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क्या जीएसटी रेट में कटौती के बाद सरकार को ग्राहकों से मिसलीडिंग डिस्काउंट की 3000 शिकायतें मिलीं?

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क्या जीएसटी रेट में कटौती के बाद सरकार को ग्राहकों से मिसलीडिंग डिस्काउंट की 3000 शिकायतें मिलीं?

सारांश

क्या आपको पता है कि जीएसटी रेट में कटौती के बाद उपभोक्ताओं ने रिटेलरों से लगभग 3000 शिकायतें की हैं? यह जानकारी उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने दी। जानिए इस मुद्दे के पीछे की कहानी और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्य बातें

जीएसटी रेट्स में कटौती के बाद 3000 शिकायतें आईं।
मिसलीडिंग डिस्काउंट्स से उपभोक्ताओं को धोखा दिया जा रहा है।
सरकार ने सीबीआईसी को शिकायतें भेजने का निर्णय लिया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके शिकायतों का ट्रैक रखा जा रहा है।
कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा रहा है।

नई दिल्ली, 29 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। उपभोक्ता मामले विभाग (डीओसीए) की सचिव निधि खरे ने सोमवार को बताया कि जीएसटी रेट्स में हालिया कटौती के बाद सरकार को उपभोक्ताओं से रिटेलरों द्वारा मिसलीडिंग डिस्काउंट्स और अनुचित मूल्य निर्धारण प्रथाओं को लेकर लगभग 3,000 शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

खरे ने एक कार्यक्रम में कहा कि हर दिन शिकायतें आ रही हैं और मंत्रालय उन्हें केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) को आगे की कार्रवाई के लिए भेज रहा है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हमें हर दिन शिकायतें मिल रही हैं। अब तक, हमें लगभग 3,000 उपभोक्ता शिकायतें मिली हैं। हम उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए सीबीआईसी को भेज रहे हैं।"

खरे ने बताया कि कई शिकायतों में प्राइसिंग को लेकर डार्क पैटर्न की बात कही गई है, जहाँ रिटेलर जीएसटी रेट कम होने का लाभ ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, "यदि अलग-अलग क्षेत्रों से अलग-अलग शिकायतें आती हैं तो वे क्लास एक्शन की पात्र होंगी। हम इस पर ध्यान दे रहे हैं। हम निश्चित रूप से उन मामलों पर ध्यान देंगे जहाँ, मिसलीडिंग डिस्काउंट्स के साथ ग्राहकों को धोखा दिया गया है।"

मंत्रालय अपनी निगरानी को मजबूत करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में शिकायतों को ट्रैक और विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैटबॉट टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहा है।

उन्होंने कहा, "हमारा ध्यान मिसलीडिंग एड्स और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर है। साथ ही, उन मामलों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जहाँ जीएसटी सुधार का लाभ ग्राहकों को वस्तुओं और सेवाओं की अंतिम कीमत में नहीं मिल पा रहा।"

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी 2.0 सुधार के संबंध में निर्णय लिया गया था। इन सुधारों को 22 सितंबर से देश में लागू किया गया है।

इसके अलावा, हाल ही में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने मेसर्स डिजिटल एज रिटेल प्राइवेट लिमिटेड (फर्स्टक्राई) पर गलत और भ्रामक मूल्य निर्धारण के लिए 2,00,000/- रुपए का जुर्माना लगाया।

यह मामला एक उपभोक्ता की शिकायत से जुड़ा था, जिसमें बताया गया कि फर्स्टक्राई ने उत्पादों पर सभी करों सहित अधिकतम खुदरा मूल्य दर्शाया था, जबकि चेक आउट के समय, छूट वाले मूल्य पर अतिरिक्त जीएसटी लगाया। इससे अधिक छूट का भ्रामक प्रभाव पड़ा और उपभोक्ताओं को अंतिम देय राशि के बारे में गुमराह किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह देखना महत्वपूर्ण है कि सरकार किस प्रकार उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा कर रही है। जीएसटी रेट में कमी के बाद की गई शिकायतें दर्शाती हैं कि उपभोक्ताओं को सही जानकारी और पारदर्शिता की आवश्यकता है। हम सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यापार प्रथाएँ उचित और पारदर्शी हों।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएसटी रेट में कटौती के बाद कितनी शिकायतें आई हैं?
सरकार को जीएसटी रेट में कटौती के बाद लगभग 3000 शिकायतें मिली हैं।
क्या शिकायतें रिटेलरों के खिलाफ हैं?
हाँ, शिकायतें रिटेलरों द्वारा मिसलीडिंग डिस्काउंट्स और अनुचित मूल्य निर्धारण को लेकर हैं।
सरकार इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई कर रही है?
सरकार इन शिकायतों को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड को भेज रही है।
क्या सरकार ने नई तकनीक का उपयोग किया है?
हाँ, मंत्रालय शिकायतों को ट्रैक करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैटबॉट टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहा है।
क्या अन्य कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई है?
हाँ, हाल ही में फर्स्टक्राई पर भ्रामक मूल्य निर्धारण के लिए जुर्माना लगाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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