6 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

डीआरआई ने कांडला बंदरगाह पर ₹3 करोड़ के 364 मीट्रिक टन पाकिस्तानी सूखे खजूर जब्त किए, यूएई की आड़ में हो रही थी तस्करी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
डीआरआई ने कांडला बंदरगाह पर ₹3 करोड़ के 364 मीट्रिक टन पाकिस्तानी सूखे खजूर जब्त किए, यूएई की आड़ में हो रही थी तस्करी

सारांश

यूएई की आड़ में पाकिस्तानी सूखे खजूर भारत भेजने की साजिश डीआरआई ने उजागर की — कांडला में ₹3 करोड़ की 364 मीट्रिक टन खेप जब्त। एक सप्ताह में यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है; तूतीकोरिन में गुग्गुल राल मामले में दो गिरफ्तार।

मुख्य बातें

डीआरआई ने कांडला बंदरगाह पर 364 मीट्रिक टन पाकिस्तानी सूखे खजूर के 13 कंटेनर जब्त किए, अनुमानित मूल्य ₹3 करोड़ ।
खेप को यूएई से आयातित बताया गया था, जबकि माल पाकिस्तान से दुबई होते हुए भारत भेजा गया था।
आयातकों पर सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत मूल देश छिपाने और गलत दस्तावेज़ीकरण का आरोप।
पिछले सप्ताह तूतीकोरिन बंदरगाह पर ₹1.4 करोड़ मूल्य के 14 मीट्रिक टन पाकिस्तानी गुग्गुल राल की तस्करी का भी पर्दाफाश; दो गिरफ्तार ।
गुग्गुल राल CITES परिशिष्ट II में सूचीबद्ध और IUCN रेड लिस्ट पर 'अत्यंत संकटग्रस्त' श्रेणी में।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने कांडला बंदरगाह पर 364 मीट्रिक टन पाकिस्तानी सूखे खजूर से भरे 13 कंटेनर जब्त किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत ₹3 करोड़ बताई जा रही है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार, 6 अगस्त 2025 को जारी बयान में पुष्टि की कि इस खेप को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आयातित बताकर पाकिस्तानी माल पर लागू भारतीय प्रतिबंध को धोखे से दरकिनार करने की कोशिश की गई।

कैसे की गई तस्करी

जाँच में सामने आया कि खजूर को पहले पाकिस्तान से दुबई भेजा गया, जहाँ उसे नए कंटेनरों में स्थानांतरित कर यूएई-मूल का माल घोषित करते हुए भारत निर्यात किया गया। आयातकों पर आरोप है कि उन्होंने माल के वास्तविक उत्पत्ति देश को छिपाया और सीमा शुल्क दस्तावेज़ों में गलत जानकारी दर्ज कराई। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की संबंधित धाराओं के तहत पूरी खेप अधिकृत रूप से जब्त कर ली गई है।

एक सप्ताह में दूसरी बड़ी कार्रवाई

यह जब्ती ऐसे समय में हुई है जब डीआरआई पहले ही एक और बड़े मामले का पर्दाफाश कर चुका है। पिछले सप्ताह तूतीकोरिन बंदरगाह पर लगभग ₹1.4 करोड़ मूल्य के करीब 14 मीट्रिक टन पाकिस्तानी गुग्गुल राल के आयात की कोशिश नाकाम की गई थी। उस खेप को सोमालिया से उत्पन्न प्राकृतिक राल के रूप में गलत तरीके से घोषित किया गया था और दुबई के रास्ते भारत भेजा गया था।

गुग्गुल राल: संरक्षित और संकटग्रस्त प्रजाति

गुग्गुल राल (कॉमिफोरा प्रजाति) भारत और पाकिस्तान के शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है। इसे CITES परिशिष्ट II में सूचीबद्ध किया गया है और IUCN रेड लिस्ट में इसे 'अत्यंत संकटग्रस्त' श्रेणी में रखा गया है। तूतीकोरिन मामले में जाँच के दौरान इस साजिश में शामिल दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।

व्यापक संदर्भ और आगे की कार्रवाई

भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध वर्षों से प्रतिबंधित हैं और तीसरे देशों के माध्यम से पाकिस्तानी माल की तस्करी की यह कोई पहली घटना नहीं है। डीआरआई की ये लगातार कार्रवाइयाँ संकेत देती हैं कि दुबई-रूट का उपयोग कर भारतीय प्रतिबंधों को चकमा देने की कोशिशें बढ़ रही हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, दोनों मामलों में आगे की जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दो अलग-अलग उत्पादों की पाकिस्तानी तस्करी — यह महज संयोग नहीं लगता। दुबई को ट्रांज़िट हब की तरह इस्तेमाल करने का यह पैटर्न बताता है कि भारत-पाकिस्तान व्यापार प्रतिबंध को व्यवस्थित रूप से दरकिनार किया जा रहा है। असली सवाल यह है कि सीमा शुल्क की मौजूदा जाँच-प्रणाली इसे पकड़ने में कितनी सक्षम है — और जो खेपें पकड़ में नहीं आतीं, उनका आकार क्या होगा। गिरफ्तारियाँ हुई हैं, लेकिन आयात श्रृंखला में ऊपर के सूत्रधारों तक पहुँचना ही असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरआई ने कांडला बंदरगाह पर क्या जब्त किया?
डीआरआई ने कांडला बंदरगाह पर 364 मीट्रिक टन पाकिस्तानी सूखे खजूर से भरे 13 कंटेनर जब्त किए, जिनकी कीमत लगभग ₹3 करोड़ आंकी गई है। इस खेप को यूएई से आयातित बताकर भारतीय प्रतिबंध से बचने की कोशिश की गई थी।
पाकिस्तानी माल को यूएई से आया कैसे दिखाया गया?
जाँच के अनुसार, खजूर को पहले पाकिस्तान से दुबई भेजा गया, वहाँ नए कंटेनरों में स्थानांतरित किया गया और यूएई-मूल के दस्तावेज़ तैयार कर भारत निर्यात किया गया। आयातकों ने सीमा शुल्क घोषणा में उत्पत्ति देश की जानकारी छिपाई।
भारत में पाकिस्तानी माल के आयात पर प्रतिबंध क्यों है?
भारत ने पाकिस्तान से सीधे व्यापारिक आयात पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जो दोनों देशों के बीच राजनयिक और सुरक्षा तनाव की पृष्ठभूमि में लागू हैं। इन प्रतिबंधों को दरकिनार करना सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत दंडनीय अपराध है।
तूतीकोरिन बंदरगाह पर गुग्गुल राल मामले में क्या हुआ?
डीआरआई ने तूतीकोरिन बंदरगाह पर लगभग ₹1.4 करोड़ मूल्य के 14 मीट्रिक टन पाकिस्तानी गुग्गुल राल की तस्करी का पर्दाफाश किया। खेप को सोमालियाई प्राकृतिक राल बताकर दुबई के रास्ते भेजा गया था और इस मामले में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
गुग्गुल राल इतनी संवेदनशील वस्तु क्यों है?
गुग्गुल राल (कॉमिफोरा प्रजाति) को CITES परिशिष्ट II में सूचीबद्ध किया गया है, जिसका अर्थ है कि इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कड़ी निगरानी आवश्यक है। IUCN रेड लिस्ट पर इसे 'अत्यंत संकटग्रस्त' श्रेणी में रखा गया है, इसलिए इसकी अवैध तस्करी पर्यावरण कानूनों का भी उल्लंघन है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले