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गुजरात खाद्य सुरक्षा योजना: पाँच वर्षों में 1.14 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिला अनाज

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गुजरात खाद्य सुरक्षा योजना: पाँच वर्षों में 1.14 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिला अनाज

सारांश

गुजरात में पाँच वर्षों की खाद्य सुरक्षा योजना के आँकड़े सामने आए हैं — 1.14 करोड़ से अधिक लाभार्थी, 25 लाख परिवार, और हर साल बढ़ती कवरेज। यह राज्य स्तरीय खाद्य नीति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

मुख्य बातें

गुजरात की खाद्य सुरक्षा योजना ने पाँच वर्षों में 25 लाख से अधिक परिवारों के 1.14 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को अनाज वितरित किया।
2025-26 में 9,20,610 परिवारों के 39,65,325 लाभार्थी कवर हुए — 2022-23 की तुलना में तीन गुना से अधिक।
लाभार्थियों को मासिक आधार पर और त्योहारों पर गेहूं, चावल, चीनी, खाद्य तेल, चना और मोटा अनाज दिया जाता है।
2021-22 में अनाज वितरण पर ₹11,118.10 लाख खर्च हुए; 2025-26 में यह ₹7,001.25 लाख रहा।
मंत्री रमन सोलंकी के अनुसार, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कई उपाय किए गए हैं।

गुजरात की राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत पिछले पाँच वर्षों में 25 लाख से अधिक परिवारों के 1.14 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को गेहूं, चावल और मोटा अनाज या तो निःशुल्क या सब्सिडी वाली दरों पर उपलब्ध कराया गया है। खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा 26 अगस्त 2026 को जारी आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है।

वर्षवार लाभार्थी संख्या में वृद्धि

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में इस योजना के तहत 3,06,026 परिवार और 14,48,943 लाभार्थी कवर किए गए थे। 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 5,63,406 परिवार और 25,43,101 लाभार्थी हो गई।

2024-25 में 7,49,252 परिवारों के 34,53,403 लाभार्थियों ने योजना का लाभ उठाया। 2025-26 में यह आँकड़ा 9,20,610 परिवारों और 39,65,325 लाभार्थियों तक पहुँच गया — जो 2022-23 की तुलना में तीन गुना से अधिक की वृद्धि है।

अनाज वितरण के पाँच वर्षीय आँकड़े

2021-22 में 26.91 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 12.57 लाख मीट्रिक टन चावल वितरित किया गया। 2022-23 में 12.66 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 22.70 लाख मीट्रिक टन चावल का वितरण हुआ।

2023-24 में वितरण में 9.20 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 11.03 लाख मीट्रिक टन चावल और 1.28 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज शामिल रहे। 2024-25 में 10.48 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 11.35 लाख मीट्रिक टन चावल और 0.84 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज वितरित किया गया। 2025-26 में 8.76 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 10.45 लाख मीट्रिक टन चावल और 0.88 लाख मीट्रिक टन मोटा अनाज लाभार्थियों तक पहुँचाया गया।

सरकार की प्रतिक्रिया और योजना का दायरा

खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रमन सोलंकी ने कहा कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कई ठोस उपाय किए हैं। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को मासिक आधार पर और विभिन्न त्योहारों के दौरान गेहूं, चावल, चीनी, खाद्य तेल, चना और मोटा अनाज उपलब्ध कराया जाता है।

योजना पर वित्तीय व्यय

आंकड़ों के अनुसार, 2021-22 में अनाज वितरण पर कुल ₹11,118.10 लाख खर्च हुए, जिनमें गेहूं पर ₹6,640.04 लाख और चावल पर ₹4,478.06 लाख शामिल थे। यह खर्च 2022-23 में ₹11,677.77 लाख, 2023-24 में ₹6,761.85 लाख, 2024-25 में ₹7,665.94 लाख और 2025-26 में ₹7,001.25 लाख रहा।

आगे की राह

खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम के अनुसार, राज्य सरकार पात्र लाभार्थियों तक समय पर और पारदर्शी तरीके से अनाज पहुँचाना सुनिश्चित करने का प्रयास करती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में खाद्य सुरक्षा के दायरे को विस्तार देने की माँग बढ़ रही है और राज्य स्तरीय योजनाओं की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह विस्तार वास्तविक ज़रूरतमंदों तक पहुँचा या केवल पात्रता सूची का विस्तार हुआ। वितरण व्यय में उतार-चढ़ाव — 2021-22 के ₹11,118 लाख से 2023-24 में ₹6,761 लाख तक गिरावट और फिर वापसी — यह संकेत देता है कि अनाज की मात्रा और लागत-संरचना में बदलाव हुए हैं, जिनका स्पष्टीकरण अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ। पारदर्शिता के दावों के बावजूद, स्वतंत्र सत्यापन तंत्र की अनुपस्थिति में इन आँकड़ों को पूरी तरह कसौटी पर नहीं कसा जा सकता।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात की खाद्य सुरक्षा योजना क्या है?
यह गुजरात सरकार की एक राज्यस्तरीय योजना है जिसके तहत पात्र परिवारों को गेहूं, चावल और मोटा अनाज या तो निःशुल्क या सब्सिडी वाली दरों पर उपलब्ध कराया जाता है। योजना के अंतर्गत मासिक वितरण के साथ-साथ त्योहारों पर भी चीनी, खाद्य तेल और चना दिया जाता है।
पाँच वर्षों में कितने लाभार्थी इस योजना से जुड़े?
खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 से 2025-26 के बीच कुल 25 लाख से अधिक परिवारों के 1.14 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को इस योजना का लाभ मिला। 2025-26 में अकेले 9,20,610 परिवारों के 39,65,325 लाभार्थी कवर हुए।
योजना पर सरकार ने कितना खर्च किया?
2021-22 में अनाज वितरण पर कुल ₹11,118.10 लाख खर्च हुए। यह खर्च 2022-23 में ₹11,677.77 लाख, 2023-24 में ₹6,761.85 लाख, 2024-25 में ₹7,665.94 लाख और 2025-26 में ₹7,001.25 लाख रहा।
योजना के तहत कौन-कौन से अनाज वितरित किए जाते हैं?
लाभार्थियों को गेहूं, चावल और मोटा अनाज नियमित रूप से दिया जाता है। इसके अलावा चीनी, खाद्य तेल और चना भी त्योहारों के अवसर पर वितरित किए जाते हैं।
इस योजना में लाभार्थियों की संख्या इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ी?
2022-23 में 14.48 लाख लाभार्थियों से बढ़कर 2025-26 में 39.65 लाख तक पहुँचना — यानी तीन वर्षों में लगभग तीन गुना वृद्धि — राज्य सरकार की विस्तार नीति और पात्रता मानदंडों में हुए बदलावों का परिणाम बताया जा रहा है। हालाँकि, इस विस्तार के विस्तृत कारण सरकार ने अभी तक सार्वजनिक नहीं किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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