27 जुलाई 2026
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त्रिपुरा डीजीपी अनुराग की रहस्यमयी मौत: जांच टीम 3 से बढ़कर 10 सदस्यीय हुई, रोज़ाना ब्रीफिंग अनिवार्य

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त्रिपुरा डीजीपी अनुराग की रहस्यमयी मौत: जांच टीम 3 से बढ़कर 10 सदस्यीय हुई, रोज़ाना ब्रीफिंग अनिवार्य

सारांश

त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग की रहस्यमयी मौत का मामला गहराता जा रहा है। पुलिस ने जांच दल को 3 से 10 सदस्यीय किया, रोज़ाना ब्रीफिंग अनिवार्य की — लेकिन विपक्ष न्यायिक जांच की माँग पर अड़ा है और कांग्रेस इसे हत्या बता रही है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा डीजीपी अनुराग का शव 20 जुलाई 2026 को राज्य पुलिस मुख्यालय, अगरतला में उनके चैंबर से सटे वॉशरूम में संदिग्ध हालात में मिला था।
जांच दल को 3 सदस्यों से बढ़ाकर 10 सदस्यीय किया गया; नेतृत्व एसपी नमित पाठक के पास।
टीम के लिए दैनिक ब्रीफिंग और डीब्रीफिंग बैठकें तथा प्रत्येक शनिवार को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य।
कांग्रेस नेता सुदीप रॉय बर्मन ने इसे 'हत्या का मामला' बताते हुए त्रिपुरा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच की माँग दोहराई।
CPI-M, CPI और अन्य विपक्षी दलों ने भी न्यायिक जांच की माँग की और विरोध रैलियाँ आयोजित कीं।
अनुराग 1994 बैच के IPS अधिकारी थे; उनका कार्यकाल 17 मई 2027 तक था।

त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच को रफ्तार देते हुए त्रिपुरा पुलिस ने 27 जुलाई 2026 को जांच दल का विस्तार किया — तीन सदस्यीय टीम को अब 10 सदस्यीय विशेष जांच दल में तब्दील कर दिया गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। 20 जुलाई को राज्य पुलिस मुख्यालय, अगरतला में उनके सरकारी चैंबर से सटे वॉशरूम में डीजीपी का शव मिला था, जिसके बाद से पूरे राज्य में हलचल मची हुई है।

जांच दल का पुनर्गठन

24 जुलाई को कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक ने तीन सदस्यीय प्रारंभिक टीम गठित की थी, जिसका नेतृत्व पश्चिम त्रिपुरा जिले के पुलिस अधीक्षक नमित पाठक को सौंपा गया था। अब एसपी पाठक की अध्यक्षता में इसे पुनर्गठित कर 10 सदस्यीय टीम बनाया गया है।

नई टीम में वेस्ट त्रिपुरा के अर्बन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ध्रुबा नाथ के साथ-साथ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, अमताली पुलिस स्टेशन, वेस्ट अगरतला महिला पुलिस स्टेशन तथा बट्टाला और रामनगर आउटपोस्ट के प्रभारी अधिकारी शामिल हैं। केटीडी सिंह पुलिस ट्रेनिंग एकेडमी के एक निरीक्षक और पूर्व जांच अधिकारी सुभोजित देब भी इस दल का हिस्सा हैं।

जांच की कार्यप्रणाली और अनुशासन

आधिकारिक आदेश के अनुसार, पुनर्गठित टीम के सदस्य मिलकर काम करेंगे, कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे और जांच की गोपनीयता तथा व्यावसायिकता बनाए रखेंगे।

आदेश में कहा गया है कि जांच की प्रगति की समीक्षा, मामले में हुए घटनाक्रमों पर चर्चा, कार्य-आवंटन और आगे की रणनीति तय करने के लिए प्रतिदिन सुबह एक ब्रीफिंग बैठक होगी। इसी तरह दिन की प्रगति का आकलन करने, सौंपे गए कार्यों के परिणामों की समीक्षा, जांच में किसी कमी की पहचान और अगले दिन की कार्य-योजना बनाने के लिए शाम को डीब्रीफिंग बैठक अनिवार्य की गई है।

सभी संबंधित अधिकारी प्रतिदिन पश्चिम त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक को दैनिक प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसमें की गई जांच, एकत्र किए गए साक्ष्य, तकनीकी विश्लेषण और प्रस्तावित अगली कार्रवाई का विवरण होगा। प्रत्येक शनिवार को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) को भेजी जाएगी।

विपक्ष की न्यायिक जांच की मांग

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की कार्यकारी समिति (CWC) के सदस्य और त्रिपुरा के पूर्व मंत्री सुदीप रॉय बर्मन ने रविवार को पार्टी की यह मांग दोहराई कि डीजीपी की मौत की जांच त्रिपुरा उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।

रॉय बर्मन ने कहा, 'त्रिपुरा के पुलिस प्रमुख की रहस्यमयी मौत कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। राज्य के सबसे वरिष्ठ, ईमानदार, निष्ठावान, समर्पित और ऊर्जावान पुलिस अधिकारी की मौत न केवल त्रिपुरा के लिए बल्कि पूरे देश के लिए बेहद चिंता का विषय है।'

