गुजरात में 'स्वच्छ पर्यावरण यात्रा': 2024 से 906 मीट्रिक टन तीर्थ कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन, 1.43 करोड़ श्रद्धालु जुड़े
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) ने 2024 से अब तक राज्य के प्रमुख तीर्थ मार्गों पर उत्पन्न 906 मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से संग्रह और प्रसंस्करण किया है। स्वच्छता अभियानों और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बोर्ड 1.43 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं तक पहुँचने में सफल रहा है। 'स्वच्छ पर्यावरण यात्रा' नाम की यह पहल गुजरात के तीर्थ स्थलों को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में एक व्यापक प्रयास के रूप में उभरी है।
अभियान की रूपरेखा और प्रमुख आयोजन
इस पहल में वार्षिक अंबाजी पदयात्रा, उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा और द्वारका का फुलडोल महोत्सव जैसे बड़े धार्मिक आयोजन शामिल रहे। अभियान का मुख्य ध्येय तीर्थ मार्गों पर कचरे का बिखराव रोकना, उसे वर्गीकृत कर वैज्ञानिक तरीके से निपटाना और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के स्थान पर टिकाऊ विकल्पों को प्रोत्साहित करना है।
हाल ही में संपन्न अंबाजी पदयात्रा के दौरान GPCB ने 38.8 मीट्रिक टन कचरा एकत्र कर उसका वैज्ञानिक निपटान किया। इसके लिए 300 'सेवा केंद्र' स्थापित किए गए, 13 वाहन, 90 सफाई कर्मचारी और फील्ड स्टाफ तैनात किए गए।
प्लास्टिक कटौती और बोतल-एक्सचेंज कार्यक्रम
प्लास्टिक की खपत घटाने के लिए बोर्ड ने 31,000 कंपोस्टेबल बैग, 1,500 कपड़े के थैले और 4,850 स्टील की बोतलें वितरित कीं। 'बोतल-एक्सचेंज' कार्यक्रम के ज़रिए 38,466 प्लास्टिक की बोतलें वापस एकत्र की गईं।
2024 से इस कार्यक्रम के विस्तार के तहत 15,600 स्टील की बोतलें बाँटी गई हैं और 1.37 लाख से अधिक इस्तेमाल-शुदा प्लास्टिक बोतलें रीसाइक्लिंग के लिए एकत्र की गई हैं। वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा, 'सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के प्रयासों के तहत बोर्ड ने 31,000 कंपोस्टेबल बैग, 1,500 कपड़े के थैले और 4,850 स्टील की बोतलें बाँटीं।'
नर्मदा परिक्रमा में विशेष प्रबंधन
31 दिनों तक चली उत्तरवाहिनी नर्मदा परिक्रमा, जो लगभग 23-24 किलोमीटर के मार्ग को कवर करती है, में बोर्ड ने 65 सफाई कर्मचारियों और 4 वाहनों को तैनात किया। इस दौरान 60 मीट्रिक टन कचरा संग्रहित किया गया, जिसमें 15 टन प्लास्टिक और 45 टन बायोडिग्रेडेबल कचरा शामिल था।
सरकारी अनुमानों के अनुसार, नर्मदा परिक्रमा अभियान से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 41 टन के बराबर कमी आई और लगभग 85,000-86,000 किलोवाट-घंटा ऊर्जा बचाई गई।
जन-जागरूकता और सरकार की प्रतिक्रिया
अंबाजी अभियान में 70 नुक्कड़ नाटक, दो 'दायरा' कार्यक्रम, 4 लाख जागरूकता बैंड और 50,000 से अधिक पर्चे वितरित किए गए। इन बैंडों पर गुजराती भाषा में संदेश लिखा था — 'ये हाथ कचरा नहीं फेंकेंगे।'
वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा, 'जन-जागरूकता के विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए लोगों को कचरे के जिम्मेदार निपटान के तरीके अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि तीर्थ मार्ग साफ-सुथरे बने रहें।' सरकारी अनुमानों के अनुसार, संपूर्ण अभियान से 27.58 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी और 3.25 लाख किलोवाट-घंटा ऊर्जा की बचत हुई।
आगे की राह
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रोत्साहित 'सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट' के व्यापक लक्ष्य और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य के तीर्थ स्थलों की स्वच्छता सुनिश्चित करने के प्रयासों का हिस्सा है। गौरतलब है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़े पैमाने पर उत्पन्न होने वाला कचरा पारंपरिक रूप से प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रही है, और यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक संदर्भ बिंदु बन सकता है।