गंगा एक्सप्रेसवे IMLC: 42% कैपिटल सब्सिडी और सिंगल विंडो से बना देश का सबसे आकर्षक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (IMLC) अब महज इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ नहीं रहीं — योगी आदित्यनाथ सरकार की बहुस्तरीय प्रोत्साहन नीति ने इन्हें देश के सबसे प्रतिस्पर्धी औद्योगिक गंतव्यों में तब्दील कर दिया है। 42% तक कैपिटल सब्सिडी, 100% नेट SGST रिइम्बर्समेंट और 'निवेश मित्र' सिंगल विंडो पोर्टल जैसी सुविधाओं के साथ यह कॉरिडोर घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीतिक कोशिश है।
मुख्य प्रोत्साहन ढाँचा
उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022 के तहत IMLC में निवेश करने वाले उद्योगों को एलिजिबल कैपिटल इनवेस्टमेंट (ECI) पर 42% तक कैपिटल सब्सिडी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, योग्य मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को ECI के 300% तक 100% नेट SGST रिइम्बर्समेंट का लाभ मिलता है, जिससे शुरुआती निवेश लागत में उल्लेखनीय कमी आती है और वित्तीय व्यवहार्यता मज़बूत होती है।
विदेशी निवेश के लिए विशेष प्रावधान
राज्य सरकार ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए अलग प्रोत्साहन संरचना तैयार की है। सरकारी भूमि पर फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी 80% तक और कैपिटल सब्सिडी 35% तक उपलब्ध है। इसके साथ ही, IMLC में स्थापित होने वाली इकाइयों को भूमि पंजीकरण पर 100% स्टाम्प ड्यूटी छूट मिलती है, जिससे जमीन अधिग्रहण और स्थापना की प्रक्रिया बेहद किफायती हो जाती है।
ऊर्जा, हरित उद्योग और नवाचार पर जोर
FDI और फॉर्च्यून ग्लोबल 500 कंपनियों को 5 वर्षों तक 100% बिजली शुल्क (इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी) में छूट दी जा रही है। ग्रीन इंडस्ट्री को प्रोत्साहित करने के लिए ₹2.5 करोड़ तक (50% तक) का इंसेंटिव उपलब्ध है। वहीं, अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए ₹10 करोड़ तक का R&D ग्रांट भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे अत्याधुनिक तकनीक और नवाचार को बल मिलेगा।
सिंगल विंडो और PLI टॉप-अप
निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए 'निवेश मित्र' सिंगल विंडो पोर्टल को और सशक्त किया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर 500 से अधिक ऑनलाइन सेवाएँ, भूमि आवंटन, स्वीकृति और इंसेंटिव ट्रैकिंग की सुविधा एक ही जगह उपलब्ध है। इससे निवेशकों को अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और अनुमोदन में लगने वाला समय घटता है। इसके अलावा, IMLC में स्थापित उद्योगों को केंद्र सरकार की PLI योजना के साथ 30% तक का अतिरिक्त टॉप-अप भी दिया जा रहा है, जो मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश लगातार बड़े औद्योगिक निवेश को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहा है और देश के अन्य राज्यों से औद्योगिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। बहुस्तरीय सब्सिडी, टैक्स छूट और डिजिटल सुविधाओं का यह संयोजन गंगा एक्सप्रेसवे IMLC को निवेशकों के लिए एक व्यापक और आकर्षक पैकेज के रूप में प्रस्तुत करता है।