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वन अधिकार अधिनियम: 54 लाख दावों में से 25 लाख को मान्यता, 11 लाख अभी भी लंबित

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वन अधिकार अधिनियम: 54 लाख दावों में से 25 लाख को मान्यता, 11 लाख अभी भी लंबित

सारांश

वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत 54 लाख दावों में से केवल 25 लाख को ही मान्यता मिली है — 11 लाख अभी भी लंबित और 18 लाख खारिज। MoTA के कोलकाता सम्मेलन ने इस खाई को पाटने की ज़रूरत रेखांकित की, लेकिन असली सवाल यह है कि दशकों पुरानी इस प्रक्रिया को कब पूरा किया जाएगा।

मुख्य बातें

वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 के तहत 31 अगस्त 2026 तक 54 लाख से अधिक दावे प्राप्त हुए।
25 लाख उपाधियाँ वितरित की जा चुकी हैं; 18 लाख दावे खारिज और 11 लाख दावे अभी भी लंबित।
मध्य प्रदेश , ओडिशा और असम के कुछ जिलों में लंबित दावों की संख्या सबसे अधिक।
कोलकाता में MoTA का दूसरा क्षेत्रीय समीक्षा सम्मेलन; 8 राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल।
आंध्र प्रदेश ने डिजिटलीकरण और ऋण सुविधाओं की अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रथाएँ अन्य राज्यों के साथ साझा कीं।

वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 के अंतर्गत 31 अगस्त 2026 तक देशभर में दर्ज 54 लाख से अधिक दावों में से 25 लाख उपाधियाँ वितरित की जा चुकी हैं, जबकि 11 लाख दावे अभी भी विभिन्न प्रशासनिक चरणों में अटके हैं। केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय (MoTA) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कोलकाता में आयोजित दूसरे क्षेत्रीय समीक्षा सम्मेलन में शनिवार को यह जानकारी साझा की।

मुख्य आँकड़े और स्थिति

MoTA के संयुक्त सचिव ने सम्मेलन में बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त कुल दावों में से 18 लाख से अधिक दावे खारिज किए जा चुके हैं। इस प्रकार कुल 54 लाख दावों में से लगभग 25 लाख को मान्यता मिली, 18 लाख अस्वीकृत हुए और 11 लाख लंबित हैं।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश, ओडिशा और असम के कुछ विशेष जिलों में लंबित दावों की संख्या असाधारण रूप से अधिक है। इन राज्यों पर सम्मेलन में विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

सम्मेलन में भाग लेने वाले राज्य और प्राथमिकताएँ

कोलकाता सम्मेलन में पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, झारखंड, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ — आठ राज्यों के जनजातीय कल्याण, राजस्व एवं वन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

सम्मेलन में बड़ी संख्या में लंबित दावों वाले जिलों के कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और ITDP/ITDA परियोजना अधिकारियों ने भी भाग लिया, ताकि कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा हो सके और समन्वित रणनीति तय की जा सके।

आंध्र प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियाँ साझा

आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था ताकि वे FRA से जुड़े डिजिटलीकरण, स्वामित्व को सरकारी अभिलेखों में एकीकृत करने, आजीविका योजनाओं को FRA धारकों से जोड़ने और ऋण सुविधाएँ प्रदान करने की अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रथाएँ साझा कर सकें।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार FRA के कार्यान्वयन में तेज़ी लाने के लिए राज्यों पर दबाव बना रही है। आंध्र प्रदेश का अनुभव अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।

सरकार का दृष्टिकोण और अगला कदम

वन्यजीव विकास मंत्रालय के सचिव ने कहा कि FRA समावेशी और सतत विकास के केंद्र में वनवासियों के अधिकारों, गरिमा और आकांक्षाओं को रखता है। उन्होंने ज़ोर दिया कि मान्यता प्राप्त अधिकारों को सटीक मानचित्रों के साथ राजस्व और वन अभिलेखों में दर्ज किया जाना चाहिए।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्पादक भूमि उपयोग, आवास और आजीविका कार्यक्रमों का FRA कार्यान्वयन के साथ समन्वय एक नियमित प्रक्रिया बनाई जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि यह सम्मेलन 10 सितंबर को बेंगलुरु में दक्षिणी राज्यों के लिए हुए प्रथम क्षेत्रीय सम्मेलन के बाद आयोजित किया गया।

लंबित 11 लाख दावों के निपटारे की समय-सीमा और प्रक्रिया आने वाले हफ्तों में निर्धारित होने की उम्मीद है, जो लाखों आदिवासी परिवारों के भूमि-अधिकार की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि लाखों वनवासियों की आजीविका और भूमि-सुरक्षा पर सीधा प्रश्नचिह्न है। क्षेत्रीय सम्मेलनों की श्रृंखला सराहनीय है, लेकिन जब तक राज्यों पर जवाबदेही तय नहीं होती और खारिज दावों की पुनर्समीक्षा की पारदर्शी प्रक्रिया नहीं बनती, ये बैठकें महज़ औपचारिकता बनकर रह जाएंगी।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के तहत अब तक कितने दावों को मान्यता मिली है?
31 अगस्त 2026 तक प्राप्त 54 लाख से अधिक दावों में से 25 लाख उपाधियाँ वितरित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त 18 लाख से अधिक दावे खारिज किए गए हैं और 11 लाख दावे अभी विभिन्न चरणों में लंबित हैं।
किन राज्यों में FRA के सबसे अधिक दावे लंबित हैं?
मध्य प्रदेश, ओडिशा और असम के कुछ विशेष जिलों में भारी संख्या में दावे अभी भी लंबित हैं। MoTA के कोलकाता सम्मेलन में इन राज्यों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
कोलकाता में FRA का क्षेत्रीय समीक्षा सम्मेलन क्यों आयोजित किया गया?
यह सम्मेलन MoTA द्वारा FRA के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा करने और लंबित दावों को तेज़ी से निपटाने की रणनीति तय करने के लिए आयोजित हुआ। यह 10 सितंबर को बेंगलुरु में दक्षिणी राज्यों के लिए हुए पहले क्षेत्रीय सम्मेलन की श्रृंखला में दूसरा आयोजन था।
FRA के तहत अधिकार मिलने के बाद वनवासियों को क्या लाभ मिलते हैं?
FRA के तहत मान्यता प्राप्त अधिकारधारकों को भूमि का कानूनी स्वामित्व, राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने का अधिकार, आजीविका योजनाओं से जुड़ाव और ऋण सुविधाएँ मिलती हैं। आंध्र प्रदेश ने इन लाभों को प्रभावी ढंग से देने की अपनी प्रथाएँ कोलकाता सम्मेलन में साझा कीं।
खारिज किए गए FRA दावों की क्या स्थिति है?
अब तक 18 लाख से अधिक दावे खारिज किए जा चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, मान्यता प्राप्त अधिकारों को सटीक मानचित्रों के साथ राजस्व और वन अभिलेखों में दर्ज किया जाना अनिवार्य है, लेकिन खारिज दावों की पुनर्समीक्षा प्रक्रिया के बारे में सम्मेलन में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
राष्ट्र प्रेस
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