14 अगस्त 2026
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गडकरी ने संत तुकाराम पालखी मार्ग का निरीक्षण किया, ₹4,416 करोड़ का ग्रीन हाईवे दिसंबर तक होगा तैयार

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गडकरी ने संत तुकाराम पालखी मार्ग का निरीक्षण किया, ₹4,416 करोड़ का ग्रीन हाईवे दिसंबर तक होगा तैयार

सारांश

₹4,416 करोड़ की लागत से बन रहा संत तुकाराम पालखी मार्ग महज सड़क नहीं — यह लाखों वारकरियों की आस्था का आधुनिक राजपथ है। 80% काम पूरा, दिसंबर तक तैयार होने का वादा, और 400 पेड़ों का ट्रांसप्लांट — गडकरी ने इसे विकास और पर्यावरण के संगम के रूप में पेश किया।

मुख्य बातें

नितिन गडकरी ने 15 मई 2026 को इंदापुर में संत तुकाराम महाराज पालखी मार्ग ( NH-965G ) का स्थलीय निरीक्षण किया।
परियोजना की कुल लागत ₹4,416 करोड़ ; देहू से पंढरपुर तक 130 किलोमीटर लंबा मार्ग।
समग्र निर्माण 80% पूर्ण; इंदापुर-टोंडाले खंड 96% और बारामती-इंदापुर खंड 84% तैयार।
निर्माण के दौरान 400 से अधिक पेड़ ट्रांसप्लांट; 25 तालाब गहरे किए गए, 25 गाँवों को जल संरक्षण का लाभ।
परियोजना लागत का 50% रोज़गार सृजन पर; दिसंबर 2026 तक पूर्ण होने की संभावना।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 15 मई 2026 को इंदापुर में संत तुकाराम महाराज पालखी मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग-965 जी) का स्थलीय निरीक्षण किया। महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, विधायक राहुल कोल्हे, पूर्व विधायक हर्षवर्द्धन पाटिल और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ उन्होंने बस से पूरे निर्माण खंड का जायजा लिया। गडकरी ने बताया कि ₹4,416 करोड़ की इस परियोजना का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष काम दिसंबर 2026 तक संपन्न होने की संभावना है।

परियोजना की संरचना और प्रगति

देहू से पंढरपुर तक फैला यह मार्ग 130 किलोमीटर लंबा है और पुणे तथा सोलापुर जिलों को जोड़ता है। परियोजना को तीन पैकेजों में बाँटा गया है। पटस-बारामती खंड पूरी तरह तैयार हो चुका है, बारामती-इंदापुर खंड 84 प्रतिशत और इंदापुर-टोंडाले खंड 96 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। गडकरी ने कहा कि शेष कार्य तेज़ गति से जारी है।

यह मार्ग बारामती, भिगवन, अकलूज और शिरपुर जैसे क्षेत्रों को बाईपास करते हुए तीर्थयात्रियों को तेज़ और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगा। पैदल वारकरियों के लिए अलग पैदल मार्ग, आधुनिक पुल, अंडरपास और बाईपास की विशेष व्यवस्था की गई है।

आस्था और पर्यावरण का संगम

गडकरी ने इस राजमार्ग को 'ग्रीन हाईवे' की संज्ञा दी। उन्होंने कहा, 'भगवान विट्ठल हमारे महाराष्ट्र के आराध्य देव हैं। संत ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज हमारी सांस्कृतिक प्रेरणा हैं। यह एक रोड नहीं, बल्कि आस्था का मार्ग है। इसीलिए हम इसे स्वाभाविक रूप से ग्रीन हाईवे बना रहे हैं ताकि यात्रियों को कोई तकलीफ न हो और वे आनंदपूर्वक पंढरपुर पहुँचें।'

पर्यावरण संरक्षण के तहत निर्माण के दौरान प्रभावित 400 से अधिक पेड़ों को सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया गया है। सड़क के दोनों ओर स्थानीय छायादार प्रजातियों के पेड़ लगाए गए हैं। इसके अलावा राजमार्ग के किनारे 25 तालाबों को गहरा किया गया है, जिससे आसपास के 25 गाँवों में जल संरक्षण को बल मिलेगा। हिंगनगांव और कनेरी क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए विशेष अंडरपास बनाए गए हैं।

