गुजरात खाद्य सुरक्षा योजना: पाँच वर्षों में 1.14 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिला अनाज
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात की राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत पिछले पाँच वर्षों में 25 लाख से अधिक परिवारों के 1.14 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को गेहूं, चावल और मोटा अनाज या तो निःशुल्क या सब्सिडी वाली दरों पर उपलब्ध कराया गया है। खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा 26 अगस्त 2026 को जारी आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है।
वर्षवार लाभार्थी संख्या में वृद्धि
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में इस योजना के तहत 3,06,026 परिवार और 14,48,943 लाभार्थी कवर किए गए थे। 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 5,63,406 परिवार और 25,43,101 लाभार्थी हो गई।
2024-25 में 7,49,252 परिवारों के 34,53,403 लाभार्थियों ने योजना का लाभ उठाया। 2025-26 में यह आँकड़ा 9,20,610 परिवारों और 39,65,325 लाभार्थियों तक पहुँच गया — जो 2022-23 की तुलना में तीन गुना से अधिक की वृद्धि है।
अनाज वितरण के पाँच वर्षीय आँकड़े
2021-22 में 26.91 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 12.57 लाख मीट्रिक टन चावल वितरित किया गया। 2022-23 में 12.66 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 22.70 लाख मीट्रिक टन चावल का वितरण हुआ।
2023-24 में वितरण में 9.20 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 11.03 लाख मीट्रिक टन चावल और 1.28 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज शामिल रहे। 2024-25 में 10.48 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 11.35 लाख मीट्रिक टन चावल और 0.84 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज वितरित किया गया। 2025-26 में 8.76 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 10.45 लाख मीट्रिक टन चावल और 0.88 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज लाभार्थियों तक पहुँचाया गया।
सरकार की प्रतिक्रिया और योजना का दायरा
खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रमन सोलंकी ने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कई ठोस उपाय किए हैं। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को मासिक आधार पर और विभिन्न त्योहारों के दौरान गेहूं, चावल, चीनी, खाद्य तेल, चना और मोटा अनाज उपलब्ध कराया जाता है।
योजना पर वित्तीय व्यय
आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में अनाज वितरण पर कुल ₹11,118.10 लाख खर्च हुए, जिनमें गेहूं पर ₹6,640.04 लाख और चावल पर ₹4,478.06 लाख शामिल थे। यह खर्च 2022-23 में ₹11,677.77 लाख, 2023-24 में ₹6,761.85 लाख, 2024-25 में ₹7,665.94 लाख और 2025-26 में ₹7,001.25 लाख रहा।
आगे की राह
खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम के अनुसार, राज्य सरकार पात्र लाभार्थियों तक समय पर और पारदर्शी तरीके से अनाज पहुँचाना सुनिश्चित करने का प्रयास करती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में खाद्य सुरक्षा के दायरे को विस्तार देने की माँग बढ़ रही है और राज्य स्तरीय योजनाओं की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।