क्या इंदौर की घटना पर सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए?: फौजिया खान
सारांश
Key Takeaways
- दूषित पानी से हुई मौतें गंभीर चिंता का विषय हैं।
- सरकार को इस पर कड़े कदम उठाने चाहिए।
- सत्ता का दुरुपयोग और जनता का अपमान नहीं होना चाहिए।
- चुनावों में जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है।
- महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। इंदौर में दूषित पानी के कारण हुई मौतों को लेकर एनसीपी (एसपी) की राज्यसभा सांसद फौजिया खान ने इसे एक अत्यंत दुखद घटना करार दिया है।
उन्होंने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा, “यह एक बेहद दुखद घटना है। इसे जितना भी निंदनीय कहा जाए, कम है। बच्चे अपनी जान गंवा रहे हैं और लोगों तक दूषित पानी पहुंच रहा है। मेरा मानना है कि देश में इससे बड़ा कोई चिंता का विषय नहीं होना चाहिए। सरकार को इस पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए और कड़े कदम उठाने चाहिए।”
मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा एक पत्रकार पर भड़कने के वायरल वीडियो को लेकर फौजिया खान ने कहा, “यह बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है। सत्ता का नशा कभी भी अच्छा नहीं होता। यदि आप सत्ता में हैं तो आप जिम्मेदार हैं। आप सत्ता में लोगों का अपमान करने के लिए नहीं हैं। गंभीर सवालों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।”
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तुलना भगवान श्रीराम से किए जाने को लेकर नाना पटोले के बयान पर मची सियासत के बीच फौजिया खान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “भगवान श्रीराम न्याय के प्रतीक थे। राम राज्य का अर्थ है ऐसा शासन, जहां हर नागरिक और समाज के हर वर्ग के साथ समान व्यवहार हो, उन्हें सम्मान और न्याय मिले। असल में राम राज्य यही है। इस मार्ग पर चलने वाले महात्मा गांधी थे, जिन्होंने राम राज्य की स्थापना के लिए अथक प्रयास किए। जहां इंसाफ मिलता है, वही राम राज्य है। जो नफरत नहीं फैलाता और शांति का संदेश देता है, वही राम राज्य की ओर बढ़ता है।”
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के ‘विपक्षी पार्टियों को जमीनी स्तर पर चुनाव लड़ना चाहिए’ वाले बयान पर फौजिया खान ने कहा, “चुनाव जमीनी स्तर पर ही लड़े जाने चाहिए। जब तक कार्यकर्ता मजबूत नहीं होंगे, तब तक कोई भी पार्टी प्रभावी नहीं हो सकती। आज हर जगह पैसों का खेल चल रहा है। कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों की खरीद-फरोख्त हो रही है।”
उन्होंने आगे कहा, “सदन में चुनाव सुधारों को लेकर हमने कई मुद्दे उठाए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिस तरह से चुनाव और एसआईआर प्रक्रिया चलाई जा रही है, जब भी हमने इस पर बोलने की कोशिश की, हमें रोका गया.