए नकली 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' तथा फ़र्जी इनवॉइस का उपयोग कर माल के मूल स्थान को छिपाया।

जाँच के अनुसार, पाकिस्तान-श्रीलंका मार्ग से जुड़े 'बिल ऑफ लैडिंग' और श्रीलंका कस्टम्स में जमा किए गए घोषणा-पत्रों में पाकिस्तान को मूल देश और भारत को अंतिम मंज़िल स्पष्ट रूप से दर्ज था — जबकि भारत में जमा किए गए 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' नकली पाए गए।

जब्ती और वित्तीय कार्रवाई

कांडला बंदरगाह पर पाँच कंटेनर जब्त किए गए, जिनमें 140 मीट्रिक टन सेंधा नमक था और जिसकी कीमत ₹24.41 लाख बताई गई है। इसके अतिरिक्त, आयातकों के बैंक खातों में बिक्री से जमा ₹20.96 लाख की राशि भी ज़ब्त कर ली गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान व्यापार संबंध पहले से ही अत्यंत प्रतिबंधित हैं और पाकिस्तान से किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात पर सरकार की कड़ी नज़र है।

गिरफ्तार आरोपी और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क

कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है — आयात करने वाली कंपनियों के दो मालिक/भागीदार, एक कस्टम्स ब्रोकर का जी-कार्ड होल्डर, और दुबई के एक सप्लायर का मालिक, जिसने अपने पिता के नाम पर एक आयात कंपनी भी बना रखी थी।

प्रारंभिक जाँच में पाकिस्तान, यूएई, श्रीलंका और भारत में कंपनियों से जुड़े एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान हुई है। दुबई की कंपनियों के फ़र्जी इनवॉइस के ज़रिए लेन-देन और दस्तावेज़ों में तालमेल बिठाकर माल के पाकिस्तानी मूल को व्यवस्थित तरीके से छिपाया गया।

आगे की जाँच और संभावित कार्रवाई

डीआरआई इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जाँच जारी रखे हुए है। गौरतलब है कि यह मामला केवल कर-चोरी तक सीमित नहीं है — यह पाकिस्तान पर लगे व्यापार प्रतिबंधों की जानबूझकर की गई उल्लंघना है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के दायरे को भी छूती है। जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क के अन्य संभावित आयातकों और आपूर्तिकर्ताओं की पड़ताल कर रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पाकिस्तान पर लगे व्यापार प्रतिबंधों को तीसरे देशों की आड़ में व्यवस्थित रूप से दरकिनार करने की एक सुनियोजित कोशिश है — और यह पहली बार नहीं है। चिंताजनक यह है कि श्रीलंका के कस्टम्स दस्तावेज़ों में पाकिस्तान का नाम साफ दर्ज था, फिर भी 295 कंटेनर महीनों तक बिना रोक-टोक भारतीय बंदरगाहों से गुज़रते रहे — यह निगरानी तंत्र में गहरी खामी की ओर इशारा करता है। असली सवाल यह है कि नौ आयातकों वाला यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और केवल पाँच कंटेनर ही जब्त क्यों हो सके जबकि बाकी 290 पहले ही देश में आ चुके थे। डीआरआई की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन बंदरगाहों पर पूर्व-प्रवेश जाँच को मज़बूत किए बिना ऐसे नेटवर्क बार-बार सिर उठाते रहेंगे।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरआई का 'ऑपरेशन डीप मेनिफेस्ट' क्या है?
यह डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) द्वारा चलाया गया दो सप्ताह का समन्वित अभियान है, जो 26 सितंबर से 11 अक्टूबर 2026 के बीच आठ शहरों में संचालित हुआ। इसमें पाकिस्तान से आयात प्रतिबंध को तोड़कर 73 लाख किलोग्राम सेंधा नमक की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया।
तस्करों ने पाकिस्तानी मूल कैसे छिपाया?
आरोपियों ने शिपमेंट को श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह के रास्ते रूट किया और यूएई की कंपनियों द्वारा जारी नकली 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' व फ़र्जी इनवॉइस का उपयोग किया। जबकि पाकिस्तान-श्रीलंका मार्ग के असली बिल ऑफ लैडिंग में पाकिस्तान को मूल देश और भारत को अंतिम मंज़िल स्पष्ट दर्ज था।
इस मामले में क्या जब्त हुआ और कितने लोग गिरफ्तार हुए?
कांडला बंदरगाह पर 140 मीट्रिक टन सेंधा नमक (कीमत ₹24.41 लाख) के पाँच कंटेनर जब्त किए गए और आयातकों के बैंक खातों से ₹20.96 लाख की राशि भी ज़ब्त हुई। कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क में कौन-कौन से देश शामिल थे?
प्रारंभिक जाँच के अनुसार इस नेटवर्क में पाकिस्तान, यूएई (दुबई), श्रीलंका और भारत में कंपनियाँ शामिल हैं। दुबई की कंपनियाँ फ़र्जी दस्तावेज़ जारी करने और वित्तीय लेन-देन में इस्तेमाल हुईं, जबकि कोलंबो को ट्रांज़िट हब के रूप में उपयोग किया गया।
पाकिस्तान से भारत में आयात पर प्रतिबंध क्यों है?
भारत ने पाकिस्तान के साथ सीमा तनाव और द्विपक्षीय संबंधों में खटास के कारण पाकिस्तानी वस्तुओं के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष आयात पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इन प्रतिबंधों का उल्लंघन कस्टम्स एक्ट के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
राष्ट्र प्रेस
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