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गौतम अदाणी ने अक्षय तृतीया पर तरंगा जैन मंदिर में की पूजा-अर्चना

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गौतम अदाणी ने अक्षय तृतीया पर तरंगा जैन मंदिर में की पूजा-अर्चना

सारांश

गौतम अदाणी और उनकी पत्नी ने अक्षय तृतीया पर तरंगा पहाड़ियों में जैन मंदिर में पूजा की। इस धार्मिक यात्रा में उन्होंने तीर्थयात्रियों की सुविधाओं में सुधार की योजनाओं पर भी चर्चा की।

मुख्य बातें

गौतम अदाणी ने अक्षय तृतीया पर तरंगा जैन मंदिर में पूजा की।
यह मंदिर 12वीं शताब्दी का है।
अदाणी दंपत्ति ने तीर्थयात्रियों की सुविधाओं में सुधार के लिए चर्चा की।
अक्षय तृतीया समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक है।
अदाणी ने हनुमान जन्मोत्सव पर भी पूजा की थी।

मेहसाणा, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति अदाणी ने अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर रविवार को गुजरात के तरंगा पहाड़ों में स्थित अजीतनाथ भगवान श्वेतांबर जैन देरासर मंदिर में पूजा-अर्चना की।

दंपति सुबह लगभग 7:45 बजे खेरालू तालुका के दाभोड़ा हेलीपैड पर पहुंचे, जहां जैन समुदाय के सदस्यों ने उनका स्वागत किया और फिर वे मंदिर की ओर बढ़े। श्रद्धालु इस विशेष दिन पर मंदिर में प्रार्थना के लिए सुबह से ही एकत्रित हो रहे थे, क्योंकि यह दिन विभिन्न परंपराओं में पवित्र माना जाता है।

यह मंदिर, जो 12वीं शताब्दी का है, जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर भगवान अजितनाथ को समर्पित है और सोलंकी शासक राजा कुमारपाल से जुड़ा हुआ है। यह जैन समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है।

गौतम अदाणी ने गर्भगृह में प्रार्थना करने के बाद मंदिर परिसर में कुछ समय बिताया। इस दौरान, उन्होंने कैंटीन का भी दौरा किया, जहां तीर्थयात्री अपने यात्रा अनुभव साझा करते हैं।

इस यात्रा के दौरान, अदाणी ने मंदिर के न्यासी सचिन अशोकभाई शाह से मुलाकात की और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं में सुधार लाने की योजनाओं पर चर्चा की। इस चर्चा का मुख्य फोकस मंदिर की स्थापत्य और आध्यात्मिक अखंडता को बनाए रखते हुए पहुँच और सुविधाओं को बढ़ाना था।

अक्षय तृतीया को हिंदू और जैन पंचांग में सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है, जो समृद्धि और नई शुरुआत से जुड़ा है। जैन परंपरा में, यह वह दिन है जब ऋषभनाथ ने लंबे उपवास के बाद अपना पहला दान ग्रहण किया, जिससे तपस्वियों को भोजन देने की प्रथा की शुरुआत हुई।

इससे पहले, हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर, अदाणी और उनके परिवार ने भारत के सबसे प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक, अयोध्या के राम मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह अदाणी समूह के सामाजिक योगदान को भी दर्शाती है। अदाणी दंपत्ति की तीर्थयात्रा और मंदिर की सुविधाओं में सुधार की योजनाएँ जैन समुदाय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम अदाणी ने कब और कहाँ पूजा की?
गौतम अदाणी ने 19 अप्रैल को तरंगा पहाड़ियों के जैन मंदिर में पूजा की।
अक्षय तृतीया का महत्व क्या है?
अक्षय तृतीया को समृद्धि और नई शुरुआत का दिन माना जाता है।
क्या अदाणी दंपत्ति ने मंदिर में किसी विशेष योजना पर चर्चा की?
हाँ, उन्होंने तीर्थयात्रियों की सुविधाओं में सुधार की योजनाओं पर चर्चा की।
अजीतनाथ जैन मंदिर का क्या महत्व है?
यह मंदिर जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर भगवान अजितनाथ को समर्पित है और जैन समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।
हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर अदाणी का क्या कार्यक्रम था?
उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।
राष्ट्र प्रेस
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