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गन्ने की 4 नई उन्नत किस्में: 90-100 टन प्रति हेक्टेयर उपज, यूपी किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य

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गन्ने की 4 नई उन्नत किस्में: 90-100 टन प्रति हेक्टेयर उपज, यूपी किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य

सारांश

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए एक अहम कदम — यूपीसीएसआर की चार नई किस्में 100 टन प्रति हेक्टेयर तक उपज, लाल सड़न प्रतिरोध और बेहतर पेड़ी क्षमता का वादा लेकर आई हैं। ग्रेटर नोएडा के ट्रेड शो में हुए इस प्रदर्शन से किसानों की लागत घटाने और आय बढ़ाने की उम्मीद जगी है।

मुख्य बातें

यूपीसीएसआर द्वारा विकसित 4 नई गन्ना किस्में — को.शा.
17231 — यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो, ग्रेटर नोएडा में प्रदर्शित।
संभावित उपज क्षमता 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर तक, जो उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती है।
इन किस्मों में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग के प्रति रोगरोधी या प्रतिरोधी प्रवृत्ति पाई गई है।
बेहतर अंकुरण, शुरुआती बढ़वार और पेड़ी क्षमता से किसानों की बीज, श्रम और खेत-तैयारी लागत में बचत संभव।
किसानों को इन किस्मों की जानकारी चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर दी जा रही है।

उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (यूपीसीएसआर) द्वारा विकसित गन्ने की चार नई उन्नत किस्मों को 29 सितंबर को ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शित किया गया। विभाग के अनुसार इन किस्मों की संभावित उपज क्षमता 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर तक है, जो उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की आय और उत्पादकता दोनों बढ़ाने में सहायक हो सकती है। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर इन किस्मों की विशेषताओं से किसानों, कृषि विशेषज्ञों और आगंतुकों को परिचित कराया जा रहा है।

कौन-सी हैं ये चार नई किस्में

यूपीसीएसआर द्वारा विकसित और ट्रेड शो में प्रदर्शित चार किस्में हैं — को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231। इन किस्मों का मुख्य उद्देश्य गन्ने की उत्पादकता और चीनी परता (शुगर रिकवरी) में सुधार करना है। साथ ही, इन्हें किसानों के लिए आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

लाल सड़न रोग से सुरक्षा

गन्ने की फसल में लाल सड़न (रेड रॉट) एक प्रमुख रोग है, जो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को प्रभावित कर सकता है। विभाग के अनुसार, यूपीसीएसआर द्वारा विकसित इन नवीन किस्मों में लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी अथवा प्रतिरोधी प्रवृत्ति पाई गई है। इससे रोग के प्रभाव को कम करने और फसल को अधिक सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

अंकुरण, बढ़वार और पेड़ी क्षमता के फायदे

इन किस्मों की एक प्रमुख विशेषता इनका बेहतर अंकुरण और शुरुआती बढ़वार बताई गई है, जो फसल के समग्र विकास में सहायक होती है। इसके अलावा मिल में पेराई योग्य गन्नों की संख्या अधिक होने की संभावना है, जिससे चीनी उत्पादन में भी वृद्धि हो सकती है। इन किस्मों की अच्छी पेड़ी क्षमता — यानी एक बार कटाई के बाद उसी खेत से अगली फसल प्राप्त करने की क्षमता — किसानों को बीज, श्रम और खेत की तैयारी से जुड़ी लागत में बचत का अवसर दे सकती है।

किसानों पर असर और व्यापक संदर्भ

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और यहाँ लाखों किसान अपनी आजीविका के लिए गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश सरकार गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और बकाया भुगतान की समस्याओं के समाधान पर ज़ोर दे रही है। विभाग के अनुसार, नई उन्नत किस्मों के व्यापक उपयोग से प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

ट्रेड शो में प्रदर्शनी का महत्व

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में इन किस्मों का प्रदर्शन किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को गन्ना अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचारों से परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। सरकार और यूपीसीएसआर की ओर से इन किस्मों के प्रचार-प्रसार के ज़रिए प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के प्रयास जारी हैं। आगामी खरीफ सीजन में इन किस्मों को अपनाने वाले किसानों की संख्या ही इन प्रयासों की वास्तविक सफलता का पैमाना होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उत्तर प्रदेश में गन्ना अनुसंधान की पिछली घोषणाओं और ज़मीनी अपनाव के बीच का अंतर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। असली सवाल यह है कि इन किस्मों का प्रमाणित बीज किसानों तक किस पैमाने पर और कितनी जल्दी पहुँचेगा — क्योंकि ट्रेड शो की प्रदर्शनी और खेत में व्यापक अपनाव के बीच अक्सर लंबी खाई होती है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में गन्ने की औसत उत्पादकता अभी भी राष्ट्रीय संभावना से काफी नीचे है, और बकाया भुगतान की पुरानी समस्या किसानों के नई तकनीक अपनाने के उत्साह को प्रभावित करती है। बिना सुलभ बीज वितरण और विस्तार सेवाओं के, यह पहल केवल प्रयोगशाला से प्रदर्शनी तक सीमित रहने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीसीएसआर की नई गन्ना किस्में कौन-सी हैं और इनकी उपज क्षमता क्या है?
यूपीसीएसआर द्वारा विकसित चार नई किस्में हैं — को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231। विभाग के अनुसार इनकी संभावित उपज क्षमता 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर तक है।
ये नई गन्ना किस्में लाल सड़न रोग से कैसे बचाती हैं?
यूपीसीएसआर द्वारा विकसित इन किस्मों में लाल सड़न (रेड रॉट) रोग के प्रति रोगरोधी अथवा प्रतिरोधी प्रवृत्ति पाई गई है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर रोग का असर कम होने की उम्मीद है।
पेड़ी क्षमता किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पेड़ी फसल में एक बार कटाई के बाद उसी खेत से अगली फसल प्राप्त की जाती है। यदि पेड़ी उत्पादन अच्छा रहे तो किसानों को बीज, श्रम और खेत की तैयारी से जुड़ी लागत में बचत होती है, जिससे खेती अधिक लाभकारी बनती है।
इन किस्मों का प्रदर्शन कहाँ और कब किया गया?
इन चारों किस्मों को 29 सितंबर को ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर प्रदर्शित किया गया।
इन नई किस्मों से उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को क्या फायदा होगा?
विभाग के अनुसार बेहतर उपज, लाल सड़न प्रतिरोध, अच्छी शुरुआती बढ़वार और पेड़ी क्षमता के कारण किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती की लागत घटाने में मदद मिल सकती है। इससे गन्ने की खेती अधिक लाभकारी बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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