गुजरात का जापान को सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी में निवेश का न्योता, ओसाका में हर्ष संघवी ने की राउंडटेबल बैठक
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 19 अक्टूबर 2026 को ओसाका में जापानी उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक में राज्य में निवेश का आमंत्रण दिया, जिसमें सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों को प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया गया। यह बैठक आगामी वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की पृष्ठभूमि में गुजरात और जापान के आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाई देने की मंशा से आयोजित की गई।
ओसाका राउंडटेबल: मुख्य घटनाक्रम
राज्य सरकार के अनुसार, ओसाका के इस कार्यक्रम में हर्ष संघवी की अध्यक्षता में एक केंद्रीय राउंडटेबल सम्मेलन के अतिरिक्त जापानी निवेशकों के साथ 11 व्यक्तिगत द्विपक्षीय बैठकें भी आयोजित की गईं। इन बैठकों में रणनीतिक साझेदारी और नए औद्योगिक सहयोग के अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई।
संघवी ने इस अवसर पर कहा, 'जापान उगते सूरज की धरती है और गुजरात उभरते अवसरों की धरती है।' उन्होंने राज्य की पारदर्शी नीतियों और त्वरित निर्णय प्रक्रिया को निवेशकों के दृष्टिकोण से सबसे बड़ी विशेषता बताया।
गुजरात की आर्थिक भूमिका और औद्योगिक ताकत
उपमुख्यमंत्री ने राज्य के आर्थिक आँकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि गुजरात देश की कुल आबादी का मात्र पाँच प्रतिशत होने के बावजूद भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में आठ प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। इसके अतिरिक्त, राज्य देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में लगभग 18 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है।
संघवी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत के लगभग एक-तिहाई निर्यात की उत्पत्ति गुजरात से होती है और राज्य के बंदरगाह देश की लगभग 40 प्रतिशत माल ढुलाई का संचालन करते हैं। ऊर्जा के मोर्चे पर उन्होंने बताया कि राज्य में उपयोग होने वाली ऊर्जा का 65 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त होता है — जो जापानी कंपनियों के लिए ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों के अनुकूल है।
भारत-जापान संबंध और गुजरात की भूमिका
संघवी ने जापान और गुजरात के बीच पहले से स्थापित साझेदारी को रेखांकित करते हुए सुजुकी की दीर्घकालिक मौजूदगी, बुलेट ट्रेन परियोजना और जापानी औद्योगिक पार्कों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि पारस्परिक विश्वास, साझा मूल्यों और सांस्कृतिक जुड़ाव पर टिके हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की कोशिशें तेज हो रही हैं और जापान की प्रमुख चिप कंपनियाँ भारत में विस्तार की संभावनाएँ तलाश रही हैं। गौरतलब है कि गुजरात पहले ही देश की पहली सेमीकंडक्टर फैब इकाइयों में से एक की मेजबानी कर चुका है।
तकनीकी सहयोग की संभावनाएँ
संघवी ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, EV और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अग्रणी क्षेत्रों में जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और गुजरात की कुशल मानव संपदा मिलकर नए अवसर सृजित कर सकती है। उन्होंने गुजरात को 'भारत का प्रवेश द्वार' और भारत को 'वैश्विक बाजारों का प्रवेश द्वार' बताते हुए निवेशकों से कहा, 'आइए, गुजरात को देखिए, निवेश कीजिए और हमारे साथ आगे बढ़िए।'
वाइब्रेंट गुजरात समिट: आगे क्या
सभी जापानी उद्योगपतियों और निवेशकों को वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में भाग लेने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया, जो दोनों पक्षों के बीच निवेश संकल्पों को ठोस रूप देने का प्रमुख मंच होगा। ओसाका की यह राउंडटेबल उस समिट की व्यापक कूटनीतिक तैयारी का हिस्सा है, जिसमें गुजरात सरकार कई देशों में इसी तरह के रोड-शो आयोजित कर रही है।