10 अक्टूबर 2026
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चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: एक मतदाता अब अधिकतम 10 फॉर्म-7 आपत्तियाँ ही दाखिल कर सकेगा

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चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: एक मतदाता अब अधिकतम 10 फॉर्म-7 आपत्तियाँ ही दाखिल कर सकेगा

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने फॉर्म-7 पर थोक आपत्तियों पर लगाम लगाई — अब एक मतदाता पूरी अवधि में अधिकतम 10 और प्रति माह सिर्फ 5 आवेदन कर सकेगा। झूठी शिकायत पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कार्रवाई होगी।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 को फॉर्म-7 पर थोक आपत्तियों को सीमित करने का आदेश जारी किया।
दावे-आपत्तियों की पूरी अवधि में एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 दाखिल कर सकेगा; निरंतर अद्यतन में यह सीमा प्रति माह 5 है।
यह नियम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों पर समान रूप से लागू होगा।
मान्यता प्राप्त दलों के BLA के लिए ड्राफ्ट प्रकाशन से पहले 50 और बाद में 10 फॉर्म प्रतिदिन की सीमा।
झूठी शिकायत पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई होगी।
फॉर्म-7 पर मूल हस्ताक्षर अनिवार्य; मोहर मान्य नहीं।

भारत निर्वाचन आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए दायर किए जाने वाले फॉर्म-7 पर थोक आपत्तियों को सीमित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। आयोग ने आदेश दिया है कि दावों और आपत्तियों की पूरी अवधि के दौरान कोई एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही दाखिल कर सकेगा, और निरंतर अद्यतन के दौरान यह सीमा प्रति माह 5 आवेदन होगी। यह नियम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों पर समान रूप से लागू होगा।

फैसले की पृष्ठभूमि

आयोग ने अपने आदेश में स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में उसके संज्ञान में ऐसे मामले आए हैं जहाँ व्यक्तिगत मतदाताओं द्वारा बिना ठोस आधार के थोक में फॉर्म-7 के तहत आपत्तियाँ दर्ज की जा रही थीं। इससे जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्ति की गई, उन्हें अनावश्यक असुविधा हो रही थी और फील्ड स्तर के अधिकारियों पर कार्यभार भी असंगत रूप से बढ़ रहा था। यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर विभिन्न राज्यों में विवाद उठते रहे हैं।

मौजूदा नियमों की स्थिति

निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के नियम 13(2) के तहत फॉर्म-7 केवल वही व्यक्ति दाखिल कर सकता है जिसका नाम उसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हो। मतदाता सूची मैनुअल 2023 में भी पहले से यह प्रावधान था कि थोक में दाखिल दावे-आपत्तियाँ — डाक से भेजे गए आवेदन सहित — स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। गौरतलब है कि यदि एक ही व्यक्ति 5 से अधिक मामलों में आपत्तिकर्ता बनता है, तो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) को व्यक्तिगत रूप से क्रॉस-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है।

ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन — पहले की खामी

आयोग ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन माध्यम में एक व्यक्ति एक बार में केवल 6 आवेदन ही कर सकता था, परंतु भौतिक (फिजिकल) फॉर्म की संख्या निर्धारित नहीं थी — यह पूरी तरह ERO के विवेक पर छोड़ा गया था। इसी असंगति का दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा था। नए आदेश से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों के लिए एक समान सीमा लागू हो गई है।

राजनीतिक दलों के BLA के लिए प्रावधान

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR (Special Summary Revision) अवधि के दौरान मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) को थोक में आवेदन देने की अनुमति है, किंतु उनके लिए भी सीमाएँ तय हैं। BLA ड्राफ्ट प्रकाशन से पहले एक दिन में BLO को 50 से अधिक फॉर्म और उसके बाद 10 से अधिक फॉर्म जमा नहीं कर सकता।

झूठी शिकायत पर कड़ी कार्रवाई

आयोग ने चेतावनी दी है कि अधूरे या निर्धारित प्रारूप में न भरे गए आवेदनों को नियम 17 के तहत ERO सीधे खारिज कर देगा। फॉर्म-7 पर आपत्तिकर्ता के मूल हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे — मोहर मान्य नहीं होगी। यदि शिकायत झूठी या मनगढ़ंत पाई गई तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत संबंधित आवेदक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।

यह फैसला मतदाता सूची की विश्वसनीयता को मजबूत करने और वास्तविक मतदाताओं को मनमाने तरीके से सूची से हटाए जाने से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसका उपयोग नगण्य रहा है; बिना प्रभावी अभियोजन के यह नई सीमा भी कागज़ी रह सकती है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत निर्वाचन आयोग का फॉर्म-7 पर नया नियम क्या है?
आयोग ने आदेश दिया है कि दावे-आपत्तियों की पूरी अवधि के दौरान कोई एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 दाखिल कर सकेगा, और मतदाता सूचियों के निरंतर अद्यतन के दौरान यह सीमा प्रति माह 5 आवेदन होगी। यह नियम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों पर लागू है।
फॉर्म-7 क्या होता है और इसका उपयोग कब किया जाता है?
फॉर्म-7 वह दस्तावेज़ है जिसके माध्यम से कोई मतदाता किसी अन्य व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति कर सकता है या उसका नाम हटाने का आवेदन कर सकता है। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के नियम 13(2) के तहत यह आवेदन केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसका नाम उसी निर्वाचन क्षेत्र की सूची में दर्ज हो।
राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) के लिए क्या नियम हैं?
SIR अवधि के दौरान मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के BLA को थोक में आवेदन देने की अनुमति है, लेकिन ड्राफ्ट प्रकाशन से पहले एक दिन में BLO को 50 से अधिक फॉर्म और उसके बाद 10 से अधिक फॉर्म जमा करने पर रोक है।
झूठी या मनगढ़ंत आपत्ति दाखिल करने पर क्या होगा?
यदि शिकायत झूठी या मनगढ़ंत पाई गई तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत संबंधित आवेदक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, फॉर्म-7 पर मूल हस्ताक्षर अनिवार्य हैं और अधूरे या निर्धारित प्रारूप में न भरे गए आवेदनों को ERO सीधे खारिज कर देगा।
यह नया आदेश किन अधिकारियों पर लागू होता है?
भारत निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) इस आदेश को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए जिम्मेदार होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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