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अगरतला रेलवे स्टेशन पर ₹2.36 करोड़ की प्रतिबंधित कफ सिरप जब्त, देवघर एक्सप्रेस से 39,345 बोतलें बरामद

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अगरतला रेलवे स्टेशन पर ₹2.36 करोड़ की प्रतिबंधित कफ सिरप जब्त, देवघर एक्सप्रेस से 39,345 बोतलें बरामद

सारांश

बिहार के कटिहार से चली देवघर एक्सप्रेस की पार्सल वैन में 80 सीलबंद मेटल ड्रमों के भीतर छिपाई गई ₹2.36 करोड़ की कफ सिरप — यह महज़ एक जब्ती नहीं, रेलवे पार्सल नेटवर्क के व्यवस्थित दुरुपयोग की बानगी है। त्रिपुरा में यह दूसरी बड़ी बरामदगी है और तस्करी की जड़ें गहरी होती जा रही हैं।

मुख्य बातें

1 जुलाई 2026 को अगरतला रेलवे स्टेशन पर देवघर एक्सप्रेस की पार्सल वैन से ₹2.36 करोड़ मूल्य की प्रतिबंधित कफ सिरप जब्त की गई।
'एस्कफ' और 'फेयरडिल' ब्रांड की 39,345 बोतलें (100 मिली प्रत्येक) लगभग 80 सीलबंद मेटल ड्रमों में छिपाकर लाई गई थीं।
सुब्रत देब (34) , खोवाई जिले की एक फर्म का मैनेजर, खेप लेने पहुंचा था — उसे गिरफ्तार किया गया।
यह त्रिपुरा में प्रतिबंधित कफ सिरप की दूसरी सबसे बड़ी बरामदगी है; पहली 17 अक्टूबर 2025 को ₹5.4 करोड़ की थी।
अभियान में GRP, ANTF, असम राइफल्स और DRI शामिल थे; रेलवे रिकॉर्ड से पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

अगरतला रेलवे स्टेशन पर 1 जुलाई 2026 को बिहार से आई देवघर एक्सप्रेस की पार्सल वैन से ₹2.36 करोड़ से अधिक मूल्य की प्रतिबंधित कफ सिरप की बड़ी खेप जब्त की गई — यह त्रिपुरा में अब तक की दूसरी सबसे बड़ी ऐसी बरामदगी है। गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के संयुक्त अभियान में 'एस्कफ' और 'फेयरडिल' ब्रांड की 39,345 बोतलें (प्रत्येक 100 मिली) बरामद की गईं। एकमात्र आरोपी सुब्रत देब (34) को मौके से गिरफ्तार किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

पार्सल वैन कोच को 29 जून को बिहार के कटिहार से अगरतला के लिए बुक किया गया था और देवघर एक्सप्रेस से जोड़ा गया था। ट्रेन 1 जुलाई को अगरतला पहुंची, जहाँ जांच के दौरान कफ सिरप की बोतलें लगभग 80 सीलबंद मेटल ड्रमों के अंदर छिपी मिलीं — जो तस्करों की सुनियोजित रणनीति का संकेत है।

गिरफ्तार आरोपी सुब्रत देब, त्रिपुरा के खोवाई जिले में एक निजी व्यावसायिक फर्म का मैनेजर है। वह इस अवैध खेप को स्टेशन से प्राप्त करने के लिए पहुंचा था। पुलिस ने स्टेशन के पार्सल कमर्शियल सुपरिटेंडेंट को औपचारिक पत्र भेजकर प्रेषक-प्राप्तकर्ता की जानकारी, रेलवे रसीद और अन्य संबंधित अभिलेख मांगे हैं।

प्रतिबंधित पदार्थ और दुरुपयोग का खतरा

'एस्कफ' और 'फेयरडिल' कफ सिरप में कोडीन फॉस्फेट और ट्रिप्रोलिडाइन हाइड्रोक्लोराइड होते हैं — ऐसे रासायनिक पदार्थ जिनका भारत के साथ-साथ पड़ोसी देश बांग्लादेश और अन्य देशों में नशीली दवाओं के रूप में दुरुपयोग होता है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए रेलवे नेटवर्क के दुरुपयोग में तेज़ी देखी जा रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले 17 अक्टूबर 2025 को त्रिपुरा पुलिस क्राइम ब्रांच (TPCB) ने जिरानिया रेलवे स्टेशन पर एक मालगाड़ी से ₹5.4 करोड़ मूल्य की 'एस्कफ' कफ सिरप की खेप जब्त की थी। उस मामले में राजीव दासगुप्ता (42) सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें कई पूर्वोत्तर राज्यों में फैले ड्रग तस्करी नेटवर्क का प्रमुख सरगना माना जाता है।

सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया

पुलिस महानिरीक्षक (खुफिया और सुरक्षा) कृष्णेंदु चक्रवर्ती और पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) मंचक इपर ने स्वयं अगरतला रेलवे स्टेशन का दौरा कर जब्ती प्रक्रिया की निगरानी की। चक्रवर्ती ने कहा कि पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग के नेतृत्व में त्रिपुरा पुलिस राज्य को नशा-मुक्त बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

चक्रवर्ती ने मीडिया से कहा, 'यह बरामदगी त्रिपुरा में प्रतिबंधित कफ सिरप की दूसरी सबसे बड़ी जब्ती है, लेकिन राज्य पुलिस ने नशीले पदार्थों और गांजा (मारिजुआना) सहित अन्य प्रतिबंधित सामानों के अवैध व्यापार के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रखी है।' इपर ने भी स्पष्ट किया कि इस खेप से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

इस अभियान में GRP और ANTF के अलावा असम राइफल्स और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) के जवान भी शामिल थे।

रेलवे नेटवर्क का बढ़ता दुरुपयोग

रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार त्रिपुरा तथा देश के अन्य हिस्सों के बीच चलने वाली ट्रेनों से गांजा सहित अनेक प्रतिबंधित पदार्थ जब्त किए हैं। यह पैटर्न दर्शाता है कि तस्कर अवैध सामान की ढुलाई के लिए रेलवे पार्सल प्रणाली का व्यवस्थित और बढ़ते पैमाने पर दुरुपयोग कर रहे हैं।

आगे की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं और इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच तेज़ की गई है। त्रिपुरा पुलिस के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) राजदीप देब ने बताया कि रेलवे रिकॉर्ड से प्रेषक और नेटवर्क की पूरी कड़ी उजागर करने की कोशिश की जा रही है। यह जांच यह तय करेगी कि क्या यह खेप पिछले साल पकड़े गए उसी नेटवर्क का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि गिरफ्तारियाँ सप्लाई चेन को नहीं तोड़ पाई हैं। 'नशा-मुक्त त्रिपुरा' का संकल्प तब तक अधूरा रहेगा जब तक कटिहार जैसे प्रेषण केंद्रों पर निगरानी और रेलवे पार्सल सत्यापन तंत्र को मज़बूत नहीं किया जाता — केवल प्राप्ति-छोर पर पकड़ से असली सरगना बचते रहेंगे।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगरतला रेलवे स्टेशन पर क्या जब्त किया गया?
देवघर एक्सप्रेस की पार्सल वैन से 'एस्कफ' और 'फेयरडिल' ब्रांड की 39,345 कफ सिरप बोतलें जब्त की गईं, जिनकी कीमत ₹2.36 करोड़ से अधिक आंकी गई है। ये बोतलें 80 सीलबंद मेटल ड्रमों में छिपाई गई थीं।
इन कफ सिरप पर प्रतिबंध क्यों है?
'एस्कफ' और 'फेयरडिल' में कोडीन फॉस्फेट और ट्रिप्रोलिडाइन हाइड्रोक्लोराइड होते हैं, जिनका नशीले पदार्थों के रूप में दुरुपयोग होता है। भारत के साथ-साथ बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों में इनका अवैध इस्तेमाल बड़ी समस्या बन चुका है।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक एक व्यक्ति — सुब्रत देब (34), खोवाई जिले की एक निजी फर्म का मैनेजर — को गिरफ्तार किया गया है। वह खेप लेने के लिए अगरतला रेलवे स्टेशन पहुंचा था। रेलवे रिकॉर्ड के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान की जांच जारी है।
त्रिपुरा में इससे पहले ऐसी बड़ी बरामदगी कब हुई थी?
17 अक्टूबर 2025 को त्रिपुरा पुलिस क्राइम ब्रांच ने जिरानिया रेलवे स्टेशन पर एक मालगाड़ी से ₹5.4 करोड़ मूल्य की 'एस्कफ' कफ सिरप जब्त की थी। उस मामले में राजीव दासगुप्ता (42) सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें पूर्वोत्तर में फैले ड्रग नेटवर्क का प्रमुख सरगना माना जाता है।
इस ऑपरेशन में कौन-सी एजेंसियां शामिल थीं?
यह संयुक्त अभियान गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने चलाया। असम राइफल्स और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) के जवान भी इसमें शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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