उन्होंने यह भी कहा, 'हमारा मानना है कि यह हत्या का मामला है।' उन्होंने आगाह किया कि यदि मुख्यमंत्री माणिक साहा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश करती है, तो उस पर गंभीर सवाल उठेंगे। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPI-M), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और कई अन्य दलों ने भी उच्च न्यायालय की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की है। इससे पहले वामपंथी दलों और कांग्रेस ने राज्य में अलग-अलग विरोध रैलियाँ भी आयोजित की थीं।

डीजीपी अनुराग: एक असाधारण करियर

त्रिपुरा कैडर के 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी अनुराग ने 17 मई 2025 को 1988 बैच के IPS अधिकारी अमिताभ रंजन की जगह त्रिपुरा के डीजीपी का पदभार संभाला था। इस पद पर उनका कार्यकाल 17 मई 2027 तक निर्धारित था।

अपने करियर में उन्होंने कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ काम किया और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में संयुक्त निदेशक व अतिरिक्त निदेशक के रूप में सेवाएं दीं। इसके अलावा वे पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में भी रहे। उल्लेखनीय है कि उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) का नेतृत्व भी किया था।

उनका अंतिम संस्कार 22 जुलाई को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत में उनके पैतृक शहर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर बावली चुंगी के पास स्थित श्मशान घाट पर उनके पुत्र अभिषेक ने परिजनों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सैकड़ों शोकाकुल लोगों की उपस्थिति में चिता को मुखाग्नि दी।

आगे की राह

यह मामला ऐसे समय में और संवेदनशील हो गया है जब राज्य में राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है और विपक्ष न्यायिक हस्तक्षेप की माँग पर अड़ा है। पुनर्गठित जांच दल की संरचित कार्यप्रणाली — दैनिक ब्रीफिंग से लेकर साप्ताहिक रिपोर्ट तक — यह संकेत देती है कि पुलिस इस मामले में पारदर्शिता का दबाव महसूस कर रही है। अब देखना यह होगा कि क्या यह विस्तारित जांच दल उन सवालों के जवाब दे पाएगा जो डीजीपी अनुराग की मौत के बाद से अनुत्तरित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य पुलिस उस मामले की निष्पक्ष जांच कर सकती है जिसमें उसी के सर्वोच्च अधिकारी की जान गई हो। जब CPI-M, Cांग्रेस और CPI एक साथ न्यायिक निगरानी की माँग करें, तो यह राजनीतिक एकमत नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वास का संकट है। गौरतलब है कि अनुराग ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की SIT जांच जैसे संवेदनशील मामलों का नेतृत्व किया था — ऐसे अधिकारी की संदिग्ध मौत की जांच अगर पारदर्शी नहीं दिखी, तो यह पूरे देश की पुलिस व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े करेगी।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा डीजीपी अनुराग की मौत कब और कहाँ हुई?
20 जुलाई 2026 को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में उनके सरकारी चैंबर से जुड़े वॉशरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में उनका शव मिला। वे 1994 बैच के IPS अधिकारी थे और 17 मई 2025 से त्रिपुरा के डीजीपी के पद पर थे।
जांच टीम में विस्तार क्यों किया गया?
इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच में तेजी लाने के लिए 24 जुलाई को गठित तीन सदस्यीय टीम को 10 सदस्यीय कर दिया गया। नई टीम में साइबर क्राइम, महिला पुलिस स्टेशन और पुलिस प्रशिक्षण अकादमी के विशेषज्ञ शामिल हैं ताकि जांच के विभिन्न पहलुओं को एक साथ आगे बढ़ाया जा सके।
विपक्ष न्यायिक जांच की माँग क्यों कर रहा है?
कांग्रेस नेता सुदीप रॉय बर्मन ने इसे 'हत्या का मामला' बताया है और कहा है कि राज्य सरकार अगर इसे दबाती है तो उस पर सवाल उठेंगे। CPI-M, CPI और अन्य दल भी मानते हैं कि राज्य पुलिस द्वारा अपने ही प्रमुख की मौत की जांच में हितों का टकराव हो सकता है, इसलिए त्रिपुरा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच होनी चाहिए।
डीजीपी अनुराग का करियर कैसा रहा?
अनुराग ने कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र मिशन , CBI में संयुक्त एवं अतिरिक्त निदेशक, BPR&D और CISF में सेवाएं दीं। उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की जांच के लिए गृह मंत्रालय द्वारा गठित SIT का नेतृत्व भी किया था।
जांच की प्रगति की निगरानी कैसे होगी?
आधिकारिक आदेश के अनुसार, सभी अधिकारी प्रतिदिन एसपी नमित पाठक को दैनिक प्रगति रिपोर्ट देंगे और प्रत्येक शनिवार साप्ताहिक रिपोर्ट पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) को भेजी जाएगी। सुबह ब्रीफिंग और शाम डीब्रीफिंग बैठकें अनिवार्य हैं।
राष्ट्र प्रेस
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