पुलिस स्मृति दिवस: राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने आरआरयू में 145 शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने 21 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस समारोह में कर्तव्य-पालन के दौरान प्राण न्योछावर करने वाले 145 पुलिसकर्मियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का उद्घाटन भी किया तथा शहीद पुलिसकर्मियों की स्मृति को डिजिटल रूप में संजोने के लिए गुजरात पुलिस शहीद डैशबोर्ड का वर्चुअल लोकार्पण किया।
मुख्य घटनाक्रम
समारोह में राज्यपाल ने शहीद पुलिसकर्मियों के शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि देश सदैव उन वीरों का ऋणी रहेगा जिन्होंने शांति और कानून व्यवस्था को अक्षुण्ण रखने हेतु अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। साथ ही, उन्होंने उन माता-पिता और परिजनों को भी नमन किया जिन्होंने अपने सपूतों के हृदय में राष्ट्र-सेवा की अदम्य भावना प्रज्वलित की।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए बताया कि इसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान रखी गई थी।
आचार्य देवव्रत का संबोधन
भारत के सभ्यतागत मूल्यों — अहिंसा, शांति, सहिष्णुता और बंधुत्व — का स्मरण कराते हुए राज्यपाल ने रेखांकित किया कि सत्य और शांति की रक्षा के लिए दुष्कर्मों का सामना करने हेतु साहस तथा आंतरिक शक्ति अनिवार्य है। उन्होंने 'वीर भोग्य वसुंधरा' के सूत्र का आह्वान करते हुए अन्याय के विरुद्ध संघर्ष में वीरता, नैतिक संकल्प और दृढ़ता के महत्व को प्रतिपादित किया।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि दुष्कर्मों के प्रति मौन रहने से उल्लंघनों को और बल मिलता है। विजयादशमी के प्रतीक का संदर्भ देते हुए उन्होंने सत्यनिष्ठा और न्याय को कायम रखने के दृढ़ संकल्प की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
आरआरयू की भूमिका और नई सुविधाएँ
आरआरयू के कुलपति प्रो. बिमल एन. पटेल ने पुलिसिंग, आंतरिक सुरक्षा और संबद्ध विषयों में शिक्षा, अनुसंधान, विशेष प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण के क्षेत्र में संस्थान के दायित्वों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। राज्यपाल ने विशेष रूप से साइबर अपराध और प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा चुनौतियों जैसे उभरते क्षेत्रों में विभिन्न राज्यों के पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने में आरआरयू की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
समारोह में आरआरयू से प्रशिक्षण पूरा कर चुके 20 नव-भर्ती जीआईपीसीए जेल सहायक प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए, जो सुधारात्मक प्रशासन और व्यापक आपराधिक न्याय प्रणाली के क्षेत्र में संस्थान के योगदान को दर्शाता है।
आम जनता और सुरक्षाबलों पर असर
गौरतलब है कि 21 अक्टूबर को प्रतिवर्ष पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की स्मृति में समर्पित है। इस आयोजन में विश्वविद्यालय के अधिकारी, संकाय सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षु, पुलिस व सुरक्षा बलों के प्रतिनिधि तथा शहीदों के परिवार उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर अपराध और तकनीकी सुरक्षा चुनौतियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं, और पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की माँग पहले से कहीं अधिक प्रबल है।