एक्स पर मंत्री की पोस्ट

गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'संत तुकाराम महाराज पालखी मार्ग का निरीक्षण। हर साल विट्ठल भक्ति में लाखों वारकरी पंढरपुर यात्रा पर निकलते हैं। उनकी तीर्थयात्रा को आरामदायक बनाने के लिए यह पुनर्विकास किया जा रहा है।' यह पोस्ट निरीक्षण दौरे के तुरंत बाद साझा की गई।

आम जनता और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

गडकरी ने बताया कि परियोजना में कुल खर्च का करीब 50 प्रतिशत रोज़गार सृजन पर हो रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद होटल, ढाबा, परिवहन और पर्यटन से जुड़े अनेक छोटे उद्यम फलेंगे-फूलेंगे। संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी मार्ग (एनएच-965) के साथ मिलकर यह परियोजना लाखों श्रद्धालुओं की आषाढ़ी और कार्तिकी वारी को और अधिक सुगम बनाएगी।

स्थानीय किसान, व्यापारी और वारकरी समुदाय इस परियोजना को महाराष्ट्र के विकास का नया अध्याय मान रहे हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा देने की व्यापक कोशिशें चल रही हैं। दिसंबर तक पूर्ण होने पर यह ग्रीन हाईवे आस्था, पर्यावरण और विकास का अनूठा प्रतीक बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी दिसंबर की समयसीमा होगी — भारत में बड़े बुनियादी ढाँचे की परियोजनाएँ अक्सर मौसमी देरी और भूमि अधिग्रहण अड़चनों से जूझती हैं। 80% पूर्णता का दावा उत्साहजनक है, पर शेष 20% में अक्सर सबसे जटिल काम बचा होता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि वारकरी तीर्थयात्रा एक सामाजिक-सांस्कृतिक घटना है जिसमें पैदल चलने वाले लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं — उनके लिए अलग पैदल मार्ग की गुणवत्ता और रख-रखाव, मुख्य राजमार्ग से कम महत्वपूर्ण नहीं। पर्यावरण के मोर्चे पर 400 पेड़ों का ट्रांसप्लांट एक सकारात्मक कदम है, लेकिन उनकी दीर्घकालिक जीवित रहने की दर की स्वतंत्र निगरानी ज़रूरी है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संत तुकाराम महाराज पालखी मार्ग (NH-965G) क्या है?
यह देहू से पंढरपुर तक 130 किलोमीटर लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है, जो पुणे और सोलापुर जिलों को जोड़ता है। ₹4,416 करोड़ की लागत से बन रहे इस मार्ग का उद्देश्य लाखों वारकरी तीर्थयात्रियों की आषाढ़ी और कार्तिकी वारी को सुगम बनाना है।
पालखी मार्ग का निर्माण कब तक पूरा होगा?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार परियोजना का 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष काम दिसंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है। पटस-बारामती खंड पहले ही तैयार हो चुका है।
इस ग्रीन हाईवे में पर्यावरण के लिए क्या किया गया है?
निर्माण के दौरान 400 से अधिक पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया गया है और सड़क के दोनों ओर स्थानीय छायादार पेड़ लगाए गए हैं। राजमार्ग के किनारे 25 तालाबों को गहरा किया गया है, जिससे 25 गाँवों में जल संरक्षण बढ़ेगा, और वन्यजीवों के लिए विशेष अंडरपास भी बनाए गए हैं।
वारकरी तीर्थयात्रियों के लिए इस मार्ग पर क्या विशेष सुविधाएँ हैं?
पैदल वारकरियों के लिए मुख्य सड़क से अलग पैदल मार्ग बनाया गया है। इसके अलावा आधुनिक पुल, अंडरपास और बाईपास की व्यवस्था है, जिससे बारामती , भिगवन , अकलूज और शिरपुर जैसे व्यस्त क्षेत्रों से बचते हुए तेज़ और सुरक्षित यात्रा संभव होगी।
इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को कैसे फायदा होगा?
गडकरी के अनुसार परियोजना की कुल लागत का करीब 50 प्रतिशत रोज़गार सृजन पर खर्च हो रहा है। मार्ग पूर्ण होने के बाद होटल, ढाबा, परिवहन और पर्यटन से जुड़े छोटे उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा और लाखों श्रद्धालुओं के आने से स्थानीय अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी।
राष्ट्र प्रेस
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