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सरकार का एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर नई केसबुक का विमोचन

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सरकार का एआई और लैंगिक सशक्तिकरण पर नई केसबुक का विमोचन

सारांश

भारत ने समावेशी एआई को बढ़ावा देने के लिए एक नई केसबुक लॉन्च की है, जो लैंगिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है। इससे महिलाओं के लिए नए अवसरों और समानता को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्य बातें

महिला सशक्तिकरण के लिए एआई का उपयोग ग्लोबल साउथ के 23 एआई समाधानों का समावेश नैतिक और समावेशी एआई सिस्टम का विकास नीति-निर्माताओं और कार्यकर्ताओं के लिए ज्ञान संसाधन अनुसंधान और तकनीक के लिए एक नया मार्गदर्शन

नई दिल्ली, २७ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में समावेशी और नैतिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने एक नई केसबुक का विमोचन किया है, जिसका शीर्षक है 'एआई और जेंडर एम्पावरमेंट (लैंगिक सशक्तिकरण)'। यह जानकारी आईटी मंत्रालय ने शुक्रवार को साझा की।

इस केसबुक को 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट २०२६' में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। इसे एमईआईटीवाई के अंतर्गत इंडियाएआई मिशन द्वारा, यूएन वूमेन के सहयोग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमओडब्ल्यूसीडी) के समर्थन से तैयार किया गया है।

इसमें ग्लोबल साउथ के विभिन्न देशों से २३ एआई समाधान शामिल किए गए हैं, जो लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर ठोस और मापनीय प्रभाव प्रदर्शित करते हैं।

मंत्रालय के अनुसार, इस केसबुक में ५० से अधिक देशों से प्राप्त २३३ प्रविष्टियों में से कड़े और बहु-स्तरीय मूल्यांकन के बाद २३ एआई समाधानों का चयन किया गया।

बयान में कहा गया, "एमईआईटीवाई, एमओडब्ल्यूसीडी और यूएन वूमेन के वरिष्ठ अधिकारियों की एक स्वतंत्र मूल्यांकन समिति ने वास्तविक उपयोग, जेंडर पर मापनीय प्रभाव और साक्ष्य-आधारित परिणामों के आधार पर समाधानों का चयन किया।"

प्रस्तुत किए गए इन समाधानों में स्वास्थ्य सेवा (मासिक धर्म स्वास्थ्य सहित), आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन, डिजिटल सुरक्षा और तकनीक के माध्यम से लैंगिक हिंसा की रोकथाम, जलवायु सहनशीलता और सतत कृषि, न्याय और कानूनी सेवाओं तक पहुंच, शिक्षा और कौशल विकास तथा नीति-निर्माताओं और कार्यकर्ताओं के लिए ज्ञान संसाधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

इस केसबुक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली, जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जनएआई एक्सपो में यूएन वूमेन के स्टॉल का दौरा किया।

महासचिव ने वेस्टेम परियोजना के तहत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में करियर बना रही ग्रामीण समुदायों की युवा महिलाओं से बातचीत की। यह परियोजना यूएन वूमेन द्वारा मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र की सरकारों, यूरोपीय संघ, माइक्रोन, नोकिया और हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन के सहयोग से चलाई जा रही है।

बयान के अनुसार, इन युवा महिलाओं ने बताया कि वे एआई का उपयोग नए कौशल सीखने, शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर तलाशने के लिए कर रही हैं। यह भविष्य में तकनीकी नेतृत्व की दिशा में एक व्यावहारिक रास्ता दिखाता है।

आगे कहा गया कि यह केसबुक नीति-निर्माताओं, तकनीक डेवलपर्स, शोधकर्ताओं और कार्यकर्ताओं के लिए एक व्यापक ज्ञान संसाधन के रूप में काम करेगी। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि एआई सिस्टम को कैसे नैतिक, समावेशी और महिलाओं व लड़कियों की विविध जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकता है, खासकर भारत और ग्लोबल साउथ के संदर्भ में।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस केसबुक का उद्देश्य क्या है?
इस केसबुक का उद्देश्य एआई सिस्टम को नैतिक और समावेशी तरीके से विकसित करना है, ताकि यह महिलाओं और लड़कियों की जरूरतों को पूरा कर सके।
केसबुक में कितने देशों के समाधान शामिल हैं?
इसमें 23 देशों के एआई समाधान शामिल किए गए हैं, जो लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण पर प्रभाव डालते हैं।
यह केसबुक कब लॉन्च की गई थी?
यह केसबुक 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में लॉन्च की गई थी।
केसबुक के मूल्यांकन में कौन शामिल था?
इसका मूल्यांकन एमईआईटीवाई , एमओडब्ल्यूसीडी और यूएन वूमेन के अधिकारियों की एक स्वतंत्र समिति ने किया।
महासचिव ने किस परियोजना का दौरा किया?
महासचिव ने वेस्टेम परियोजना का दौरा किया, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए एसटीईएम में करियर बनाने का अवसर प्रदान करती है।
राष्ट्र प्रेस
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