क्या बिहार एसआईआर में 26 दिन में केवल एक पार्टी ने उठाई आपत्ति?

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क्या बिहार एसआईआर में 26 दिन में केवल एक पार्टी ने उठाई आपत्ति?

सारांश

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदान प्रक्रिया में केवल एक पार्टी ने आपत्ति उठाई है। क्या यह राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव का संकेत है? इसका विस्तृत विश्लेषण जानने के लिए पढ़ें।

मुख्य बातें

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है।
26 दिन में केवल एक पार्टी ने आपत्ति उठाई है।
नए मतदाताओं से कई आवेदन प्राप्त हुए हैं।
आपत्तियों का निपटारा 7 दिन के भीतर किया जाएगा।
सभी दावे और आपत्तियां उचित प्रक्रिया के तहत ही निपटारी की जाएंगी।

नई दिल्ली, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के लिए दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया से संबंधित दैनिक बुलेटिन जारी किया है। ईसीआई ने जानकारी दी है कि 26 दिनकम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) (लिबरेशन) की तरफ से 10 आपत्तियां प्राप्त हुई हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार, 1 अगस्त 2025 (दोपहर 3 बजे) से 26 अगस्त (सुबह 10 बजे) तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए अब केवल 6 दिन शेष हैं। इन 26 दिनों में केवल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) (लिबरेशन) की तरफ से आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जिनका निपटारा 7 दिन में किया जाएगा।

ईसीआई ने बताया कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नए मतदाताओं से फॉर्म 6 (घोषणा-पत्र सहित) के अंतर्गत कुल 4,33,214 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनका निस्तारण अभी बाकी है। इसके साथ ही, योग्य मतदाताओं को शामिल करने और अयोग्य मतदाताओं को हटाने के लिए ईआरओ द्वारा अब तक कोई दावा या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है।

इसके अतिरिक्त, मतदाताओं से सीधे प्राप्त दावों और आपत्तियों की संख्या 1,62,453 है, जिनमें से 17,516 का निस्तारण 7 दिनों के बाद किया गया है।

नियमों के अनुसार, दावों और आपत्तियों का निस्तारण संबंधित ईआरओ या एआरओ द्वारा पात्रता सत्यापन और 7 दिन की नोटिस अवधि पूर्ण होने के बाद ही किया जाएगा।

1 अगस्त 2025 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची से किसी भी नाम को बिना जांच और उचित अवसर दिए हटाया नहीं जा सकता। इसके लिए स्पष्ट आदेश पारित करना अनिवार्य है। प्रारूप मतदाता सूची में शामिल न किए गए नामों की सूची (कारण सहित) जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ/डीएम) और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट पर ईपीआईसी नंबर के साथ खोज योग्य रूप में उपलब्ध है। असंतुष्ट व्यक्ति आधार कार्ड की प्रति के साथ अपने दावे प्रस्तुत कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार एसआईआर का उद्देश्य क्या है?
बिहार एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची में नाम जोड़ना और हटाना है ताकि चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और योग्य मतदाताओं के लिए सुनिश्चित किया जा सके।
आपत्तियों का निपटारा कैसे किया जाएगा?
आपत्तियों का निपटारा संबंधित ईआरओ या एआरओ द्वारा पात्रता सत्यापन और नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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