पाकिस्तान का व्यापार घाटा 22% बढ़कर $39.5 अरब, निर्यात 6% घटा — PBS आंकड़े
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (PBS) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में समाप्त हुए वित्त वर्ष में पाकिस्तान का व्यापार घाटा 22 प्रतिशत उछलकर 39.5 अरब डॉलर पर पहुँच गया। आयात पर अत्यधिक निर्भरता और आर्थिक मंदी की मार से निर्यात में आई गिरावट इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह बताई जा रही है।
मुख्य आंकड़े
PBS के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का आयात 8 प्रतिशत बढ़कर 69.6 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 6 प्रतिशत घटकर 30.1 अरब डॉलर रह गया। माह-दर-माह आधार पर देखें तो जून में व्यापार घाटा 57 प्रतिशत उछलकर 4.53 अरब डॉलर हो गया — निर्यात 10 प्रतिशत गिरकर 2.24 अरब डॉलर पर आया, जबकि आयात 26 प्रतिशत बढ़कर 6.77 अरब डॉलर दर्ज हुआ।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
जेएस ग्लोबल कैपिटल लिमिटेड के रिसर्च हेड मुहम्मद वकास गनी ने कहा, 'पाकिस्तान का व्यापार घाटा संरचनात्मक है क्योंकि अर्थव्यवस्था काफी हद तक आयातित ऊर्जा, मशीनरी और औद्योगिक कच्चे माल पर निर्भर है, जबकि निर्यात मुख्य रूप से टेक्सटाइल जैसे कम वैल्यू-एडेड उत्पादों तक ही सीमित है।' उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे घरेलू मांग और विकास में सुधार हो रहा है, निर्यात की तुलना में आयात कहीं अधिक तेज़ गति से बढ़ रहा है।
टेक्सटाइल क्षेत्र की स्थिति
'ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन' (APTMA) के आंकड़ों के अनुसार, टेक्सटाइल क्षेत्र पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बना हुआ है। इसने पिछले वित्त वर्ष में 17.97 अरब डॉलर की कमाई की, जो उससे एक साल पहले के 17.91 अरब डॉलर से मात्र 0.34 प्रतिशत अधिक है — यानी निर्यात वृद्धि लगभग ठहरी हुई है।
केंद्रीय बैंक और उद्योग जगत की चिंता
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के गवर्नर जमील अहमद ने कराची में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान व्यापार घाटे को 'चिंता का विषय' बताया। फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FPCCI) के अध्यक्ष आतिफ इकराम शेख ने कहा, 'गिरते निर्यात का असर देश के बाह्य खाते की स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है। यह साफ संकेत है कि निर्यात केंद्रित उद्योगों को बेहद मुश्किल हालात में धकेला जा रहा है।'
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रम के तहत राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि जब तक निर्यात संरचना में उच्च-मूल्य उत्पादों की हिस्सेदारी नहीं बढ़ती, व्यापार घाटे में स्थायी सुधार संभव नहीं दिखता।