डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: यूएई के रास्ते आए पाकिस्तान के 362 टन सूखे खजूर जब्त, 'ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट' में नकेल
सारांश
मुख्य बातें
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने 14 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रवर्तन कार्रवाई के तहत पाकिस्तान मूल के 362 मीट्रिक टन से अधिक सूखे खजूर जब्त किए हैं। कथित तौर पर इस माल को पाकिस्तान पर लागू आयात प्रतिबंध से बचने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के रास्ते एक सुनियोजित ट्रांसशिपमेंट व्यवस्था के जरिए भारत भेजा गया था। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को इस कार्रवाई की जानकारी दी।
कैसे हुई जब्ती और कहाँ से मिली थी सूचना
विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर डीआरआई के अधिकारियों ने नासिक के अंबाड कंटेनर फ्रेट स्टेशन (सीएफएस) में मुंबई स्थित एक कंपनी द्वारा आयातित सूखे खजूरों से भरे 13 कंटेनरों को रोका। ये कंटेनर यूएई के जेबेल अली बंदरगाह से भारत पहुँचे थे, और आयात दस्तावेजों में यूएई को ही माल का मूल देश दर्शाया गया था।
प्रारंभिक जाँच में सामने आया कि सूखे खजूरों को पहले पाकिस्तान के कराची बंदरगाह से जहाज के जरिए जेबेल अली भेजा गया, जहाँ माल को नए कंटेनरों में स्थानांतरित कर एक अन्य जहाज से भारत रवाना किया गया। एजेंसी के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया को कथित तौर पर पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा संचालित संस्थाओं की मदद से अंजाम दिया गया।
प्रतिबंध की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से उत्पन्न या वहाँ से निर्यात किए गए माल के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात तथा ट्रांजिट पर प्रतिबंध लगाया था। यह प्रतिबंध 2 मई 2025 से डीजीएफटी अधिसूचना के तहत लागू हुआ था और इसके दायरे में सीधे आयात के साथ-साथ तीसरे देशों के माध्यम से भेजे गए माल को भी शामिल किया गया है।
यह ऐसे समय में एक महत्वपूर्ण संकेत है जब भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापारिक और राजनयिक तनाव का वातावरण बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि ट्रांसशिपमेंट के जरिए प्रतिबंधों को दरकिनार करने के प्रयास आयात निगरानी तंत्र की खामियों का फायदा उठाते हैं।
'ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट' क्या है
डीआरआई के 'ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट' का उद्देश्य उन पाकिस्तान मूल के सामानों की पहचान और रोकथाम करना है, जिन्हें आयात प्रतिबंधों से बचने के लिए तीसरे देशों के जरिए भारत भेजा जा रहा है। इस अभियान के तहत एजेंसी गलत घोषणा, ट्रांसशिपमेंट और आयात दस्तावेजों में हेरफेर करने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़ करने में जुटी है।
ताजा जब्ती यह रेखांकित करती है कि ये नेटवर्क कथित तौर पर संगठित और सुनियोजित तरीके से काम करते हैं, जहाँ मूल देश की पहचान बदलने के लिए बहु-स्तरीय ट्रांसशिपमेंट का उपयोग किया जाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला पर असर
डीआरआई ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की प्रवर्तन कार्रवाइयों का मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करना और भारत की आपूर्ति श्रृंखलाओं में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ऐसे नेटवर्क अनियंत्रित रहें, तो न केवल व्यापार नीति बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
आगे की जाँच के नतीजे यह तय करेंगे कि इस मामले में संलिप्त कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई होगी। डीआरआई के अनुसार, इस नेटवर्क की जड़ें और गहराई से उजागर करने की प्रक्रिया जारी है।