अगरतला में डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: बिहार से आई मालगाड़ी से ₹6.54 करोड़ का प्रतिबंधित कफ सिरप जब्त, एक गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने 2 जुलाई 2026 को अगरतला रेलवे स्टेशन पर बिहार से आई एक मालगाड़ी से ₹6.54 करोड़ से अधिक मूल्य के प्रतिबंधित कफ सिरप की बड़ी खेप बरामद की। इस कार्रवाई में 55,626 बोतलें जब्त की गईं और एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया। यह त्रिपुरा में अक्टूबर 2025 के बाद की दूसरी सबसे बड़ी ऐसी बरामदगी है।
मुख्य घटनाक्रम
खुफिया सूचना के आधार पर डीआरआई अधिकारियों ने असम राइफल्स, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ संयुक्त अभियान चलाते हुए मालगाड़ी से जुड़ी हाई-कैपेसिटी पार्सल वैन को रोका। जब्त की गई बोतलें एस्कुफ और फेयरडिल ब्रांड की कफ सिरप की थीं — प्रत्येक बोतल 100 मिलीलीटर की।
अधिकारियों के अनुसार, यह खेप बिहार के कटिहार से बुक की गई थी और मालगाड़ी के जरिए अगरतला भेजी गई थी। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान सुब्रत देब (34 वर्ष) के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर त्रिपुरा के खोवाई जिले में एक निजी व्यावसायिक फर्म के मैनेजर हैं और राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित अगरतला रेलवे स्टेशन पर यह अवैध खेप लेने पहुँचे थे।
दवाओं की प्रकृति और दुरुपयोग
एस्कुफ और फेयरडिल कफ सिरप में कोडीन फॉस्फेट और ट्रिप्रोलिडिन हाइड्रोक्लोराइड जैसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं। इन दवाओं का भारत, पड़ोसी देश बांग्लादेश और कुछ अन्य देशों में नशे के रूप में गलत इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि अधिकारियों ने की है। यही कारण है कि इन्हें प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है।
पिछली बड़ी बरामदगी से तुलना
गौरतलब है कि 17 अक्टूबर 2025 को त्रिपुरा पुलिस क्राइम ब्रांच (टीपीसीबी) ने अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर एक मालगाड़ी से लगभग ₹5.4 करोड़ मूल्य के प्रतिबंधित 'एस्कफ' कफ सिरप की खेप जब्त की थी। वह मालगाड़ी 16 अक्टूबर 2025 को दिल्ली से पश्चिम त्रिपुरा के जिरानिया रेलवे स्टेशन पहुँची थी और उसमें मुर्गियों का दाना, चावल व अन्य सामान के बीच प्रतिबंधित दवाएँ छिपाई गई थीं। उस मामले में राजीव दासगुप्ता (42 वर्ष) समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें इस रैकेट का प्रमुख सरगना माना जाता है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, दासगुप्ता कई पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क में अहम भूमिका निभाते थे।
कानूनी कार्रवाई और जाँच की स्थिति
डीआरआई ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने बताया कि तस्करी के इस रैकेट के स्रोत, प्राप्तकर्ताओं और इससे जुड़े व्यापक नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए जाँच जारी है।
रेलवे नेटवर्क का दुरुपयोग — एक बड़ी चिंता
आरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ इससे पहले भी त्रिपुरा और देश के अन्य हिस्सों के बीच चलने वाली ट्रेनों से गांजा (मारिजुआना) समेत कई नशीले और प्रतिबंधित पदार्थ जब्त कर चुकी हैं। यह एक स्पष्ट पैटर्न की ओर इशारा करता है — तस्कर रेलवे के पार्सल नेटवर्क को अवैध खेप की आवाजाही के लिए एक सुविधाजनक माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। मौजूदा बरामदगी इस बात की पुष्टि करती है कि पूर्वोत्तर भारत में नशे की तस्करी का रेल-आधारित रूट अभी भी सक्रिय है और इसे तोड़ने के लिए बहु-एजेंसी समन्वय जरूरी है।