क्या पाकिस्तान में आर्थिक संकट के बीच निर्यात में गिरावट जारी रहेगी?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान का निर्यात लगातार गिर रहा है।
- आर्थक संकट के कई कारण हैं, जैसे सीमा तनाव।
- आयात में वृद्धि जारी है।
- ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 19.2 बिलियन डॉलर हो गया है।
- पाकिस्तान को आर्थिक स्थिरता के लिए नई नीतियों की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कंगाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में पाकिस्तान का निर्यात 20.4 फीसदी की गिरावट के साथ गिर चुका है। यह लगातार पांचवे महीने पाकिस्तान के निर्यात में गिरावट का संकेत है।
पाकिस्तान की आर्थक स्थिति में गिरावट के कई कारण हैं। पड़ोसी देशों के साथ सीमा पर तनाव के चलते व्यापार के लिए बॉर्डर बंद होने को एक कारण माना जा सकता है। चाहे भारत हो या अफगानिस्तान, पाकिस्तान के दोनों देशों के साथ सीमा पर तनाव है। चीन पर निर्भरता ने पाकिस्तान के लिए व्यापार को और महंगा बना दिया है।
द मालदीव इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक्सपोर्ट दिसंबर 2024 में लगभग 2.91 बिलियन डॉलर से घटकर 2.32 बिलियन डॉलर पर आ गया। दूसरी ओर, आयात में वृद्धि जारी है, जो लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 6.02 बिलियन डॉलर हो गया। इससे महीने का ट्रेड डेफिसिट लगभग 24 प्रतिशत बढ़कर 3.7 बिलियन डॉलर हो गया।
निर्यात में कमी गहरी संरचनात्मक समस्याओं का संकेत देती है, जैसे कि उत्पादों में कम विविधता, प्रतिस्पर्धात्मकता की कमी और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में सही एकीकरण का अभाव। निर्यात में गिरावट का मतलब है कि विदेशों में बिक्री से विदेशी मुद्रा उत्पन्न करने में लंबे समय से नाकामी
पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 (जुलाई-दिसंबर) के पहले छह महीनों में निर्यात से होने वाली आय लगभग 8.7 प्रतिशत घटकर 15.18 बिलियन डॉलर हो गई, जबकि आयात 11.3 प्रतिशत बढ़कर 34.39 बिलियन डॉलर हो गया।
इस समय तक ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 19.2 बिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 35 प्रतिशत अधिक है। दशकों के डेटा के अनुसार, पाकिस्तान का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट एक छोटी रेंज में ही रहा है और बढ़ती आयात मांग या क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के साथ तालमेल नहीं बैठा सका है।
हाल के वर्षों में, पाकिस्तान की सरकारों ने आर्थक स्थिरता और पेमेंट बैलेंस को सपोर्ट करने के लिए विदेशी आधिकारिक धन, विदेशी श्रमिकों द्वारा भेजे गए पैसे और कभी-कभी वित्तीय ऋण पर अत्यधिक निर्भरता दिखाई है।
हालांकि, इन उपायों ने निर्यात के आंतरिक कमजोरियों को छिपा दिया है। दिसंबर के आंकड़ों के अनुसार, यह कमजोरी अब ठोस आर्थिक दबाव में बदल रही है। निर्यात में तेज गिरावट और आयात में बढ़ोतरी से पाकिस्तान के ट्रेड बैलेंस पर दबाव बढ़ गया है।