यूरोप में जंगल की आग का खतरा: सदी के अंत तक 39% अधिक क्षेत्र जलने का अनुमान, नई स्टडी में चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
ग्लोबल चेंज बायोलॉजी जर्नल में 20 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार, वैश्विक तापमान वृद्धि को सीमित करने के सबसे अनुकूल परिदृश्य में भी सदी के अंत तक यूरोप में जंगल की आग से जलने वाला क्षेत्र करीब 39 प्रतिशत बढ़ सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब यूरोपीय संघ के कई देश पहले से ही इस वर्ष के अग्निकाल में भीषण आग की चपेट में हैं।
अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष
शोध के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान वृद्धि 1.8 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रहती है, तब भी गर्म और शुष्क मौसम की बढ़ती अवधि यूरोप के जंगलों को आग के प्रति कहीं अधिक संवेदनशील बना देगी। तापमान में वृद्धि के साथ मिट्टी और वनस्पतियों में नमी का स्तर गिरेगा, जबकि तेज़ हवाएँ आग को तेज़ी से फैलाने में सहायक बनेंगी।
सबसे गंभीर परिदृश्य और भी चिंताजनक है। यदि सदी के अंत तक वैश्विक तापमान वृद्धि 3.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचती है, तो यूरोप में जंगल की आग से जलने वाला क्षेत्र मौजूदा स्तर की तुलना में लगभग तीन गुना हो सकता है।
मौजूदा नीतियाँ और वास्तविक खतरा
शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान जलवायु नीतियों के आधार पर दुनिया करीब 2.6 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि की राह पर है। इस परिप्रेक्ष्य में जंगल की आग का बढ़ता खतरा यूरोप के लिए भविष्य की समस्या नहीं, बल्कि तत्काल ध्यान देने योग्य संकट बन चुका है।
गौरतलब है कि दशकों तक जंगलों में आग को पूरी तरह दबाने की नीतियों के कारण सूखी वनस्पति और अन्य ज्वलनशील सामग्री का जमाव होता रहा है। इससे अब कम संख्या में लगने वाली आग भी विशाल और विनाशकारी 'मेगा-फायर' का रूप ले सकती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
अध्ययन के प्रमुख लेखक और पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के शोधकर्ता माइक बिलिंग ने कहा कि बेहतर वन प्रबंधन और प्रभावी अग्निशमन व्यवस्था से आग से होने वाले नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊँचे कार्बन उत्सर्जन के बीच केवल अग्निशमन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा।
यूरोप में 2026 की स्थिति
2026 के अग्निकाल में यूरोपीय संघ में 6 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि आग की चपेट में आ चुकी है। ग्रीस, स्पेन, फ्रांस और क्रोएशिया समेत कई देशों में इस वर्ष के जंगल की आग ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
आगे का रास्ता
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस चुनौती से निपटने के लिए जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण और बेहतर वन प्रबंधन — दोनों पर एक साथ काम करना अनिवार्य है। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के साथ-साथ शुरुआती चेतावनी प्रणाली, सूखी वनस्पति का प्रबंधन और अग्निशमन क्षमता को मज़बूत करना इस दिशा में ज़रूरी कदम होंगे।