क्या पाकिस्तान का टेक्सटाइल सेक्टर बर्बाद होने की कगार पर है, और क्या सरकार से बेलआउट की उम्मीद?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान का टेक्सटाइल सेक्टर संकट में है।
- फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं और नौकरियां जा रही हैं।
- सरकार को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।
- टेक्सटाइल सेक्टर अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने से नुकसान हो रहा है।
नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कंगाल पाकिस्तान का टेक्सटाइल सेक्टर संकट के कगार पर खड़ा है। मजदूरों को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया तेजी से बढ़ रही है, और फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। यह टेक्सटाइल सेक्टर पाकिस्तान के एक्सपोर्ट और औद्योगिक रोजगार की रीढ़ है।
पाकिस्तान के बिजनेस रिकॉर्डर की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान टेक्सटाइल काउंसिल ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक पत्र भेजा है। इस पत्र में काउंसिल ने सरकार से एक्सपोर्ट इमरजेंसी की घोषणा करने की मांग की है, ताकि प्रतिस्पर्धा में आ रही कमी को रोका जा सके, जिससे एक्सपोर्ट, नौकरियों और अर्थव्यवस्था की स्थिरता को खतरा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह चेतावनी पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गई है। नवंबर 2025 में पाकिस्तान के निर्यात में साल-दर-साल 14 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई, जो लगातार चौथे महीने गिरावट का संकेत है। वित्तीय वर्ष के पहले पांच महीनों में एक्सपोर्ट पिछले वर्ष के 13.7 अरब डॉलर से घटकर 12.8 अरब डॉलर रह गया, जबकि इसी अवधि में आयात 28 अरब डॉलर के पार पहुँच गया।
इस असंतुलन के कारण मात्र पांच महीनों में लगभग 15.5 अरब डॉलर का व्यापार घाटा उत्पन्न हुआ है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक खतरनाक संकेत है। अकेले नवंबर में व्यापार घाटा 2.86 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो एक वर्ष पूर्व की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक है। ये आंकड़े पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर बढ़ते दबाव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
रिपोर्ट में इस संकट की मुख्य वजह पाकिस्तान के टेक्सटाइल सेक्टर की कमजोर लागत संरचना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाना बताया गया है। इसमें कहा गया है कि ऊर्जा कीमतों में भारी अंतर, टैक्स सिस्टम में समानता की कमी, रिफंड में देरी और नीतियों के प्रति अनिश्चितता—इन सभी कारकों ने कंपनियों के मार्जिन को ऐसे स्तर तक दबा दिया है जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।
इसके विपरीत, बांग्लादेश, वियतनाम, भारत और यहां तक कि श्रीलंका जैसे देशों के टेक्सटाइल निर्यातक कम ऊर्जा टैरिफ, स्थिर और पूर्वानुमेय कर व्यवस्था और लक्षित एक्सपोर्ट सपोर्ट के साथ काम कर रहे हैं, जिससे वे वैश्विक बाजार में पाकिस्तान पर बढ़त बनाए हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि टेक्सटाइल सेक्टर पाकिस्तान के कुल एक्सपोर्ट का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है और लाखों लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से रोजगार देता है। टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में हर प्रतिशत की गिरावट का कई गुना असर होता है। इसमें फॉरेन एक्सचेंज से होने वाली कमाई में कमी, रुपया की कमजोरी, महंगाई का दबाव बढ़ना और फिस्कल स्ट्रेस बढ़ना शामिल है। इस मामले में, एक्सपोर्ट में मंदी केवल एक सेक्टर का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय आर्थिक जोखिम है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की हाल की आर्थिक स्थिरता की कोशिशों में अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाने के लिए डिमांड में कमी और फिस्कल सख्ती को प्राथमिकता दी गई है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता मुख्य रूप से आईएमएफ की शर्तों पर निर्भर है।
हालांकि, 240 मिलियन से अधिक लोगों की अर्थव्यवस्था खुद को खुशहाली में स्थिर नहीं कर सकती। एक्सपोर्ट कोई लग्जरी नहीं है, बार-बार आने वाले संकटों से उबरने का यही एकमात्र टिकाऊ तरीका है, ऐसा इसमें कहा गया है।