क्या करुणा अभियान ने गुजरात में 4,900 पक्षियों की जान बचाई?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या करुणा अभियान ने गुजरात में 4,900 पक्षियों की जान बचाई?

सारांश

गुजरात में शुरू किया गया करुणा अभियान मकर संक्रांति के मौके पर 4,900 से अधिक घायल पक्षियों को बचाने में सफल रहा है। यह पहल पशु चिकित्सकों और स्वयंसेवकों के सहयोग से कार्यरत है, जो जीवों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य बातें

करुणा अभियान ने 4,900 से अधिक पक्षियों को बचाया।
गुजरात में घायल पक्षियों के उपचार के लिए एक बहुस्तरीय ढांचा है।
यह अभियान पशु चिकित्सकों और स्वयंसेवकों का सहयोग प्राप्त करता है।
गुजरात एशियाई शेरों का एकमात्र निवास स्थान है।
अभियान चौबीसों घंटे चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता है।

अहमदाबाद, १५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। गुजरात में घायल पक्षियों को बचाने और उनके उपचार के लिए आरंभ किए गए 'करुणा अभियान' ने इस वर्ष मकर संक्रांति पर असाधारण सफलता प्राप्त की है।

राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के अनुसार, १४ जनवरी, २०२६ तक राज्यभर में कुल ५,४३९ पक्षियों का उपचार किया गया, जिनमें से ४,९३७ (९१ प्रतिशत) को सफलतापूर्वक संरक्षित किया गया।

वास्तव में, मकर संक्रांति और इसके आस-पास के दिनों में राज्यभर में काफी पतंगें उड़ाई जाती हैं, जिससे कई बार पक्षियों को गंभीर चोटें पहुँचती हैं। पतंगों और उनकी डोर की वजह से पक्षी घायल हो जाते हैं। इसलिए गुजरात में ऐसे पक्षियों के उपचार के लिए 'करुणा अभियान' की शुरुआत की गई है। इस अभियान में

पशु चिकित्सकों, स्वयंसेवकों और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों को शामिल किया गया है।

मंत्री ने करुणा अभियान को "जीवित प्राणियों के प्रति करुणा की एक अनूठी पहल" बताते हुए इसके बढ़ते प्रभाव और राज्यव्यापी पहुंच पर प्रकाश डाला।

गुजरात ने नीति, संरक्षण कार्यक्रमों, बचाव नेटवर्क और समुदाय-संचालित पहलों के मिश्रण के माध्यम से वन्यजीवों की रक्षा और जानवरों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत और बहुस्तरीय ढांचा तैयार किया है।

यह राज्य भारत में एशियाई शेरों की एकमात्र आबादी का घर है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त गिर संरक्षण परियोजना के माध्यम से संरक्षित किया जाता है। इस परियोजना में पर्यावास बहाली, शिकार-विरोधी गश्त, रेडियो कॉलर लगाना, वन्यजीव गलियारे और वैज्ञानिक निगरानी शामिल हैं।

गुजरात में वन्यजीव बचाव और त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयों का एक मजबूत नेटवर्क भी है, जिसे वन विभाग, गैर सरकारी संगठनों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का समर्थन प्राप्त है। ये इकाइयाँ पशुओं की चोटों, मानव-वन्यजीव संघर्ष और आपात स्थितियों में सहायता प्रदान करती हैं।

करुणा अभियान जैसी पहलों की मदद से पतंगबाजी के मौसम में घायल पक्षियों को बचाने के लिए पशु चिकित्सकों और हजारों स्वयंसेवकों को जुटाया जाता है, जबकि जीवदया चैरिटेबल ट्रस्ट, वन विभाग के अस्पताल और वन्यजीव पुनर्वास केंद्र जैसे विशेष केंद्र चौबीसों घंटे चिकित्सा देखभाल प्रदान करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

करुणा अभियान न केवल एक मानवीय पहल है, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है कि हम जीवों की रक्षा करें। यह पहल हमें यह सिखाती है कि हमें प्रकृति और उसके प्राणियों का संरक्षण करना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करुणा अभियान क्या है?
करुणा अभियान एक पहल है जो घायल पक्षियों के उपचार और बचाव के लिए कार्यरत है।
इस अभियान में कौन शामिल है?
इसमें पशु चिकित्सक, स्वयंसेवक और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमें शामिल हैं।
मकर संक्रांति पर कितने पक्षियों का इलाज किया गया?
इस वर्ष मकर संक्रांति पर कुल 5,439 पक्षियों का इलाज किया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले