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क्या पाकिस्तान की सरकारी कंपनियां घाटे में जा रही हैं, आर्थिक संकट और गहराया?

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क्या पाकिस्तान की सरकारी कंपनियां घाटे में जा रही हैं, आर्थिक संकट और गहराया?

सारांश

पाकिस्तान की सरकारी कंपनियों में बढ़ता घाटा और आर्थिक संकट की गंभीरता को दर्शाती एक नई रिपोर्ट। जानें कैसे ये आंकड़े आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं और देश की आर्थिक स्थिरता पर क्या असर डाल रहे हैं।

मुख्य बातें

सरकारी कंपनियों का शुद्ध घाटा 300% बढ़ा है।
सरकार की मदद 2.1 ट्रिलियन रुपये तक पहुँच गई है।
आर्थिक संकट के कारण गरीबी में वृद्धि हुई है।
बचत में 66% की गिरावट आई है।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च में 19% की कमी आई है।

नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और गंभीर आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान की सरकारी कंपनियां लगातार घाटे में चल रही हैं। एक नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों का शुद्ध घाटा 300 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जबकि करदाताओं के पैसों से मिलने वाली सरकारी मदद 2.1 ट्रिलियन रुपये (स्थानीय मुद्रा) तक पहुँच गई है।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के एक संपादकीय में यह कहा गया है कि “आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं।” रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में सरकारी कंपनियों का कुल राजस्व 1.4 ट्रिलियन रुपये घटकर 12.4 ट्रिलियन रुपये रह गया, जबकि कुल शुद्ध घाटा बढ़कर 122.9 अरब रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष 30.6 अरब रुपये था।

संपादकीय में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की वित्तीय बदहाली की गहराई को अगर किसी एक पैमाने से समझा जा सकता है, तो वह सरकारी कंपनियों का प्रदर्शन है। रिपोर्ट में इसे “भयानक संरचनात्मक विफलता” करार दिया गया है, जो लगातार सार्वजनिक संसाधनों को चूस रही है और आर्थिक स्थिरता को कमजोर कर रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (नेशनल हाईवे अथॉरिटी) और बिजली वितरण कंपनियां अब भी भारी घाटे में हैं। संपादकीय के अनुसार, ये संस्थाएं लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक खामियों और परिचालन अक्षमताओं से जूझ रही हैं, जिन पर चर्चा तो बार-बार होती है, लेकिन ठोस सुधार के प्रयास नहीं किए जाते।

इस बीच, पाकिस्तान सरकार ऐसे ‘पेपर ग्रोथ’ वाले क्षेत्रों को बढ़ावा दे रही है, जिनसे कागजी तौर पर जीडीपी में बढ़ोतरी तो दिखती है, लेकिन वास्तविक व्यावसायिक निवेश को प्रोत्साहन नहीं मिलता। रियल एस्टेट इसका बड़ा उदाहरण है, जहां अमीर वर्ग अपनी संपत्ति पार्क कर उसे बढ़ाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2019 के बाद से पाकिस्तान के सबसे गरीब 20 प्रतिशत परिवारों की वास्तविक मासिक आय में करीब 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके उलट, सबसे अमीर वर्ग की आय में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब देश की अर्थव्यवस्था गिरावट के दौर से गुजर रही थी, सार्वजनिक क्षेत्र के बाहर औसत वेतन घट रहा था और गरीबी तेजी से बढ़ी थी।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आम लोगों की बचत लगभग खत्म हो चुकी है। कुल मिलाकर बचत में 66 प्रतिशत की गिरावट आई है, क्योंकि परिवार रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए अपनी जमा पूंजी खर्च करने को मजबूर हैं। इसका असर स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी पड़ा है, जहां खर्च में 19 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति देश के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान की सरकारी कंपनियों का प्रदर्शन देश की आर्थिक स्थिरता के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। अगर जल्द ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इससे देश के भविष्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान की सरकारी कंपनियों का घाटा क्यों बढ़ रहा है?
राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और संरचनात्मक विफलताएँ इसके प्रमुख कारण हैं।
सरकारी मदद कितनी बढ़ गई है?
सरकारी मदद 2.1 ट्रिलियन रुपये तक पहुँच गई है।
सबसे गरीब परिवारों की आय में क्या बदलाव आया है?
सबसे गरीब 20 प्रतिशत परिवारों की वास्तविक मासिक आय में 12 प्रतिशत की गिरावट आई है।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर क्या असर पड़ रहा है?
आर्थिक संकट के कारण स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च में भारी गिरावट आई है।
कैसे सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं?
सरकारी कंपनियों में सुधार और पारदर्शिता लाने की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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