31 अगस्त 2026
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त्रिपुरा विधानसभा में डीजीपी अनुराग की मौत पर तीसरे दिन भी हंगामा, कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन निलंबित

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त्रिपुरा विधानसभा में डीजीपी अनुराग की मौत पर तीसरे दिन भी हंगामा, कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन निलंबित

सारांश

त्रिपुरा विधानसभा में डीजीपी अनुराग की संदिग्ध मौत का मुद्दा थमने का नाम नहीं ले रहा — मानसून सत्र के तीसरे दिन भी हंगामा, कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन निलंबित और पूरा विपक्ष वॉकआउट। सरकार जाँच जारी होने का हवाला दे रही है, विपक्ष सच्चाई छिपाने का आरोप लगा रहा है।

मुख्य बातें

त्रिपुरा विधानसभा में 31 अगस्त को मानसून सत्र के लगातार तीसरे दिन डीजीपी अनुराग की मौत पर हंगामा हुआ।
स्पीकर रामपद जमातिया ने कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन को विधानसभा नियम 330 के तहत पूरे दिन के लिए निलंबित किया।
निलंबन के बाद पूरा विपक्ष — कांग्रेस और सीपीआईएम — सदन से वॉकआउट कर गया।
डीजीपी अनुराग का शव 20 जुलाई को अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय के वॉशरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था।
मुख्यमंत्री माणिक साहा के अनुसार, जाँच की निगरानी आईजी मांचक इप्पर कर रहे हैं और टीम दिल्ली भी जा चुकी है।
विपक्ष ने मुख्यमंत्री माणिक साहा के इस्तीफे की माँग की और सरकार पर तथ्य छिपाने का आरोप लगाया।

त्रिपुरा विधानसभा में राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग की संदिग्ध मौत का मुद्दा सोमवार, 31 अगस्त को मानसून सत्र के लगातार तीसरे दिन भी सदन की कार्यवाही को बाधित करता रहा। विपक्षी दलों के हंगामे के बीच स्पीकर ने कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन को नियम 330 के तहत पूरे दिन के लिए सदन से निलंबित कर दिया। गौरतलब है कि डीजीपी अनुराग का शव 20 जुलाई को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में उनके सरकारी कार्यालय से जुड़े वॉशरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था।

मुख्य घटनाक्रम

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने डीजीपी की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन को बताया कि डीजीपी की पत्नी रविवार को त्रिपुरा पहुँचीं और यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उनके पति कोई सुसाइड नोट छोड़ गए थे। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआईएम के विधायक विरोध में उतर आए और सरकार से विस्तृत बयान की माँग करने लगे।

स्पीकर रामपद जमातिया ने बार-बार विपक्षी सदस्यों से प्रश्नकाल की कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा थमा नहीं। रॉय बर्मन और नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी के नेतृत्व में विपक्षी विधायक सदन के वेल में पहुँच गए, मुख्यमंत्री माणिक साहा के इस्तीफे की माँग करते हुए तख्तियाँ और पोस्टर दिखाए और सरकार विरोधी नारेबाज़ी की।

निलंबन और वॉकआउट

लगातार व्यवधान के बाद स्पीकर रामपद जमातिया ने त्रिपुरा विधानसभा प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के नियम 330 के तहत सुदीप रॉय बर्मन को पूरे दिन के लिए सदन से निलंबित कर दिया और मार्शल व वॉच एंड वार्ड कर्मियों को उन्हें सदन से बाहर ले जाने का निर्देश दिया। इसके कुछ मिनट बाद पूरा विपक्ष सदन से वॉकआउट कर गया।

रॉय बर्मन ने निलंबन को 'गैरकानूनी' करार देते हुए आरोप लगाया कि राज्य के पुलिस प्रमुख की मौत जैसे अहम मुद्दे को उठाने पर उन्हें दंडित किया गया। नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने भी सरकार पर डीजीपी की मौत से जुड़े तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया।

