त्रिपुरा विधानसभा में डीजीपी अनुराग की मौत पर दूसरे दिन भी हंगामा, विपक्ष ने न्यायिक जांच की माँग दोहराई
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा विधानसभा में शुक्रवार, 28 अगस्त को लगातार दूसरे दिन राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग की रहस्यमय मौत को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। 20 जुलाई को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय के उनके आधिकारिक कक्ष से सटे शौचालय में उनका शव मिला था, और तब से यह मामला राज्य की राजनीति का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सदन में बयान दिया कि मृत्यु का कारण आत्महत्या प्रतीत होता है, जबकि विपक्ष ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच की माँग की।
सदन में हंगामा और वेल में प्रवेश
विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी के नेतृत्व में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई (एम) के विधायक सदन के वेल में घुस गए और सरकार के विरुद्ध नारे लगाए। अध्यक्ष राम पाडा जमातिया के बार-बार अनुरोध और मुख्यमंत्री की बयान देने की सहमति के बाद वामपंथी विधायक अपनी सीटों पर लौटे। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि त्रिपुरा विधानसभा की कार्य प्रक्रिया एवं संचालन नियमों के नियम 361 के तहत दिए गए बयान पर उसी समय तत्काल बहस या चर्चा की अनुमति नहीं होती।
मुख्यमंत्री का बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट विवाद
गृह मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री साहा ने सदन को बताया कि डीजीपी अनुराग का शव 20 जुलाई को पुलिस मुख्यालय के उनके कक्ष से लगे शौचालय में लटका हुआ मिला था और मृत्यु का कारण आत्महत्या प्रतीत होता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक न किए जाने के विपक्ष के आरोपों के जवाब में उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 194 के तहत वे जनता और पारदर्शिता के हित में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला दे सकते हैं।
विपक्ष के आरोप और न्यायिक जांच की माँग
विपक्ष के नेता चौधरी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता तथा पूर्व मंत्री सुदीप रॉय बर्मन ने अलग-अलग कहा कि पुलिस मुख्यालय में अपने आधिकारिक कक्ष में एक सेवारत राज्य पुलिस प्रमुख की मृत्यु भारत में अभूतपूर्व है। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल विपक्ष को सदन में इस मामले पर खुलकर चर्चा करने से रोक रहा है। सीपीआई (एम) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) दोनों ने त्रिपुरा उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच की माँग दोहराई।
जांच की स्थिति और अब तक के कदम
मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को मानसून सत्र के पहले दिन बताया था कि राज्य पुलिस ने इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था) मंचक इप्पर इस जांच की निगरानी कर रहे हैं। जांच दल दिल्ली का दौरा भी कर चुका है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य, डिजिटल डेटा, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जाँच की जा रही है।
20 जुलाई की घटना के बाद कार्यवाहक डीजीपी जीएस राव ने 24 जुलाई को पश्चिम त्रिपुरा जिले के पुलिस अधीक्षक नमित पाठक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी, जिसे बाद में 10 सदस्यों तक विस्तारित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को भी इस मामले में अवैध कृत्य करते पाया गया, तो कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कौन थे डीजीपी अनुराग
डीजीपी अनुराग ने 17 मई 2025 को त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक का पदभार संभाला था। इससे पहले वे राज्य में पुलिस महानिदेशक (खुफिया) के पद पर कार्यरत थे। उनकी मृत्यु को लेकर जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।