1 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र: आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए ₹25,000 करोड़ आवंटित, CM फडणवीस ने संसदीय संकुल परियोजना का किया उद्घाटन

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महाराष्ट्र: आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए ₹25,000 करोड़ आवंटित, CM फडणवीस ने संसदीय संकुल परियोजना का किया उद्घाटन

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने संसदीय संकुल विकास परियोजना के ज़रिए आदिवासी इलाकों के लिए ₹25,000 करोड़ का आवंटन किया है। CM फडणवीस का दावा है कि क्लस्टर-आधारित एकीकृत विकास मॉडल, केंद्र-राज्य योजनाओं के तालमेल और कड़ी निगरानी से पलायन रुकेगा और जीवन स्तर सुधरेगा — नंदुरबार में मिले नतीजे इसकी उम्मीद जगाते हैं।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 1 अक्टूबर 2026 को संसदीय संकुल विकास परियोजना का उद्घाटन करते हुए आदिवासी क्षेत्रों के लिए ₹25,000 करोड़ के आवंटन की घोषणा की।
परियोजना का मुख्य लक्ष्य रोज़गार सृजन, पलायन रोकथाम और आदिवासी समुदायों के जीवन स्तर में सुधार करना है।
अलग-अलग गाँवों के बजाय गाँवों के क्लस्टर बनाकर एकीकृत विकास की रणनीति अपनाई जाएगी।
नंदुरबार जिले में इस पहल के उत्साहजनक परिणाम — विशेषकर कृषि क्षेत्र में — सामने आए हैं।
केंद्र सरकार की दो आदिवासी विकास योजनाओं को राज्य की पहलों से जोड़कर लागू किया जाएगा।
आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री भारती पवार समारोह में उपस्थित रहे।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 1 अक्टूबर 2026 को मुंबई में घोषणा की कि राज्य सरकार ने संसदीय संकुल विकास परियोजना के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए ₹25,000 करोड़ का आवंटन किया है। इस पहल का उद्देश्य आदिवासी इलाकों में रोज़गार सृजन, पलायन रोकथाम और जीवन स्तर में सुधार लाना है। फडणवीस संसदीय संकुल विकास परियोजना के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

परियोजना की मुख्य विशेषताएँ

मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि इस पहल के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को एकीकृत रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अलग-अलग गाँवों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय गाँवों का समूह (क्लस्टर) बनाकर समग्र विकास की रणनीति अपनाई जाएगी, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत ऐसे कार्यक्रम चलाए जाएंगे जिनसे आदिवासी समुदायों के जीवन में स्पष्ट और मापनीय बदलाव आ सके। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर अपेक्षित परिणाम हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

नंदुरबार में उत्साहजनक परिणाम

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अवधारणा को पाँच से छह साल पहले प्रस्तावित किया गया था और अब इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से नंदुरबार जिले का उल्लेख किया, जहाँ इस पहल के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। फडणवीस के अनुसार, नंदुरबार में कृषि क्षेत्र को इससे विशेष लाभ मिला है और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार देखा जा रहा है।

केंद्र-राज्य समन्वय पर बल

फडणवीस ने बताया कि केंद्र सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों के लिए दो प्रमुख योजनाएँ बनाई हैं, जो इन इलाकों में विकास की गति को तेज़ कर रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल से न केवल धन का सदुपयोग होगा, बल्कि लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुँच भी सुनिश्चित होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल जिलों — जैसे नंदुरबार, गढ़चिरोली, पालघर और अमरावती — में पलायन और कुपोषण की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है।

सरकारी निगरानी और जवाबदेही

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचना चाहिए। इसके लिए योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रभावी एवं निरंतर निगरानी अनिवार्य बताई गई। उन्होंने संकेत दिया कि बिचौलियों की भूमिका को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया जाएगा।

समारोह में उपस्थित प्रमुख लोग

उद्घाटन समारोह में आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री भारती पवार, विधायक रविंद्र चव्हाण और योगेश सागर, कार्यान्वयन संस्था के गजानन डांगे तथा संसदीय संकुल परियोजना के समन्वयक वी. सतीश समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

आने वाले महीनों में इस परियोजना के क्रियान्वयन की समयसीमा और लक्ष्य-प्राप्ति के मापदंड स्पष्ट होने की उम्मीद है, जो इसकी वास्तविक सफलता की कसौटी बनेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का यह आवंटन महत्वाकांक्षी है, लेकिन महाराष्ट्र के आदिवासी जिलों में दशकों से चली आ रही कुपोषण, पलायन और योजनाओं की अधूरी पहुँच की समस्याएँ महज़ बजट से नहीं सुलझतीं। असली परीक्षा क्लस्टर मॉडल के क्रियान्वयन और निगरानी तंत्र की है — जिसका ब्यौरा अभी स्पष्ट नहीं है। नंदुरबार का उदाहरण उत्साहवर्धक है, किंतु यह एक जिले की सफलता से पूरे आदिवासी बेल्ट में परिणाम की गारंटी नहीं देता। केंद्र-राज्य योजनाओं के एकीकरण की बात पहले भी होती रही है — इस बार जवाबदेही का ढाँचा कितना मज़बूत होगा, यही इस योजना की विश्वसनीयता तय करेगा।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संसदीय संकुल विकास परियोजना क्या है?
संसदीय संकुल विकास परियोजना महाराष्ट्र सरकार की एक एकीकृत आदिवासी विकास पहल है, जिसके लिए ₹25,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इस परियोजना में गाँवों के क्लस्टर बनाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और कृषि क्षेत्र में एक साथ काम किया जाएगा।
इस परियोजना से आदिवासी क्षेत्रों में क्या बदलाव आएगा?
परियोजना का लक्ष्य आदिवासी इलाकों से पलायन रोकना, गाँवों में रोज़गार के अवसर पैदा करना और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। केंद्र और राज्य की योजनाओं को आपस में जोड़कर लागू करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
नंदुरबार में इस पहल के क्या परिणाम मिले हैं?
CM फडणवीस के अनुसार नंदुरबार जिले में इस पहल के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं, विशेषकर कृषि क्षेत्र में। वहाँ लोगों के जीवन स्तर में सुधार देखा जा रहा है, जिसे अन्य आदिवासी जिलों के लिए मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
क्लस्टर-आधारित विकास मॉडल क्या है?
इस मॉडल में अलग-अलग गाँवों पर अलग-अलग ध्यान देने के बजाय आसपास के गाँवों का एक समूह (क्लस्टर) बनाया जाता है और उनका एकीकृत विकास किया जाता है। इससे संसाधनों की बर्बादी कम होती है और योजनाओं का प्रभाव व्यापक होता है।
इस परियोजना की निगरानी कैसे होगी?
CM फडणवीस ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचे, इसके लिए योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रभावी एवं निरंतर निगरानी की जाएगी। हालाँकि निगरानी तंत्र के विस्तृत ब्यौरे की घोषणा अभी नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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