सरकार का पक्ष

स्पीकर ने सदन को याद दिलाया कि मुख्यमंत्री माणिक साहा मानसून सत्र के पहले और दूसरे दिन पहले ही इस मामले में बयान दे चुके हैं। मुख्यमंत्री ने पूर्व में कहा था कि राज्य पुलिस ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की मौत की विस्तृत जाँच शुरू कर दी है, जिसकी निगरानी पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) मांचक इप्पर कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, जाँच दल दिल्ली भी जा चुका है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेज़ों की जाँच की जा रही है। साहा ने यह भी कहा था कि यदि जाँच में किसी की गैरकानूनी भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विपक्ष के आरोप और पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब त्रिपुरा में राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचा है। कांग्रेस और सीपीआईएम का आरोप है कि सरकार जाँच की आड़ में सच्चाई दबाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का तर्क है कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की जाँच केवल राज्य पुलिस के भरोसे नहीं छोड़ी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सभी पक्षों से अपील की है कि जाँच पूरी होने से पहले अटकलों से बचें।

आगे क्या होगा

जाँच दल की रिपोर्ट आने तक विधानसभा में यह मुद्दा गरम रहने के आसार हैं। विपक्ष ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को सत्र के शेष दिनों में भी उठाता रहेगा। सदन में बहाली के लिए सुदीप रॉय बर्मन के निलंबन पर भी राजनीतिक बहस तेज़ हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत जवाबदेही की गंभीर परीक्षा है। असली सवाल यह है कि जब मृतक स्वयं राज्य की पुलिस के शीर्ष पर थे, तो उसी पुलिस द्वारा की जा रही जाँच की विश्वसनीयता कितनी होगी? मुख्यमंत्री का 'जाँच जारी है' वाला बयान तब तक पर्याप्त नहीं माना जाएगा जब तक कोई स्वतंत्र या न्यायिक जाँच का आश्वासन न दिया जाए। विपक्षी विधायक को निलंबित करना इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की छवि को और कमज़ोर करता है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीजीपी अनुराग की मौत कब और कहाँ हुई?
डीजीपी अनुराग का शव 20 जुलाई को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में उनके सरकारी कार्यालय से जुड़े वॉशरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। मौत की परिस्थितियाँ अभी जाँच के दायरे में हैं।
त्रिपुरा विधानसभा में कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन को क्यों निलंबित किया गया?
स्पीकर रामपद जमातिया ने सुदीप रॉय बर्मन को 31 अगस्त को विधानसभा प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के नियम 330 के तहत पूरे दिन के लिए निलंबित किया। वह डीजीपी अनुराग की मौत के मुद्दे पर सदन के वेल में पहुँचकर नारेबाज़ी कर रहे थे और कार्यवाही बाधित कर रहे थे।
डीजीपी अनुराग की मौत की जाँच कौन कर रहा है?
मुख्यमंत्री माणिक साहा के अनुसार, जाँच की निगरानी पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) मांचक इप्पर कर रहे हैं। जाँच दल दिल्ली भी जा चुका है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जाँच की जा रही है।
विपक्ष की मुख्य माँगें क्या हैं?
कांग्रेस और सीपीआईएम के विधायकों ने मुख्यमंत्री माणिक साहा के इस्तीफे की माँग की है और आरोप लगाया है कि सरकार डीजीपी की मौत से जुड़े तथ्यों को छिपा रही है। विपक्ष चाहता है कि सरकार सदन में विस्तृत और पारदर्शी बयान दे।
मानसून सत्र में अब तक क्या हुआ है?
त्रिपुरा विधानसभा के मानसून सत्र के तीनों दिन डीजीपी अनुराग की मौत के मुद्दे पर हंगामा हुआ है। मुख्यमंत्री माणिक साहा पहले और दूसरे दिन सदन में बयान दे चुके हैं, लेकिन विपक्ष उनसे संतुष्ट नहीं है और विरोध जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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