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त्रिपुरा DGP अनुराग की रहस्यमय मौत: कांग्रेस ने हाई कोर्ट निगरानी में न्यायिक जांच की मांग दोहराई

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त्रिपुरा DGP अनुराग की रहस्यमय मौत: कांग्रेस ने हाई कोर्ट निगरानी में न्यायिक जांच की मांग दोहराई

सारांश

त्रिपुरा के सेवारत DGP अनुराग का शव 20 जुलाई को पुलिस मुख्यालय के वॉशरूम में मिला था। कांग्रेस इसे हत्या की साजिश बता रही है और हाई कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग कर रही है। राज्य सरकार ने पुलिस टीम बनाई है, लेकिन न्यायिक जांच से इनकार पर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य बातें

त्रिपुरा के सेवारत DGP अनुराग का शव 20 जुलाई 2026 को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय के वॉशरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला।
कांग्रेस नेता सुदीप रॉय बर्मन ने 27 जुलाई को त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग दोहराई।
त्रिपुरा पुलिस ने 24 जुलाई को एसपी नमित पाठक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया।
कांग्रेस ने मौत को 'महज आत्महत्या नहीं, बल्कि गहरी साजिश' बताया और इसे हत्या का मामला करार दिया।
मुख्यमंत्री माणिक साहा की सरकार पर आरोप — न्यायिक जांच से बचकर सच्चाई दबाने की कोशिश।
कांग्रेस ने त्रिपुरा उच्च न्यायालय से मामले का स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया।

कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य और त्रिपुरा के पूर्व मंत्री सुदीप रॉय बर्मन ने 27 जुलाई को एक बार फिर मांग की कि सेवारत पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग की 'रहस्यमय' मौत की जांच त्रिपुरा उच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। 20 जुलाई को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय के वॉशरूम में डीजीपी अनुराग का शव मिलने के बाद से यह मामला गहरे विवाद में है।

मुख्य घटनाक्रम

त्रिपुरा कैडर के 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी अनुराग का शव 20 जुलाई को उनके आधिकारिक कक्ष से सटे वॉशरूम में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। इसके बाद 24 जुलाई को त्रिपुरा पुलिस ने पश्चिम त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक नमित पाठक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया। हालांकि, कांग्रेस इस आंतरिक पुलिस जांच को अपर्याप्त मानती है और उच्च न्यायालय की निगरानी की माँग पर अड़ी है।

कांग्रेस की दलीलें

रॉय बर्मन ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच का आदेश देने में क्या समस्या है? अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे ऐसी जांच का आदेश देने में संकोच नहीं करना चाहिए।' उन्होंने मौत को 'महज आत्महत्या नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश' बताया और कहा कि उनकी पार्टी इसे हत्या का मामला मानती है।

इस प्रेस वार्ता में त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आशीष कुमार साहा और वरिष्ठ नेता प्रशांत सेन चौधरी भी उपस्थित थे। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार मौत से जुड़े वास्तविक तथ्यों और परिस्थितियों को दबाने के लिए न्यायिक जांच का आदेश देने से बच रही है।

सरकार पर सवाल

रॉय बर्मन ने मुख्यमंत्री माणिक साहा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि इतने गंभीर मामले को दबाने की कोशिश की गई, तो सरकार की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता, पुलिसकर्मी और अन्य सरकारी अधिकारी सभी सच जानना चाहते हैं। उन्होंने त्रिपुरा उच्च न्यायालय से इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने का भी आग्रह किया।

आम जनता पर असर

डीजीपी अनुराग को रॉय बर्मन ने 'राज्य के सबसे वरिष्ठ, ईमानदार, निष्ठावान, समर्पित और ऊर्जावान पुलिस अधिकारी' बताया। उनके अनुसार, यह मामला केवल त्रिपुरा तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि एक सेवारत पुलिस प्रमुख की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत पुलिस बल के मनोबल और व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

क्या होगा आगे

फिलहाल पश्चिम त्रिपुरा के एसपी नमित पाठक की अगुवाई में गठित तीन सदस्यीय पुलिस टीम जांच जारी रखे हुए है। कांग्रेस का दबाव बना रहा तो यह देखना होगा कि त्रिपुरा उच्च न्यायालय स्वतः संज्ञान लेता है या नहीं। राज्य सरकार ने अब तक न्यायिक जांच के आदेश पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संस्थागत संकट का संकेत है। सवाल यह नहीं कि जांच हो या नहीं, सवाल यह है कि आंतरिक पुलिस टीम से निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे रखी जाए जब जांच का विषय खुद पुलिस तंत्र के शीर्ष पर बैठे अधिकारी की मौत हो। उच्च न्यायालय का स्वतः संज्ञान न लेना भी उतना ही उल्लेखनीय है। यह मामला त्रिपुरा की सीमाओं से बाहर एक बड़े सवाल को जन्म देता है — क्या भारत में पुलिस संस्था के भीतर होने वाली संदिग्ध मौतें पर्याप्त जवाबदेही सुनिश्चित कर पाती हैं?
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा DGP अनुराग की मौत कब और कहाँ हुई?
DGP अनुराग का शव 20 जुलाई 2026 को अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में उनके आधिकारिक कक्ष से सटे वॉशरूम में रहस्यमय परिस्थितियों में मिला था। वे त्रिपुरा कैडर के 1994 बैच के IPS अधिकारी थे।
कांग्रेस न्यायिक जांच की मांग क्यों कर रही है?
कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार मौत के वास्तविक तथ्यों को दबाने के लिए हाई कोर्ट की निगरानी में जांच से बच रही है। पार्टी इसे हत्या का मामला मानती है और कहती है कि आंतरिक पुलिस जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती।
त्रिपुरा सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
24 जुलाई को त्रिपुरा पुलिस ने पश्चिम त्रिपुरा के एसपी नमित पाठक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच के लिए अब तक कोई आदेश नहीं दिया है।
इस मामले में कांग्रेस के कौन-से नेता शामिल हैं?
CWC सदस्य और पूर्व मंत्री सुदीप रॉय बर्मन इस माँग का नेतृत्व कर रहे हैं। त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आशीष कुमार साहा और वरिष्ठ नेता प्रशांत सेन चौधरी भी इस प्रेस वार्ता में उपस्थित थे।
क्या त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है?
अब तक त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने इस मामले में स्वतः संज्ञान नहीं लिया है। कांग्रेस नेता रॉय बर्मन ने न्यायालय से आग्रह किया है कि वह इस गंभीर मामले का संज्ञान ले, जैसा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अपेक्षित होता है।
राष्ट्र प्रेस
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